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महंगा हो सकता है खाद्य तेल का आयात

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Last Updated- December 06, 2022 | 12:40 AM IST

खाद्य तेलों पर आयात शुल्क खत्म किए जाने से घरेलू थोक बाजारों में खाद्य तेल 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक सस्ते हो गए हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो यह रुख ज्यादा दिनों तक जारी नहीं रह सकता।


विशेषज्ञों ने कहा कि बाजार में अटकलें हैं कि दो महीने बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतें बढ़ सकती हैं। यद्यपि आयात शुल्क घटाए जाने से निजी कंपनियां आगामी महीनों के लिए और अधिक आर्डर जारी कर रही हैं, लेकिन वे मौजूदा स्तरों पर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मोलभाव नहीं कर सकतीं क्योंकि जून के बाद कीमतों में तेजी आने की संभावना है।


साल्वेंट एक्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) ने कहा है  ‘ इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों की कीमतें स्थिर हैं। हालांकि व्यापारियों का अनुमान है कि कीमतें जून के बाद बढ़ सकती हैं।’ लेकिन कारोबारियों का अनुमान है कि जून के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी।


एसईए का कहना है कि अप्रैल महीने में आयातित तेल की कीमत मार्च के मुकाबले स्थिर है। आयातित आरबीडी की कीमत 6.29 फीसदी की गिरावट के साथ 53,600 रुपये टन के स्टर पर पहुंच गयी है। उसी तरह कच्चे पामऑयल की कीमत 11 फीसदी की गिरावट के साथ 46,000 रुपये प्रति टन के स्तर पर आ गयी।


मूंगफली तेल की कीमत में 7.75 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी है। अब इसके भाव 65,500 रुपये प्रति टन के स्तर पर आ गये हैं। वही सूरजमुखी तेल की कीमत 69,000 रुपये प्रति टन से गिरकर 57,000 रुपये प्रति टन हो गयी है। आयात शुल्क में कटौती के बाद पहले के मुकाबले तेल का आयात ज्यादा सस्ता हो गया है।

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First Published - April 28, 2008 | 11:40 PM IST

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