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Silver Price: चांद पर चांदी के भाव! औद्योगिक मांग ने बदली तस्वीर, अब क्या करें निवेशक?

चांदी के वायदा भाव ने आज MCX पर 2,54,174 रुपये और कॉमेक्स पर 82.67 डॉलर का सर्वोच्च स्तर छू लिया। हालांकि बाद में दोनों बाजार में इनके भाव तेजी से गिरकर कारोबार करने लगे

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रामवीर सिंह गुर्जर   
Last Updated- December 29, 2025 | 4:19 PM IST

Silver Price: आमतौर पर सोना चांदी से बेहतर रिटर्न देता है। लेकिन इस साल कहानी कुछ ज्यादा ही अलग है। चांदी ने निवेशकों को सोने से काफी अधिक कमाई कराई है। सोना जितना साल भर में महंगा हुआ है, चांदी उतनी तीन महीने में चढ़ चुकी है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इस साल सोने के वायदा भाव करीब 83 फीसदी बढ़ चुके हैं, जबकि चांदी के वायदा भाव तीन महीने में ही 80 फीसदी बढ़ चुके हैं। बीते डेढ़ महीने की बात करें तो इसके भाव 50 फीसदी से ज्यादा चढ़ चुके हैं।

चांदी पहली बार ₹2.5 लाख के पार

आज के उच्च भाव से तुलना करने पर साल भर में चांदी अब तक 190 फीसदी रिटर्न दे चुकी है। MCX पर चांदी के वायदा भाव आज पहली बार 2.50 लाख रुपये किलो के स्तर को पार कर गए। हालांकि बाद में कारोबार के दौरान मुनाफावसूली के कारण यह इस स्तर से काफी नीचे कारोबार करने लगी।

MCX पर चांदी का मार्च अनुबंध आज 2,54,174 रुपये किलो के भाव पर ऑल टाइम हाई पर पहुंच गए। हालांकि खबर लिखे जाने के समय यह अनुबंध इस रिकॉर्ड भाव से करीब 19 हजार रुपये की तेज गिरावट के साथ 2,35,466 रुपये किलो पर कारोबार कर रहा था।

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आखिर क्यों इतनी महंगी हो रही है चांदी?

चांदी की कीमतों में तेज उछाल को लेकर निवेशकों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चांदी इतनी तेज क्यों बढ़ी और क्या यह तेजी टिकाऊ है। Kedia Stocks & Commodities Research की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक यह तेजी किसी सट्टेबाजी या सेंटीमेंट प्रतिक्रिया का नतीजा नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर चांदी की संरचनात्मक री-प्राइसिंग को दर्शाती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चांदी अब केवल एक कीमती धातु या ट्रेडिंग कमोडिटी नहीं रही, बल्कि वह एक रणनीतिक औद्योगिक धातु के रूप में उभर चुकी है। रिन्यूएबल एनर्जी, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, पावर ग्रिड, डिफेंस और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में चांदी की भूमिका अनिवार्य हो गई है। इन क्षेत्रों में कीमत से ज्यादा विश्वसनीयता और प्रदर्शन मायने रखते हैं, जिससे औद्योगिक मांग कीमतों के प्रति कम संवेदनशील (price-inelastic) हो गई है।

चांदी की डिमांड और सप्लाई में अंतर

रिपोर्ट के अनुसार जैसे ही वैश्विक कीमतें संवेदनशील स्तरों (करीब 75 डॉलर प्रति औंस) तक पहुंचीं पेपर मार्केट और फिजिकल आपूर्ति के बीच तनाव बढ़ गया। फिजिकल चांदी की उपलब्धता को लेकर चिंताओं ने कीमतों में तेज और बड़े मूवमेंट को जन्म दिया। यही वजह है कि सिंगल डे और वीकली आधार पर चांदी में असाधारण तेजी देखी गई। पिछले सप्ताह शुक्रवार को महज एक दिन में चांदी के भाव 7.15 फीसदी बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि पिछले सप्ताह इसकी कीमतों में 18.12 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई। कीमतों का दिन के उच्च स्तर के पास बंद होना इस बात का संकेत है कि यह तेजी घबराहट नहीं, बल्कि बाजार की स्वीकार्यता को दर्शाती है।

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अगले साल भी चांदी में तेजी

2026 के आउटलुक पर Kedia Stocks & Commodities Research की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चांदी में संभावनाएं बनी हुई हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव भी तेज रहेगा। यदि आपूर्ति का दबाव और औद्योगिक मांग कायम रहती है, तो अगले एक से दो वर्षों में चांदी की कीमतें वैश्विक बाजार में 90–100 डॉलर प्रति औंस की ओर बढ़ सकती हैं। हालांकि इतिहास (1980 और 2011) यह भी बताता है कि चांदी में तेज रैलियों के बाद तीखे करेक्शन आते रहे हैं। दीर्घकालिक रूप से 40 डॉलर प्रति औंस का स्तर एक अहम सपोर्ट माना गया है।

चरणबद्ध निवेश के साथ जोखिम प्रबंधन जरूरी

रिपोर्ट ने निवेशकों को आगाह किया है कि चांदी में अवसर वास्तविक हैं, लेकिन इसमें अनुशासन, जोखिम प्रबंधन और चरणबद्ध निवेश बेहद जरूरी है। तेजी के दौर में अंधाधुंध पीछा करने के बजाय संतुलित रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।

या वेल्थ रिसर्च (Ya wealth Research) के निदेशक और मुद्रा-जिंस विश्लेषक अनुज गुप्ता कहते हैं कि आज ही चांदी ने एमसीएक्स पर 2,54,174 रुपये प्रति किलो के भाव पर सर्वोच्च स्तर छुआ, लेकिन बाद में कारोबार के दौरान इसके भाव उच्चतम स्तर से करीब 20 हजार रुपये की तेज गिरावट के साथ कारोबार करने लगे। लेकिन लंबी अवधि में चांदी में तेजी का अनुमान है और अगले साल भाव 3 लाख रुपये किलो तक जा सकते हैं। सोना 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पार कर सकता है। चांदी में तेजी की बड़ी वजह इसकी कमी के बीच औद्योगिक मांग मजबूत होना है।

First Published : December 29, 2025 | 4:13 PM IST