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Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले तीन हफ्ते के निचले स्तर पर फिसला रुपया, तेल कंपनियों की मांग से बढ़ा दबाव

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घरेलू मुद्रा 95.48 प्रति डॉलर के निचले स्तर को छूने के बाद 95.40 प्रति डॉलर पर बंद हुई जबकि इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.22 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी

Last Updated- July 06, 2026 | 10:20 PM IST
Rupee vs Dollar
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को तीन हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया। इसकी वजह थी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) की तरफ से डॉलर की लगातार खरीद, परिपक्व हो रहे नॉन-डिलिवरेबल फॉरवर्ड (एनडीएफ) अनुबंधों से जुड़ी मांग और डॉलर इंडेक्स में बढ़ोतरी। इन सबने कच्चे तेल की कम कीमतों से मिली मदद का असर खत्म कर दिया। पिछले छह कारोबारी सत्रों में से पांच में भारतीय मुद्रा की कीमत में गिरावट आई है।

घरेलू मुद्रा 95.48 प्रति डॉलर के निचले स्तर को छूने के बाद 95.40 प्रति डॉलर पर बंद हुई जबकि इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.22 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। यह इस साल 11 जून के बाद का सबसे निचला स्तर है। डॉलर इंडेक्स मजबूत होकर लगभग 101 पर पहुंच गया जबकि एशिया की ज्यादातर मुद्राओं में भी गिरावट देखी गई।

दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी आई। बेंचमार्क 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 6.69 फीसदी पर बंद हुई, जो 13 मार्च के बाद का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले यह 6.71 फीसदी पर बंद हुई थी। 

बाजार के जानकारों का कहना है कि सरकारी और निजी तेल कंपनियों ने कच्चे तेल के भुगतान के लिए डॉलर की जमकर खरीदारी की। लिहाजा, इस दौरान रुपये पर दबाव का सबसे बड़ा कारण आयातकों की मांग रही। एक विदेशी बैंक ने भी डॉलर खरीदे जबकि निर्यातकों की ओर से डॉलर की बिक्री कम रही, जिससे बाजार में असंतुलन और बढ़ गया। 

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, तेल कंपनियों ने डॉलर खरीदे। एक विदेशी बैंक ने भी डॉलर खरीदे। बेचने वाले कम थे। डॉलर इंडेक्स बढ़ा जबकि एशियाई देशों की मुद्राएं शुक्रवार के बंद स्तर के मुकाबले थोड़ी नीचे रहीं। ब्रेंट ऑयल की कीमत में गिरावट से रुपये पर दबाव कुछ कम हुआ, लेकिन नाजुक युद्धविराम की नाजुकता के कारण तेल कंपनियों को तेल खरीदना समझदारी भरा कदम लग रहा है ताकि लड़ाई शुरू हो जाए तो वे तैयार रहें।

एनडीएफ अनुबंधों के परिपक्व होने से भी डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे बाजार में डॉलर की खरीदारी में तेजी आई और स्थानीय मुद्रा पर और दबाव पड़ा। फॉरवर्ड मार्केट में आरबीआई की बकाया शुद्ध शॉर्ट डॉलर पोजीशन अप्रैल के आखिर के 95.30 अरब डॉलर थीं जो मई के आखिर में बढ़कर रिकॉर्ड 106.66 अरब डॉलर पर पहुंच गईं। 106 अरब डॉलर की शुद्ध शॉर्ट डॉलर पोजीशन में से 19.82 अरब डॉलर एक महीने के अनुबंधों में, 8.86 अरब डॉलर 1 से 3 महीने की अवधि में, 21.90 अरब डॉलर की पोजीशन तीन महीने से एक साल के बीच परिपक्व होने वाली थी और बाकी 56.07 अरब डॉलर एक साल से ज्यादा समय के अनुबंधों में थीं।

एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, पश्चिम एशिया में नाजुक संघर्ष-विराम के बीच ऐहतियात के तौर पर तेल कंपनियों ने डॉलर में अपनी पोजीशन बनाना जारी रखा। उन्हें डर था कि तनाव फिर से बढ़ा तो कच्चे तेल की कीमतों में इजाफा हो सकता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि मंगलवार को रुपया 95.00 रुपये प्रति डॉलर से 95.75 रुपये प्रति डॉलर के दायरे में रहेगा, जब तक कि निर्यातकों की ओर से डॉलर की बिक्री या केंद्रीय बैंक का दखल न बढ़ जाए। 

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First Published - July 6, 2026 | 10:20 PM IST

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