विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि तेजी से बंट रही दुनिया में एक सशक्त बहुपक्षवाद की जरूरत है। जयशंकर ने कहा कि ‘दुनिया नियम-कायदे बरकरार रखने के लिए केवल कुछ ही देशों का मुंह नहीं ताक सकती।’ विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़े जोखिम कम करने और एक मजबूत वैकल्पिक व्यवस्था बना कर उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने का आह्वान किया ताकि‘आर्थिक क्षेत्र में किसी के दबाव में आने या किसी के आगे विवश होने जैसी स्थिति न उत्पन्न हो।’
जयशंकर ने दक्षिण कोरिया में ‘जेजू फोरम फॉर पीस ऐंड प्रोस्पेरिटी 2026’ में कहा कि ‘दुनिया में देशों के बीच मतभेद बढ़ेंगे या एक बिखराव की स्थिति बनी रहेगी’। उन्होंने कहा, ‘यह पूरी तरह खराब भी माना जा सकता, कुछ मायनों में तो यह अच्छा भी है।’ विदेश मंत्री ने कहा कि बिखराव का मतलब है कम दबदबा, अधिक जगह और अधिक लोकतांत्रिक व्यवस्था। उन्होंने कहा कि बिखराव के नुकसान के बारे में कम से कम तीन सवाल पूछे जाने चाहिए यानी क्या यह कार्य क्षमता के खिलाफ है, क्या यह स्थिरता के खिलाफ है और क्या यह सुरक्षा के खिलाफ है?
‘जेजू फोरम फॉर पीस ऐंड प्रोस्पेरिटी 2026’ चर्चा का विषय ‘एक खंडित दुनिया एक समस्या के रूप में और सहयोग को एक समाधान के रूप में पुनर्परिभाषित करना’था।
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों का समाधान केवल गहरे सहयोग से ही किया जा सकता है। जयशंकर ने खंडित दुनिया की चुनौतियों से निपटने के लिए पांच-सूत्रीय तरीका सुझाया। उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े जोखिम कम करने, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने, मुद्दों और समस्याओं से निपटने के लिए प्रभावशाली देशों के बीच खास कार्य योजना पर सहयोग करने, अंतरराष्ट्रीय कानून व्यवस्था, समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि की रक्षा करने और ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) को अधिक क्षमता और अवसर प्रदान करने का सुझाव दिया।
विदेश मंत्री ने कहा कि दुनिया नियमों और कायदे बनाए रखने के लिए कुछ ही देशों पर निर्भर नहीं रह सकती।
जयशंकर ने कहा,‘दुनिया को अपने भविष्य पर अधिक नियंत्रण करना होगा। इसे दूसरी बातों के अलावा नए मजबूत बहुपक्षवाद के जरिये जाहिर किया जाना चाहिए।’ ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब पश्चिम एशिया में संघर्ष की वजह से ऊर्जा आपूर्ति बाधित है और भारत को जरूरी खनिज हासिल करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कुछ स्थायी सदस्य अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि दुनिया हमेशा से कुछ हद तक एकीकृत और कुछ हद तक बंटी हुई रही है मगर पहले जोड़ने और बांटने वाली ताकतें काफी हद तक सीधी-सादी थीं और उनके बीच की लकीरें स्पष्ट खींची हुई थीं। उन्होंने कहा कि मगर अब ऐसा नहीं है।
जयशंकर ने कहा कि आर्थिक एकीकरण और एक-दूसरे पर निर्भरता का स्तर मौजूदा हालात को पहले के हालात से अलग बनाता है क्योंकि अब दुनिया का ध्यान आपूर्ति व्यवस्था, उनकी क्षमता और उनके मजबूत होने पर अधिक टिका है। विदेश मंत्री ने वित्तीय ताकतों, उत्पादन क्षमताओं, बाजार हिस्सेदारी और संसाधनों पर नियंत्रण का इस्तेमाल करने को बांटने वाली ताकत बताया।
जयशंकर ने होर्मुज स्ट्रेट में बाधाओं का जिक्र किया और कहा कि व्यापार का स्वाभाविक कामकाज अब रणनीतिक हिसाब-किताब से ज़्यादा प्रभावित हो रहा है और इसका असर संपर्क के दायरे पर भी पड़ रहा है चाहे बात चोकपॉइंट्स(संकरे मार्ग) की हो या परियोजनाओं की।
जयशंकर ने कहा कि राजनीति भी वैश्वीकरण के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का गलत फायदा उठाए जाने की बात सामने आती है तो उन्हें स्वीकार करने की भावना कम होने लगती है। उन्होंने कहा, ‘कुछ स्थापित ताकतों के लिए अपनी प्रतिस्पर्द्धात्मकता खोने को स्वीकार करना भी मुश्किल होता है।’
मंत्री ने आतंकवाद से निपटने के मामले में देशों के ‘दोहरे रवैये’ और जलवायु परिवर्तन पर ‘खोखले वादों, और कुछ देशों के तो इसे मानने से ही इनकार करने’ की बात कही। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था का स्वाभाविक विकास गैर-बाजार कारकों से बाधित हो रहा है और प्रतिस्पर्द्धा में हेरफेर तथा बाजार तक पहुंच पर रोक लगाकर विकासशील देशों को औद्योगीकरण के अधिकार और क्षमता से वंचित किया जा रहा है।