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मानसून की रफ्तार बढ़ी, फिर भी खरीफ में बोआई 21% पीछे; अरहर का रकबा 41% घटा

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खरीफ सीजन की प्रमुख दलहन फसल अरहर (तुअर) के बोआई क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। इस साल अरहर का रकबा 41.19 फीसदी घट गया है

Last Updated- July 07, 2026 | 10:04 PM IST
Paddy Field
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: PTI

देश में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ ही खरीफ फसलों की बोआई ने भी रफ्तार पकड़ ली है। हालांकि, पिछले साल की समान अवधि की तुलना में खरीफ फसलों की बोआई अभी भी करीब 21 फीसदी पीछे चल रही है। चालू सीजन में दलहन फसलों का रकबा 10.34 लाख हेक्टेयर कम दर्ज किया गया है, जो चिंता का विषय माना जा रहा है।

पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में दलहन फसलों की बोआई करीब 22 फीसदी कम हुई है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, 5 जुलाई तक देश में दलहन फसलों की कुल बोआई 37.15 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 47.49 लाख हेक्टेयर थी। यानी इस बार दलहन फसलों का रकबा 10.34 लाख हेक्टेयर कम है।

चालू खरीफ सीजन में दलहन फसलों का औसत बोआई क्षेत्र 123.64 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जबकि 2025-26 के पूरे खरीफ सीजन में दलहन फसलों की बोआई 118.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई थी।

अरहर का रकबा 41 फीसदी घटा

खरीफ सीजन की प्रमुख दलहन फसल अरहर (तुअर) के बोआई क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। इस साल अरहर का रकबा 41.19 फीसदी घट गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष की समान अवधि में अरहर की बोआई 21 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो इस बार घटकर 12.35 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी अब तक 8.65 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में अरहर की बोआई हुई है।

देश में खरीफ सीजन के दौरान अरहर का औसत बोआई क्षेत्र 44.32 लाख हेक्टेयर आंका गया है, जबकि पिछले पूरे सीजन में 44.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी बोआई हुई थी।

उड़द और मूंग की बोआई भी पिछड़ी

अरहर के साथ-साथ अन्य दलहन फसलों के रकबे में भी कमी दर्ज की गई है। उड़द का बोआई क्षेत्र 4.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.01 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि मूंग का क्षेत्र 17.20 लाख हेक्टेयर से घटकर 16.81 लाख हेक्टेयर पर आ गया है।

हालांकि, मोठ का रकबा पिछले वर्ष के 3 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 3.45 लाख हेक्टेयर हो गया है। वहीं, अन्य दलहन फसलों का क्षेत्रफल 1.56 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.40 लाख हेक्टेयर रह गया है।

मानसून में देरी से प्रभावित हुई बोआई

मानसून में देरी का असर दलहन फसलों की बोआई पर साफ दिखाई दिया है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों, खासकर अरहर उत्पादक क्षेत्रों में, पिछले सप्ताह तक पर्याप्त मानसूनी बारिश नहीं हुई थी। इसके कारण बोआई की रफ्तार काफी धीमी रही। सरकार की ओर से भी किसानों से जल्दबाजी में बोआई न करने की अपील की गई थी।

हालांकि, पिछले एक सप्ताह के दौरान इन राज्यों में अच्छी बारिश शुरू हो गई है। इससे दलहन सहित अन्य खरीफ फसलों की बोआई में तेजी आने की उम्मीद है और आने वाले सप्ताहों में बोआई के आंकड़ों में सुधार देखने को मिल सकता है।

बोआई में तेजी आने की उम्मीद

हालांकि अभी तक दलहन फसलों की बोआई पिछले वर्ष की तुलना में कम हुई है, लेकिन मौसम में सुधार के चलते इसमें तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों की बोआई का प्रमुख समय जुलाई का महीना होता है। यदि पूरे महीने मानसून सामान्य और सक्रिय बना रहता है, तो दलहन फसलों के रकबे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

इसके अलावा, खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध रहने से किसानों को दोबारा बोआई करने की आवश्यकता भी कम पड़ेगी, जिससे उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। दलहन फसलों की अधिकांश बोआई जुलाई के दौरान पूरी होती है। ऐसे में यदि मानसून सामान्य बना रहता है, तो आने वाले दिनों में इनके रकबे में तेजी से सुधार देखने को मिल सकता है।

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First Published - July 7, 2026 | 9:52 PM IST

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