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Economic Survey 2026: श्रम संहिता देगी काम में स्त्री व पुरुष समानता को बढ़ावा

समीक्षा में प्रकाश डाला गया है कि नई श्रम संहिता महिलाओं को सभी प्रतिष्ठानों में काम करने में सक्षम बनाती है, जिनमें रात्रि शिफ्ट वाले प्रतिष्ठान भी शामिल हैं

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अहोना मुखर्जी   
Last Updated- January 29, 2026 | 11:11 PM IST

आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि नई श्रम संहिता से वर्कफोर्स में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा और सरल अनुपालन से अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण होगा। समीक्षा में कहा गया है कि जिन राज्यों में महिलाओं के श्रम पर सख्त प्रतिबंध हैं, उनकी तुलना में कम प्रतिबंध वाले राज्यों में कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी अधिक है, प्रबंधन भूमिकाओं में महिलाओं की संख्या अधिक है और वेतन का अंतर कम है।

समीक्षा में प्रकाश डाला गया है कि नई श्रम संहिता महिलाओं को सभी प्रतिष्ठानों में काम करने में सक्षम बनाती है, जिनमें रात्रि शिफ्ट वाले प्रतिष्ठान भी शामिल हैं, बशर्ते आवश्यक सुरक्षा उपाय लागू हों। समीक्षा के अनुसार श्रम संहिताएं समान वेतन, शिशु देखभाल केंद्रों की व्यवस्था, घर से काम करने की सुविधा के माध्यम से लचीलापन और मातृत्व लाभों के विस्तार के जरिए लैंगिक समानता को बढ़ावा देती हैं, जिससे कार्यबल में उच्च भागीदारी को समर्थन मिलता है।

इंडियन स्टाफिंग फेडरेशन के अनुमानों के अनुसार, सहमति से रात्रिकालीन कार्य समेत लैंगिक प्रावधानों से महिला श्रम बल भागीदारी दर (एफएलएफपीआर) 33.7 फीसदी तक बढ़ सकती है।

ग्रांट थॉर्नटन भारत में पार्टनर अशोक वर्मा ने कहा, नए श्रम कानूनों से श्रम बाजार के औपचारिकरण में तेजी आने और ‘गिग इकॉनमी’ के श्रमिकों को आवश्यक मान्यता और संरक्षण मिलने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी की महत्त्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया है और विज्ञान, प्रौद्योगिकी, गणित और इंजीनियरिंग (एसटीईएम) प्रशिक्षण, शहरी गतिशीलता, कामकाजी महिलाओं के लिए किफायती आवास और देखभाल अर्थव्यवस्था जैसे कई नीतिगत और रणनीतिक उपाय नीतिगत इरादे को दर्शाते हैं और आगामी बजट में इनकी झलक देखने को मिल सकती है।

समीक्षा में कहा गया है कि निश्चित अवधि और अनुबंध कर्मचारियों के लिए समान लाभों के प्रावधान, नियुक्ति पत्र जारी करने को अनिवार्य बनाने और अखिल भारतीय पंजीकरण या लाइसेंस से गैर जरूरी चीज घटेगी और अनुपालन का बोझ कम होगा। इसमें कहा गया है, निश्चित अवधि के रोजगार को औपचारिक अनुबंध के रूप में मान्यता देने से विशेष रूप से लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को लाभ हो सकता है, क्योंकि इससे वे दीर्घकालिक रोजगार के लिए प्रतिबद्ध हुए बिना और अतिरिक्त लागत का बोझ उठाए बगैर सीजनल या परियोजना-आधारित आवश्यकताओं के लिए श्रमिकों को नियुक्त कर सकेंगे।

इससे संविदा भर्ती की तुलना में प्रत्यक्ष भर्ती को बढ़ावा मिलेगा। एसबीआई के एक अध्ययन का हवाला देते हुए समीक्षा में कहा गया है कि श्रम संहिता के क्रियान्वयन से अर्थव्यवस्था में औपचारिकीकरण 60.4 फीसदी से बढ़कर 75.5 फीसदी हो सकता है।

महिलाओं की नौकरियों के लिए नीति

समीक्षा में स्थिर आर्थिक वृद्धि में सहयोग हेतु रोजगार में महिला भागीदारी दर (एफएलएफपीआर) बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। इसमें महिलाओं के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) से संबंधित नौकरियों तक पहुंच बढ़ाने की बात कही गई है, जिससे कि कौशल अंतर कम करने और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने में मदद मिलेगी। इनमें उच्च स्तरीय सेवाएं और आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र शामिल हैं।

समीक्षा के अनुसार, महिलाओं की विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में करियर बनाने की संभावना भी कम होती है और 2021-22 में नामांकन में उनकी हिस्सेदारी 43 फीसदी थी। आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कार्यरत महिला कार्यबल में 25 वर्ष और उससे अधिक आयु की उच्च डिग्री प्राप्त महिलाओं की संख्या केवल 2.9 फीसदी है।

First Published : January 29, 2026 | 10:51 PM IST