facebookmetapixel
Advertisement
भारतीय शिपयार्डों में बनेंगे हाइटेक जहाज, डेनमार्क की दिग्गज शिपिंग कंपनी मेएर्स्क के साथ बातचीत शुरूकैटिगरी-3 AIF की तेज रफ्तार बरकरार, तीसरे साल भी उद्योग से बेहतर रही वृद्धिDXC टेक्नॉलजीज बेंगलूरु में खोलेगी ग्लोबल AI हब, साइबर रेंज से लेकर फोरेंसिक लैब तक होंगी सुविधाएंEditorial: एथनॉल नीति में उपभोक्ता विकल्प और आर्थिक संतुलन की जरूरतमर्सिडीज-बेंज इंडिया ने दिखाई जबरदस्त तेजी: पहली छमाही में बेचीं रिकॉर्ड गाड़ियां, बिक्री में 9% का उछालभारतीय EV बाजार में जबरदस्त तेजी, कुल वाहन बिक्री में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की हिस्सेदारी पहली बार 12% पारस्विगी अब बनी भारतीय स्वामित्व वाली कंपनी, घरेलू हिस्सेदारी 50 फीसदी के पार होने से शेयरों में बड़ा उछालटाटा पावर का बड़ा प्लान: 2030 तक ₹1 लाख करोड़ राजस्व का लक्ष्य, परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी रखेगी कदमभारत को ग्लोबल कैपिटल चाहिए तो FTA को निवेश के लिहाज से बनाना होगा मजबूतदो पायदान चढ़कर भारत बना दुनिया का 11वां सबसे बड़ा FDI केंद्र, चीन-अमेरिका में घटा विदेशी निवेश: रिपोर्ट

कनेक्टेड कारों और EVs में हैकिंग का खतरा बढ़ा, सरकार ने वाहन कंपनियों को दिया साइबर ऑडिट का निर्देश

Advertisement

यह कदम इलेक्ट्रिक वाहन हैकिंग की चिंताओं के मद्देनजर ऐपल और गूगल को तीन ऐप हटाने का निर्देश दिए जाने के बाद उठाया गया है

Last Updated- July 07, 2026 | 10:40 PM IST
electric vehicle (ev)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार ने वाहन विनिर्माताओं और वाहन कलपुर्जा बनाने वाली कंपनियों को कनेक्टेड कारों और इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में लगे वाहन प्रबंधन सॉफ्टवेयर एवं उपकरणों का व्यापक ऑडिट करने का निर्देश दिया है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह निर्देश यात्री और वाणिज्यिक दोनों वाहन श्रे​णियों पर लागू होगा। 

यह कदम इलेक्ट्रिक वाहन हैकिंग की चिंताओं के मद्देनजर ऐपल और गूगल को तीन ऐप हटाने का निर्देश दिए जाने के बाद उठाया गया है। भारी उद्योग मंत्रालय ने वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम और वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं के संगठन एक्मा को लिखे एक पत्र में कंपनियों से अपने बैटरी संचार इंटरफेस का ऑडिट करने और असुरक्षित डिफॉल्ट सेटिंग, कमजोर प्रमाणीकरण या असुरक्षित ओवर-द-एयर (ओटीए) विकल्पों को खत्म करने का आग्रह किया है।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने भी इस पत्र को देखा है। उसके अनुसार, भारी उद्योग मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वाहन विनिर्माताओं को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय , इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ मिलकर कारखाना स्तर पर बेहतर और दमदार साइबर सुरक्षा डिजाइन प्रोटोकॉल स्थापित करने चाहिए।  

पत्र में हैकिंग की घटनाओं को सुरक्षा के लिए एक गंभीर चिंता बताई गई है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। एक सूत्र ने बताया कि सरकार की मुख्य चिंता कनेक्टेड कारों के लिए है।

यह कदम सरकार द्वारा उन तीन ऐप पर प्रतिबंध लगाए जाने के कुछ ही समय बाद उठाया गया है जिनका इस्तेमाल ई-ऑटोरिक्शा और दोपहिया वाहन जैसे इले​क्ट्रिक वाहनों में लगी बैटरी मैनेजमेंट डिवाइस का अनधिकृत नियंत्रण लेकर उन्हें मनमाने ढंग से रोकने के लिए किया जा रहा था।

तीनों ऐप- बीएटी बीएमएस, लॉसिगी और इपोच-आई आयन- को ऐपल स्टोर और गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें दिखाया गया था कि इन ऐप के उपयोग से बैटरी से चलने वाले वाहनों को दूर से ही नि​​ष्क्रिय किया जा सकता है।

