facebookmetapixel
Advertisement
Q4 Results: बीएलएस इंटरनेशनल का मुनाफा 28.7% उछला, शेयर में 2.5% से ज्यादा की तेजीRupee Fall: रुपये पर बढ़ा दबाव, 100 प्रति डॉलर पहुंचने की चर्चा तेजभारत में ग्रीन एनर्जी का बूम, 500 GW लक्ष्य से बदलेगा रियल एस्टेट का पूरा नक्शापेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बावजूद तेल कंपनियों का घाटा ₹1 लाख करोड़ पार करने की आशंकाभारतीय ग्राहकों ने बैंकों को दिया साफ संदेश, तेज ऐप और बेहतर डिजिटल सपोर्ट अब सबसे बड़ी जरूरतक्या आपके बच्चे का बैंक अकाउंट नहीं है? फिर भी इन ऐप्स से दे सकते हैं पॉकेट मनीपश्चिम एशिया संघर्ष पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बड़ा बयान, पुतिन संग बैठक में उठाया मुद्दाAI की रेस में Google का बड़ा दांव, नया Gemini और स्मार्ट Search फीचर्स देख दंग रह जाएंगे आपUN ने घटाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, फिर भी दुनिया की सबसे तेज अर्थव्यवस्थाओं में शामिलNBFC Stocks: चोलामंडलम, श्रीराम फाइनेंस और इंडिया शेल्टर बने ब्रोकरेज के टॉप पिक, जानिए क्यों बढ़ा भरोसा

नहीं सुधरे हालात तो कच्चा तेल भी हो जाएगा 150 डॉलर के पार!

Advertisement

कतर, ओमान और यूएई लगभग 9.8 करोड़ टन एलएनजी निर्यात करते हैं जो दुनिया में कुल एलएनजी आपूर्ति का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा है।

Last Updated- June 15, 2025 | 10:25 PM IST
Brent Crude Price
प्रतीकात्मक तस्वीर

इजरायल और ईरान के बीच युद्ध गहराने पर कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर दोनों देशों के बीच मौजूदा युद्ध ने भयानक रूप ले लिया तो कच्चा तेल मौजूदा स्तरों से 103 प्रतिशत तक उछल सकता है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव अधिक नहीं बढ़ा तो ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल धीरे-धीरे शांत हो जाएगी।

पिछले सप्ताह दोनों देशों के बीच युद्ध शुरू होने के बाद कच्चा तेल 78.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और बाद में 75 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। इन घटनाक्रम के बीच पिछले सप्ताह टाइटल ट्रांसफर फैसिलिटी (टीटीएफ) 5 प्रतिशत चढ़कर 38.24 यूरो प्रति एमडब्ल्यूएच के स्तर तक पहुंच गया था। टीटीएफ नीदरलैंड में एक वर्चुअल ट्रेडिंग पॉइंट है।

राबोबैंक के विश्लेषकों के अनुसार इन ईरान पर इजरायल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया से कच्चे तेल एवं प्राकृतिक गैस की आपूर्ति पर सवालिया निशान लग हैं। विश्लेषकों के अनुसार अगर ऊर्जा ढांचों एवं स्रोतों पर सीधा हमला हुआ या होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हुआ तो परिष्कृत उत्पादों एवं द्रवित प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के प्रमुख उत्पादक देशों सऊदी अरब, यूएई और कतर से आपूर्त प्रभावित हो जाएगी।

विश्लेषकों के अनुसार इससे कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल सकता है। राबोबैंक इंटरनैशनल में वैश्विक रणनीतिकार माइकल एवरी ने कहा,‘अगर सऊदी अरब के तेल, गैस, बंदरगाह या परिष्करण ढांचों पर हमले होते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचता है तो कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल से आगे निकल सकता है। शुरू में घबराहट में खरीदार से यह 150 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी छू सकता है।‘

ईरान ने  होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना दबदबा होने का दावा किया है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए काफी अहम समझा जाता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर दुनिया में 17 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है और कुवैत, इराक, बहरीन और सऊदी अरब के टैंकर भी इसी होकर गुजरते हैं।

कतर, ओमान और यूएई लगभग 9.8 करोड़ टन एलएनजी निर्यात करते हैं जो दुनिया में कुल एलएनजी आपूर्ति का लगभग 18 प्रतिशत हिस्सा है। रिपोर्ट के अनुसार इनमें ज्यादातर मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है।

इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा कि मौजूदा युद्ध के कारण तेल कीमतों में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी और हो सकती है। चोकालिंगम के अनुसार अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा और दोनों देशों के बीच हालात सुधरने से कीमतें नरम हो सकती हैं।

Advertisement
First Published - June 15, 2025 | 10:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement