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लेखक : आर कविता राव

आज का अखबार, लेख

भ्रामक हो सकती है देशों के कर अंतर की तुलना

देश में राजकोषीय नीति पर चर्चा के दौरान इस बात पर लगातार जोर दिया जाता है कि देश का कर और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात बढ़ाने की जरूरत है। होने वाली नीतिगत चर्चाओं में लगातार इस बात पर जोर दिया जाता है कि देश के कर-सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुपात में सुधार करने की […]

आज का अखबार, लेख

अनिश्चितता के बीच भारत के समक्ष विकल्प

टैरिफ को लेकर उभरते नए परिदृश्य की वजह से वैश्विक आर्थिक माहौल में अनिश्चितता का एक नया पहलू शामिल हो गया है। टैरिफ इस समय चल रही द्विपक्षीय वार्ताओं के केंद्र में हैं। ऐसे में यह पड़ताल करना उपयोगी होगा कि भारत पर इसका क्या प्रभाव हो सकता है। हम अर्थव्यवस्था के साथ-साथ राजकोषीय स्तर […]

लेख

भरपूर धन के बाद भी सतत विकास में चुनौती

भारत ने सतत विकास के लक्ष्य (एसडीजी) सूचकांक में अच्छी प्रगति की है। विभिन्न देश संयुक्त राष्ट्र के टिकाऊ विकास के लक्ष्यों की दिशा में जितनी अधिक उपलब्धि हासिल करते हैं, सूचकांक पर उनकी रैंकिंग उतनी ही बेहतर होती जाती है। भारत ने 2018 में इसमें 57 अंक मिले थे, जो 2023-24 में बढ़कर 71 […]

लेख

बदलाव के इंतजार में जीएसटी व्यवस्था

सात वर्षों से अधिक का सफर तय करने के बाद वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था ऐसे मोड़ पर पहुंच रही है, जहां इसके ढांचे में ही बदलाव करने पर बातचीत की जानी चाहिए। सरकार ने मुआवजा देने का अपना वादा पूरा करने के लिए कोविड-19 महामारी के बाद लगातार कर्ज लिए हैं, जिन्हें नवंबर […]

आज का अखबार, लेख

गैर बैंकिंग कंपनियों का वित्तीय निवेश

आय कर रिटर्न में नजर आने वाला समग्र कॉर्पोरेट डेटा दिखाता है कि अर्थव्यवस्था के इस वर्ग की आय की संरचना में एक व्यवस्थित बदलाव आया है। अब इसमें कारोबारी आय कम हो रही है जबकि अन्य परोक्ष आय मसलन पूंजीगत लाभ और अन्य प्रकार की आय बढ़ रही है। इस रुझान को थोड़ा और […]

आज का अखबार, लेख

कंपनियों का प्रतिफल और परोक्ष आय

कंपनियों का भौतिक परिसंपत्तियों में निवेश के बजाय वित्तीय निवेश को तरजीह देना चिंता का विषय है। समझा रही हैं आर कविता राव भारतीय अर्थव्यवस्था को पिछले कुछ वर्षों में कई झटकों का सामना करना पड़ा है। इनमें रणनीतिक और बाहरी दोनों तरह के झटके शामिल हैं। तर्क दिया जाता है कि इनका अर्थव्यवस्था की […]

आज का अखबार, लेख

GST के बाद राज्यों में राजस्व असमानता, एकीकरण की धीमी प्रगति और अलग-अलग रुझान

राजस्व के मामले में विभिन्न राज्यों के प्रदर्शन में अंतर पर अक्सर बहस चलती रहती है। उत्पादन करने वाले राज्य को कर दिलाने वाली पुरानी मूल्यवर्द्धित कर (वैट) व्यवस्था से हम वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था तक आ गए, जहां कर वह राज्य वसूलता है, जहां माल बिकता है। पुरानी व्यवस्था में दो राज्यों […]

आज का अखबार, लेख

देश में टैक्स सुधार से जुड़ी दुविधाएं और सुधार के जरूरी उपाय

देश में आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के साथ-साथ राजकोषीय टिकाऊपन पर चर्चा के दौरान कर एवं सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का अनुपात बढ़ाने पर जोर दिया गया। इसका आधार यह है कि अगर देश को महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य हासिल करना है तो सरकारों को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। सब्सिडी में कमी और व्यय को युक्तिसंगत बनाने […]

आज का अखबार, लेख

बजट 2024 में कैपिटल गेन टैक्स बढ़ाने के मायने

पूंजी एक से दूसरे देश में जाने से दुनिया के देशों को कमोबेश स्थिर श्रम आय पर कराधान के बराबर पूंजीगत आय पर कर लगाने में चुनौती पेश आ रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूंजी का अंतरण व्यक्तियों और कंपनियों दोनों के माध्यमों से होता है। जी20 की आधार क्षरण एवं लाभ अंतरण (बीईपीएस) परियोजना […]

आज का अखबार, लेख

Budget 2024: आत्मविश्वास से लबरेज सरकार की आकलन रिपोर्ट

चुनावी साल में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2024-25 का अंतरिम बजट पेश किया है। बजट भाषण में उन्होंने पिछले 10 साल की उपलब्धियों का सार प्रस्तुत किया और आम चुनाव के बाद सरकार की वापसी तय मानते हुए ऐसी कई व्यापक घोषणाएं कीं जिन पर आने वाले समय में सरकार को काम करना है। […]

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