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आर्टिफिशल इंटेलिजेंस व क्लॉड मिथोस जैसे AI मॉडलों के खतरों से निपटने को सरकार बनाएगी कमांड सेंटर

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घटनाक्रम के जानकार दो अधिकारियों ने कहा कि इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि नए साइबर सुरक्षा उपाय तय समयसीमा के भीतर लागू किए जाएं

Last Updated- June 25, 2026 | 10:32 PM IST
Artificial intelligence (AI)
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और एंथ्रोपिक के क्लॉड मिथोस जैसे सामान्य उद्देश्य वाले एआई मॉडलों से पैदा होने वाले साइबर सुरक्षा मुद्दों के समाधान के लिए सरकार एक सशक्त और एकीकृत कमांड सेंटर स्थापित करने की योजना बना रही है। सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।  

यह नई संस्था इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन काम करेगी। यह एआई से जुड़े नए खतरों पर सरकार की समग्र नीतिगत प्रतिक्रिया को आगे बढ़ाने और ऐसे जोखिमों से निपटने की तैयारियों को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय कायम करने का जिम्मा संभालेगी।

घटनाक्रम के जानकार दो अधिकारियों ने कहा कि इससे यह भी सुनिश्चित होगा कि नए साइबर सुरक्षा उपाय तय समयसीमा के भीतर लागू किए जाएं।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार को एकीकृत साइबर सुरक्षा कमांड सेंटर की आवश्यकता महसूस हो रही है। सरकार का मानना है कि आने वाले कुछ महीनों में फ्रंटियर एआई और सामान्य उद्देश्य मॉडल से पैदा होने वाले खतरों पर प्रतिक्रिया देने में लगने वाला समय बहुत कम हो जाएगा। 

अधिकारी ने कहा, ‘सरकार को एक इकाई के तौर पर काम करना होगा क्योंकि इन नए मॉडलों से जोखिम जल्द ही बढ़ जाएगा। इससे निपटने के लिए एकीकृत नीति प्रतिक्रिया होनी चाहिए।’

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि इस नए संगठन में सरकार, शिक्षाविद और नई एआई कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि आईटी मंत्रालय की ओर से तैयार किए जा रहे नए एआई कानून से इस एकीकृत केंद्र को अधिकार मिलने की उम्मीद है।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को इस संबंध में जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं आया।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सरकार नया कमांड सेंटर तो बना ही रही है, साथ ही उसने उन कुछ कंपनियों से भी संपर्क किया है जिनके पास अभी भी क्लॉड सुरक्षा तक पहुंच है। सरकार उन्हें इस बात के लिए प्रोत्साहित कर रही है कि वे इस टूल के इस्तेमाल से मिले नतीजों को उद्योग के साथ साझा करें।

अधिकारी ने कहा, ‘यह टूल (क्लॉड सुरक्षा) वर्तमान में बीटा चरण में है इसलिए पहुंच को कड़ाई से नियंत्रित किया जाता है। इसमें शामिल सभी संगठनों की जांच-पड़ताल की जाती है और उन्हें सुरक्षा से जुड़ी सख्त शर्तों को पूरा करना होता है। इसके बावजूद पहुंच कंपनी द्वारा निर्धारित उपयोगकर्ताओं तक ही सीमित रहता है। लेकिन हम कंपनियों से बात कर रहे हैं ताकि यह समझ सकें कि वे कौन सा डेटा साझा कर सकती हैं।’

यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब कुछ हफ्ते पहले ही भारतीय संगठनों जिनमें भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम, राष्ट्रीय महत्त्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र, दूरसंचार विभाग का डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के साथ ही कुछ आईटी कंपनियों की चुनिंदा टीमों शामिल हैं, जिनको एंथ्रोपिक के क्लॉड मिथोस और कंपनी के अन्य नवीनतम एआई मॉडल तक पहुंच प्रदान की गई थी। लेकिन बाद में उनसे यह पहुंच वापस ले ली गई क्योंकि अमेरिकी सरकार ने एंथ्रोपिक को किसी भी विदेशी नागरिक को फेबल 5 और मिथोस 5 की पहुंच देने से रोक दिया था।

इस महीने की शुरुआत में 3 जून को प्रकाशित एक ब्लॉग में एंथ्रोपिक ने बताया कि बुरे इरादे वाले लोग एआई का इस्तेमाल ऐसे तरीकों से कर रहे थे जिनसे वे और ज्यादा खतरनाक हो गए थे।

एंथ्रोपिक ने कहा था, ‘खास तौर पर साइबर हमले करने वाले ज्यादा जटिल चरण वाले एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। साइबर हमले अब ज्यादा स्वचालित होते जा रहे हैं और एआई का उपयोग हमले के कई हिस्सों को एक साथ जोड़ने के लिए किया जा सकता है। इससे उच्च जोखिम वाले से निम्न जोखिम वाले सेंधमारों के बीच फर्क करने के पुराने तरीके अब उतने असरदार नहीं रहे।’

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First Published - June 25, 2026 | 10:32 PM IST

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