कैटिगरी-3 (कैट-3) अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंडों (एआईएफ) ने लगातार तीसरे साल एआईएफ उद्योग के दूसरे सेगमेंट के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। कैट-3 एआईएफ अमीर निवेशकों के लिए निवेश का एक अहम जरिया हैं, जो बाजार से बेहतर रिटर्न पाने के लिए जटिल रणनीतियों का इस्तेमाल करने की सुविधा देते हैं।
हाल में जारी नियामकीय आंकड़ों के अनुसार, अमीर निवेशकों से मिलने वाली प्रतिबद्धताओं में कैट-3 एआईएफ ने सालाना आदार पर 36.9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की और वित्त वर्ष 2025-26 तक यह आंकड़ा 3.1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं, सभी एआईएफ में कुल मिलाकर 25.6 फीसदी की वृद्धि (16.9 लाख करोड़ रुपये) दर्ज की गई।
कैट-3 के तहत जुटाए गए फंड (जो स्कीम में आई प्रतिबद्धता को दिखाते हैं) वित्त वर्ष 26 में 35.5 फीसदी बढ़कर करीब 2 लाख करोड़ रुपये हो गए, जबकि इसी दौरान इन फंडों से किए गए निवेश 30.8 फीसदी बढ़कर 2.1 लाख करोड़ रुपये हो गए। कुल एआईएफ उद्योग के लिए जुटाए गए फंड और किए गए निवेश में वित्त वर्ष 26 में 25-26 फीसदी की वृद्धि हुई। कैट-3 एआईएफ द्वारा जुटाए गए फंड और किए गए निवेश, दोनों ने लगातार तीसरे साल कुल एआईएफ उद्योग की वृद्धि को पीछे छोड़ दिया है।
यह बात इसलिए अहम हो जाती है क्योंकि लॉन्ग-शॉर्ट फंड नाम की एक खास रणनीति की लोकप्रियता कम हो गई है, जिससे निवेशक बाजार के चढ़ने या गिरने, दोनों ही स्थितियों में पैसा कमा सकते थे। बाजार की चालों पर दोनों तरफ दांव लगाकर फायदा उठाने वाले ऐसे लॉन्ग-शॉर्ट फंड की लोकप्रियता सितंबर 2025 में स्पेशलाइज़्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ) के आने के बाद कम हो गई।
एसआईएफ इन्हीं रणनीतियों को कर के लिहाज़ से ज्यादा फायदेमंद तरीके से और आम तौर पर 10 लाख रुपये के कम टिकट साइज पर पेश करते हैं, जिसमें सिर्फ मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए ही छूट मिलती है। सभी एआईएफ भी इसी तरह मान्यता प्राप्त निवेशकों के लिए छूट देते हैं, लेकिन उनमें कम से कम 1 करोड़ रुपये का निवेश जरूरी होता है। कैटिगरी-1 फंड, स्टार्टअप, इन्फ्रास्ट्रक्चर और दूसरे सेक्टर में निवेश करते हैं, जबकि कैटिगरी-2 फंड में प्राइवेट इक्विटी जैसे सेक्टर शामिल होते हैं।
उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, एसआईएफ के आने के बाद कुछ लॉन्ग-शॉर्ट फंडों के बंद होने की खबरों के बावजूद कैट-3 एआईएफ में बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह दूसरी श्रेणियों में अच्छा प्रदर्शन और लॉन्ग-ओनली फंडों में तेजी थी, जो सिर्फ बाजार के ऊपर जाने पर दांव लगाते हैं।
अल्टरनेटिव्स-ट्रैकर पीएमएस के संस्थापक-निदेशक डैनियल जीएम ने कहा, ज्यादातर प्री आईपीओ फंड कैट-2 के बजाय कैट-3 के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, प्री आईपीओ स्कीम का कैट-3 की ओर यह बढ़ता झुकाव लचीलापन देता है। कई कैट-3 फंड असूचीबद्ध प्रतिभूतियों में 49 फीसदी की सीमा बनाए रखते हैं, जिससे बाकी रकम सूचीबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश करने का विकल्प खुला रहता है। डैनियल जीएम ने कहा कि कैट-3 के तहत मल्टी-स्ट्रेटजी एक और उभरता हुआ ट्रेंड है, जिसमें एक ही फंड के अंदर डेट, डेरिवेटिव्स और कैश मार्केट इक्विटी सिक्योरिटीज जैसे सेगमेंट में निवेश किया जाता है।
कैट-3 के तहत जुटाए गए फंड (जो स्कीम में मिली प्रतिबद्धता को दिखाते हैं) वित्त वर्ष 26 में सालाना आधार पर 35.5 फीसदी बढ़कर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये हो गए, जबकि इसी दौरान इन फंडों से किए गए निवेश 30.8 फीसदी बढ़कर 2.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए। कुल मिलाकर, एआईएफ उद्योग के लिए जुटाए गए फंड और किए गए निवेश वित्त वर्ष 26 में 25-26 फीसदी की दर से बढ़े।
एंबिट ऐसेट मैनेजमेंट के सीईओ सुशांत भंसाली ने कहा कि अब कैट-3 एआईएफ में लॉन्ग-शॉर्ट फंडों की हिस्सेदारी बहुत कम है। प्रदर्शन और कर से जुड़ी बातें इस सेगमेंट के लिए रुकावट रही हैं। इस श्रेणी को पास-थ्रू स्टेटस नहीं मिला है, जिसका मतलब है कि निवेशकों को रिटर्न तभी मिलता है जब फंड के स्तर पर कर काट लिया जाता है। यह म्युचुअल फंड या एसआईएफ से अलग है, जहां फंड के स्तर पर कोई कर नहीं लगता और निवेशक निवेश निकासी के समय कर चुकाते हैं। कैट-3 एआईएफ की वृद्धि में लॉन्ग-ओनली फंडों ने अहम भूमिका निभाई है।
लॉन्ग-ओनली सेगमेंट में हाल ही में हुई ऐसेट वृद्धि का एक बड़ा हिस्सा उन पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (पीएमएस) देने वालों की वजह से है, जिन्होंने नए एआईएफ शुरू करने का फैसला किया है। यह बदलाव तब हो रहा है, जब पीएमएस स्कीम में कर का ढांचा निवेशकों के लिए ज्यादा फायदेमंद है और इसमें निवेश से जुड़ी पाबंदियां भी अपेक्षाकृत कम हैं।
पीएमएस कंपनियों का एआईएफ स्कीम की ओर रुख करने का मकसद उस पूल्ड स्ट्रक्चर का फायदा उठाना है जो लॉन्ग-ओनली कैट-3 एआईएफ दे सकते हैं। पीएमएस ढांचे के मुकाबले कैट-3 एआईएफ का प्रबंधन आसान है, क्योंकि पीएमएस में हर निवेशक के अलग डीमैट खाते में शेयर रखने पड़ते हैं। भंसाली के मुताबिक, इस बदलाव की वजह से कैट-3 एआईएफ में जिस रफ्तार से वृद्धि हो रही है, वह इस सेगमेंट के परिपक्व होने पर भी जारी रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, कई पीएमएस कंपनियों ने एआईएफ शुरू किए हैं और यह सिलसिला जारी रहेगा।
पीएमएस उद्योग की परिसंपत्तियां वित्त वर्ष 26 में 9.6 फीसदी बढ़कर 41.4 लाख करोड़ रुपये (रिटायरमेंट एसेट्स सहित) हो गईं, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह वृद्धि 13.9 फीसदी (37.8 लाख करोड़ रुपये) थी।