ये ईवी में बैटरी स्तर, तापमान और जीवन चक्र की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप्लिकेशन हैं। ये उपयोगकर्ताओं को ब्लूटूथ के जरिये इन वाहनों में लगे बैटरी प्रबंधन उपकरण से कनेक्ट करने की अनुमति देते हैं।

इस साल के आरंभ में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी एक मसौदा अधिसूचना में 1 अक्टूबर, 2026 से कनेक्टेड वाहनों के लिए कुछ मानकों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का प्रस्ताव दिया गया था। पत्र में कहा गया है, ‘विनिर्माताओं को अब व्यवस्थित साइबर सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (सीएसएमएस) और सॉफ्टवेयर अपडेट प्रबंधन प्रणाली (एसयूएमएस) तैयार करना चाहिए। इसमें ओटीए अपडेट को सुरक्षित करना, दमदार उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण को लागू करना और सॉफ्टवेयर के एकीकरण को सत्यापित करना शामिल है।’

वाहन इंटेलिजेंस फर्म जाटो डायनेमिक्स के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों के दौरान कनेक्टेड कार के लिए सुविधाओं में काफी वृद्धि हुई है। इनमें रिमोट सेवाएं (ऐप-आधारित रिमोट ऐक्सेस एवं नियंत्रण) 2022 में 21 फीसदी से बढ़कर 2026 तक 27 फीसदी हो गईं। इस दौरान रिमोट बैटरी प्रबंधन 1.5 फीसदी से बढ़कर 5.2 फीसदी हो गया। आंकड़ों के अनुसार, रिमोट एचवीएसी (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) भी इस दौरान 10.5 फीसदी से बढ़कर 17.1 फीसदी हो गई।

हालांकि बीएटी-बीएमएस शेनझेन ग्रीनर्जी टेक्नॉलजी द्वारा विकसित ब्लूटूथ सक्षम बैटरी सिस्टम को प्रबंधित करने के लिए डिजाइन किया गया एक वैध टूल है। मगर सरकार का कहना है कि जब कम लागत वाले लीथियम बैटरी पैक को डिफॉल्ट फैक्टरी सेटिंग्स, कमजोर पासवर्ड या किसी ब्लूटूथ प्रमाणीकरण के बिना तैनात किया जाता है तो एक गंभीर सुरक्षा चूक हो सकती है।

इसके कारण कोई भी व्यक्ति इस ऐप के जरिये वाहन से जुड़ने के लिए 10 से 15 मीटर की दूरी पर खड़ा हो सकता है और डिस्चार्ज फंक्शन को काट सकता है। ऐसे में मोटर तक बिजली की आपूर्ति तत्काल कट जाएगी जिससे वाहन रुक जाएगा। सरकार का मानना ​​है कि इस ऐप को हटाना केवल लक्षण का समाधान करता है। मगर इन संचार इंटरफेस में मौजूद चुनौतियां बरकरार हैं। 

जाटो डायनेमिक्स के अध्यक्ष रवि भाटिया ने कहा, ‘स्मार्टफोन के विपरीत कनेक्टेड वाहनों के लिए कोई प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं है। भारतीय ऑटोमोटिव उद्योग में कोई सामान्य कनेक्टेड वाहन सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म नहीं है। अधिकतर विनिर्माता इनहाउस या प्रौद्योगिकी साझेदारों के साथ विकसित कनेक्टेड वाहन परिवेश का उपयोग करते हैं।’

उपभोक्ता से जुड़ी सेवाओं में सुजुकी कनेक्ट (मारुति सुजुकी), ह्युंडै ब्लूलिंक, किया कनेक्ट, टाटा आईआरए, महिंद्रा एड्रेनॉक्स, एमजी आई-स्मार्ट, और होंडा कनेक्ट शामिल हैं। इनमें लगे सॉफ्टवेयर आम तौर पर बॉश, हर्मन, कॉन्टिनेंटल, क्वालकॉम और टाटा टेक्नॉलजीज/ केपीआईटी जैसे वैश्विक वाहन प्रौद्योगिकी आपूर्तिकर्ताओं के साथ विकसित किए जाते हैं। क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर आम तौर पर एमेजॉन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस), माइक्रोसॉफ्ट एज्योर या गूगल क्लाउड द्वारा प्रदान किया जाता है। 

Advertisement
First Published - July 7, 2026 | 10:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement