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अब विदेशों में मिलेगा बिहार का चूड़ा, केंद्र सरकार निर्यात के लिए बनाएगी योजना: चौहान

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केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बिहार का चूड़ा कैसे विदेशों में निर्यात हो, इसके लिए योजना बनाई जाएगी।

Last Updated- June 02, 2025 | 9:10 PM IST
shivraj singh chauhan
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान किसानों से बात करते हुए

बिहार में चूड़ा काफी प्रसिद्ध है। इसके खाने वालों की बिहार और देश के दूसरे राज्यों में कमी नहीं है। इस चूड़ा का स्वाद विदेशों में भी पहुंचाया जा सकता है। केंद्र सरकार बिहार के चूड़ा निर्यात के लिए योजना बना सकती है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के पांचवें दिन बिहार के किसानों से मिले। इस दौरान चौहान ने कहा कि बिहार का चूड़ा कैसे विदेशों में निर्यात हो, इसके लिए योजना बनाई जाएगी। बिहार के खासकर मिथिला क्षेत्र में दही चूड़ा पारंपरिक रूप से खाया जाता है।

लीची को खराब होने से बचाया जाएगा 

बिहार में सबसे अधिक लीची का उत्पादन होता है। लीची किसानों की सबसे बड़ी समस्या इस फसल का जल्द खराब होना है। सरकार किसानों की इस समस्या को दूर करने के प्रयास करने जा रही है। कृषि मंत्री चौहान ने बिहार दौरे के दौरान आज लीची किसानों से भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि लीची किसानों ने मुझे बताया कि लीची के जल्दी खराब होने की प्रवृत्ति के कारण पैदावार को 48 घंटों के भीतर बेचना होता है, जिस कारण कभी-कभी कम दाम मिलते है। इस समस्या को दूर करने के लिए हम कदम उठाएंगे।

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इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों से शोध करने और ऐसी तकनीकों को अपनाने का निर्देश दिया जिससे लीची जल्दी खराब न हो और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके। चौहान ने कोल्ड स्टोरेज की संख्या में वृद्धि की भी बात कही।

वैज्ञानिक गांव गांव जाकर किसानों से कर रहे हैं बात

केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि खेती में चमत्कार और गंगा-यमुना की भांति ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ अनुसंधान प्रयोगशालाओं और कृषि क्षेत्रों के बीच की खाई को पाटने की एक पहल है। इस अभियान के तहत 16 हजार वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं से निकलकर गांव-गांव जाकर किसानों से बात कर रहे हैं।

बिहार में मक्के की खेती में तेजी से इजाफा हो रहा है। पहले जहां मक्का का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 23 से 24 क्विंटल था, जो अब बढ़कर  50 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो गया है। मक्के का प्रयोग अब इथेनॉल में भी होने लगा है। जिससे मक्का के दाम में वृद्धि हुई है। चौहान ने हाल ही में चावल की दो नई किस्मों के विकसित किए जाने की भी जानकारी दी और बताया कि शोध के जरिए ऐसे दो नई किस्मों का निर्माण किया गया है जिसमें पानी भी 20 प्रतिशत कम लगेगा और उत्पादन 30 प्रतिशत बढ़ जाएगा।

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First Published - June 2, 2025 | 7:30 PM IST

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