facebookmetapixel
Advertisement
पुरानी बाइक-कार में भरवा रहे हैं E20 पेट्रोल? ₹10 हजार तक बढ़ सकता है मेंटेनेंस खर्च10 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची लोन ग्रोथ, ICICI Bank, HDFC Bank और SBI बने ब्रोकरेज के टॉप पिकGold, Silver Price Today: घरेलू बाजार में सोना-चांदी उछले, विदेशी बाजार में भाव नरमतेल की कीमतें घटीं, फिर भी सरकार को हो सकता है ₹1.65 लाख करोड़ का नुकसानOpening Bell: सेंसेक्स 425 अंक उछला, निफ्टी 24125 के पार; RIL में 2.5% से ज्यादा की तेजीDalmia Bharat का बड़ा विस्तार प्लान, जुटाएगी 4,000 करोड़ रुपयेNRI के पैसे पर RBI की पैनी नजर! अब रोजाना जारी हो सकते हैं अरबों डॉलर की आमद के आंकड़े18,000 करोड़ की AI सिटी पर बवाल! किसानों ने कहा, हमारी जमीन नहीं तो कोई सौदा नहींBond Ratings: कंपनियों की वित्तीय सेहत बिगड़ रही है? रेटिंग डाउनग्रेड ने बढ़ाई चिंताईशा अंबानी का बड़ा प्लान, ब्यूटी मार्केट में नई जंग शुरू

खरीफ की पैदावार पर टिका है वायदा पर पाबंदी का भविष्य

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 3:45 PM IST

खरीफ फसल की पैदावार और कीमत की स्थिति के आकलन के बाद ही कई कृषि जिंसों के वायदा कारोबार पर पाबंदी हटाने के बारे में विचार हो सकता है।


इस महीने के आखिर में सरकार वायदा कारोबार से पाबंदी हटाने की बाबत विचार कर सकती है। वामपंथी दलों के सत्ता से बाहर होने के बाद सरकार के लिए यह काम आसान हो गया है। गौरतलब है कि सरकार ने इस साल मई में चार महीने के लिए आलू, रबर, चना और सोया तेल के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगा दिया था।

प्रतिबंध की यह अवधि छह सितंबर को समाप्त हो रही है। राजनीतिक दलों के इन आरोपों के बीच कि वायदा कारोबार के कारण कीमतें बढ़ रही हैं, इन जिन्सों को चार अन्य जिंसों की सूची में जोड़ा गया था। साल 2007 के आरंभ में चावल, गेहूं, अरहर और उड़द के वायदा कारोबार पर रोक लगा दी गई थी।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा,  हम इस महीने के आखिर में वायदा कारोबार पर प्रतिबंध की समीक्षा करेंगे। हम इस सिलसिले में खरीफ सत्र में फसल की संभावना तथा अगले कुछ महीनों में कीमतों के रुख के बारे में गौर करेंगे। चार महीने से आगे इन चार जिंसों पर प्रतिबंध के विस्तार किए जाने की संभावना के बारे में पूछने पर कृषि मंत्री शरद पवार ने जून में रोम में कहा था कि हमें यह देखना चाहिए कि क्या होता है.. मुझे लगता है कि निर्णय केवल चार महीने के लिए लिया गया है।

मुझे उम्मीद है कि इस चार महीने की अवधि को बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पवार ने कहा था कि अभिजीत सेन कमिटी की रिपोर्ट में सदस्यों ने बहुमत से कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कीमतों में वृध्दि के लिए वायदा कारोबार जिम्मेदार है।

कमिटी की अगुवाई योजना आयोग के सदस्य अभिजित सेन कर रहे थे, जिसे आवश्यक वस्तुओं की कीमत पर वायदा कारोबार के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए बनाया गया था। विश्लेषकों ने कहा कि चूंकि वामपंथी दल वायदा कारोबार के खिलाफ खुले स्वर में आवाज बुलंद कर रहे थे लेकिन अब वे सत्तारूढ़ गठबंधन से बाहर हैं, इसलिए सरकार को प्रतिबंध को हटाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

Advertisement
First Published - August 7, 2008 | 11:09 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement