facebookmetapixel
Advertisement
गैस की चिंता में इलेक्ट्रिक कुकिंग के तरीके अपना रहे लोग, इंडक्शन कुकटॉप की मांग बढ़ीजल्द आएंगे तेल-गैस के 4 पोत; होर्मुज स्ट्रेट के अलावा दूसरे मार्गों से भी मंगाया जा रहा कच्चा तेल और एलएनजीअमेरिका में रिलायंस लगाएगी रिफाइनरी! ट्रंप ने की घोषणा; 300 अरब डॉलर का होगा निवेशज्यादा आवंटन से होगी वाटर इन्फ्रा दिग्गजों में बढ़त, EPC कंपनियों के शेयरों में 20% तक की तेजीलंबी अवधि के निवेशकों के लिए रिस्क-रिवॉर्ड हुआ अनुकूल: टाटा एएमसी सीईओ राहुल सिंहFY25 में SEBI की आय 31% बढ़कर 2,713 करोड़ रुपये हुई, कैपिटल फंड भी बढ़ागिफ्ट सिटी के फंडों में KYC की ऊंची लागत बनी बाधा, विदेशी निवेशकों को जोड़ने में हो रही दिक्कतकच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बिकवाली के दबाव से रुपये में नरमी, 92.04 प्रति डॉलर पर बंदफिर टूटा शेयर बाजार, गिरावट के भंवर में सेंसेक्स; निवेशकों की ₹5.14 लाख करोड़ की संपत्ति डूबीEditorial: भारत ने सीमा साझा करने वाले देशों से एफडीआई नियमों में संशोधन की मंजूरी दी

अब विदेशों में मिलेगा बिहार का चूड़ा, केंद्र सरकार निर्यात के लिए बनाएगी योजना: चौहान

Advertisement

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार का चूड़ा कैसे विदेशों में निर्यात हो, इसके लिए योजना बनाई जाएगी।

Last Updated- June 02, 2025 | 9:10 PM IST
shivraj singh chauhan
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों से बात करते हुए

बिहार में चूड़ा काफी प्रसिद्ध है। इसके खाने वालों की बिहार और देश के दूसरे राज्यों में कमी नहीं है। इस चूड़ा का स्वाद विदेशों में भी पहुंचाया जा सकता है। केंद्र सरकार बिहार के चूड़ा निर्यात के लिए योजना बना सकती है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के पांचवें दिन बिहार के किसानों से मिले। इस दौरान चौहान ने कहा कि बिहार का चूड़ा कैसे विदेशों में निर्यात हो, इसके लिए योजना बनाई जाएगी। बिहार के खासकर मिथिला क्षेत्र में दही चूड़ा पारंपरिक रूप से खाया जाता है।

लीची को खराब होने से बचाया जाएगा 

बिहार में सबसे अधिक लीची का उत्पादन होता है। लीची किसानों की सबसे बड़ी समस्या इस फसल का जल्द खराब होना है। सरकार किसानों की इस समस्या को दूर करने के प्रयास करने जा रही है। कृषि मंत्री चौहान ने बिहार दौरे के दौरान आज लीची किसानों से भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लीची किसानों ने मुझे बताया कि लीची के जल्दी खराब होने की प्रवृत्ति के कारण पैदावार को 48 घंटों के भीतर बेचना होता है, जिस कारण कभी-कभी कम दाम मिलते है। इस समस्या को दूर करने के लिए हम कदम उठाएंगे।

Also Read: महाराष्ट्र में भारी बारिश से प्याज की फसल बर्बाद, ₹1 लाख प्रति एकड़ मुआवजे की मांग

इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों से शोध करने और ऐसी तकनीकों को अपनाने का निर्देश दिया जिससे लीची जल्दी खराब न हो और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके। चौहान ने कोल्ड स्टोरेज की संख्या में वृद्धि की भी बात कही।

वैज्ञानिक गांव गांव जाकर किसानों से कर रहे हैं बात

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि खेती में चमत्कार और गंगा-यमुना की भांति ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ अनुसंधान प्रयोगशालाओं और कृषि क्षेत्रों के बीच की खाई को पाटने की एक पहल है। इस अभियान के तहत 16 हजार वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं से निकलकर गांव-गांव जाकर किसानों से बात कर रहे हैं।

बिहार में मक्के की खेती में तेजी से इजाफा हो रहा है। पहले जहां मक्का का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 23 से 24 क्विंटल था, जो अब बढ़कर  50 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है। मक्के का प्रयोग अब इथेनॉल में भी होने लगा है। जिससे मक्का के दाम में वृद्धि हुई है। चौहान ने हाल ही में चावल की दो नई किस्मों के विकसित किए जाने की भी जानकारी दी और बताया कि शोध के जरिए ऐसे दो नई किस्मों का निर्माण किया गया है जिसमें पानी भी 20 प्रतिशत कम लगेगा और उत्पादन 30 प्रतिशत बढ़ जाएगा।

Advertisement
First Published - June 2, 2025 | 7:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement