वाहन विनिर्माताओं के संगठन सायम ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से कहा है कि सरकार के नियमों के तहत निर्धारित बैटरी रीसाइक्लिंग लक्ष्यों से इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की कीमतें 3 से 5 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। सायम ने यह भी कहा है कि इससे भारत में ईवी की बिक्री पर बुरा असर पड़ सकता है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को सूत्रों से ऐसी जानकारी मिली है।
सायम ने पिछले साल नवंबर में सीपीसीबी को भेजे एक पत्र में कहा था कि बैटरी रीसाइक्लिंग नियमों के तहत ईवी बनाने वाली कंपनियों को इस्तेमाल के महज 8 साल बाद 70 फीसदी बैटरी वापस लेकर एकत्रित करनी होगी जबकि इलेक्ट्रिक कारों में इस्तेमाल होने वाली लीथियम आयरन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरी की उम्र काफी अधिक होती है।
पिछले महीने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ हुई बैठक में भी सायम ने यह चिंता जताई थी। सीपीसीबी इसी मंत्रालय के तहत काम करता है।
सायम के मुताबिक, मौजूदा नियमों को मानने से औसतन 35 से 40 किलोवॉट घंटे वाली इलेक्ट्रिक कार बैटरी की लागत में 8,000 से 25,000 रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है। इसमें बैटरी एकत्रित करने, उसके भंडारण, हैंडलिंग एवं पहचान करने वाली प्रणाली पर होने वाला खर्च शामिल नहीं है।
सायम ने सीपीसीबी से बैटरी रीसाइक्लिंग के नियमों को आसान बनाने का भी अनुरोध किया है। उसका कहना है कि मौजूदा नियमों में धातु विशेष के लिए रिकवरी लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं लेकिन रीसाइक्लिंग के दौरान होने वाले नुकसान और बैटरी के अलग-अलग घटकों का ठीक से ध्यान नहीं रखा गया है।
उद्योग संगठन ने कहा कि इससे रिकवर की जा सकने वाली धातुओं की उपलब्धता और उत्पादकों पर थोपी गई जिम्मेदारियों के बीच असंतुलन पैदा हो सकता है।
बैटरी अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत वाहन विनिर्माता, बैटरी विनिर्माता, आयातक और ब्रांड मालिक सहित सभी उत्पादकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बैटरियों को एकत्रित किया जाए और उसे विस्तारित उत्पादक दायित्व (ईपीआर) ढांचे के तहत मरम्मत या रीसाइक्लिंग के लिए भेजा जाए।
जहां तक ईवी बैटरियों का सवाल है तो नियमों के अनुसार 8 साल के उपयोग के बाद वाहन विनिर्माताओं को बैटरियों को एकत्र करना शुरू करना होगा और साल के दौरान बेची गई 70 फीसदी बैटरियों को एकत्रित करना होगा। समय के साथ यह लक्ष्य बढ़ता जाएगा और अंततः वाहन विनिर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी 82 फीसदी बैटरियों की रीसाइक्लिंग अधिकृत संस्थाओं के जरिये किया जाए।
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और सायम ने इस मुद्दे पर बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे सवालों का खबर लिखे जाने तक कोई जवाब नहीं दिया।