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ईरान युद्ध का असर: खाद्य तेल महंगे होने के संकेत, आयात लागत बढ़ने से कीमतों में उछाल

भारत अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मुख्य तौर पर कच्चे पाम ऑयल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल की खरीद करता है

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- March 03, 2026 | 11:16 PM IST

ईरान युद्ध जारी रहने के बीच खाद्य तेल व्यापारियों और बाजार प्रतिभागियों का मानना है कि भारत में प्रमुख खाद्य तेलों का आयात मूल्य बढ़ सकता है। इसकी वजह कोई लॉजिस्टिक बाधा नहीं, बल्कि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 3 मार्च को पैकेटबंद सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल और पाम तेल के अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमतों में एक दिन पहले के मुकाबले 1 से 3 रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि पहले ही हो चुकी है।

भारत अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मुख्य तौर पर कच्चे पाम ऑयल, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे सूरजमुखी तेल की खरीद करता है। भारत में आयातित कुल वनस्पति तेलों में इनकी हिस्सेदारी 89-90 फीसदी है। नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 की अवधि में 1.60 करोड़ टन वनस्पति तेलों का आयात किया गया।

व्यापारियों ने बताया कि भारत में आयात किए जाने वाले तीन प्रमुख खाद्य तेलों में से कच्चा पाम ऑयल मलेशिया और इंडोनेशिया से आता है जहां पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण लॉजिस्टिक संबंधी कोई समस्या नहीं है। भारत में पाम ऑयल सबसे अधिक खपत वाला खाद्य तेल है। उसके बाद सोयाबीन तेल का स्थान है जिसे अर्जेंटीना और ब्राजील से आयात किया जाता है। सोयाबीन तेल को केप ऑफ गुड होप के जरिये लाया जाता है जो अफ्रीका के सबसे दक्षिणी सिरे पर स्थित स्वेज नहर का विकल्प है।

मुंबई के एक प्रमुख व्यापारी ने कहा, ‘यहां भी अब तक आपूर्ति में कोई व्यवधान नहीं है।’ मगर सूरजमुखी तेल का आयात मुख्य तौर पर रूस और यूक्रेन से किया जाता है। इसके लिए अधिकतर आपूर्ति काला सागर मार्ग के जरिये होती है। यह एक लंबा मार्ग है लेकिन मौजूदा संघर्ष से ज्यादा प्रभावित नहीं है। व्यापारी ने कहा, ‘इसलिए मुझे किसी भी बाजार से खाद्य तेलों के आयात में परिवहन संबंधी कोई बड़ी चुनौती फिलहाल नहीं दिख रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान सूरजमुखी तेल के लिए परिवहन संबंधी चिंताएं जताई जा रही थीं।’

मगर पश्चिम एशिया युद्ध का अप्रत्यक्ष प्रभाव खाद्य तेलों के आयात मूल्य पर महसूस किया जाएगा। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के साथ ही खाद्य तेलों में भी तेजी आती है क्योंकि बायो-डीजल के लिए इसका आकर्षण बढ़ जाता है।

व्यापारी ने कहा, ‘हॉर्मुज की खाड़ी में खतरे के कारण पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। अगर पश्चिम एशिया में संघर्ष एक सप्ताह या 10 दिनों से अधिक समय तक बरकरार रहा तो खाद्य तेलों के आयात मूल्य में भी जबरदस्त उछाल आ सकती है।’

वास्तव में 27 फरवरी, 2026 तक कच्चे सोयाबीन तेल का आयात मूल्य फरवरी 2025 की औसत कीमत के मुकाबले 6.02 फीसदी पहले ही बढ़ चुकी है। सूरजमुखी तेल के मामले में यह वृद्धि लगभग 13.14 फीसदी है।

भारत में आयात किए जाने वाले प्रमुख खाद्य तेलों में से केवल कच्चे पाम ऑयल का आयात मूल्य 27 फरवरी, 2026 को फरवरी 2025 की औसत कीमत के मुकाबले 4.09 फीसदी कम रहा।

व्यापारी ने कहा, ‘जाहिर तौर पर अगर संकट बरकरार रहा और कच्चे तेल में तेजी जारी रही तो भारत में खाद्य तेलों के आयात मूल्य में 30 से 40 डॉलर प्रति टन तक की वृद्धि हो सकती है। इसका सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ सकता है।’

First Published : March 3, 2026 | 11:16 PM IST