संगठन की एक अध्ययन रपट में कहा गया है, वित्त वर्ष 2010-11 में देश भर में कुल 17,987 कपड़ा कारखानों में से 12,688 काम कर रहे थे। कपड़ा क्षेत्र की 5,300 फैक्टि्रयांे में काम बंद था।
फैक्टि्रयांे में परिचालन बंद होने के कारण 2010-11 तक इस कपड़ा में बेरोजगार होने वालों का औसत 42 प्रतिशत रहा जबकि 2000-01 में इस क्षेत्र में छह प्रतिशत श्रमिक बेरोजगार हुए थे।
ऐसोचैम के महासचिव डी एस रावत ने कहा यह संगठित कपड़ा क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है जो 14 लाख लोगों के लिए रोजगार के मौके पैदा करने के अलावा सकल घरेलू उत्पाद में चार प्रतिशत और निर्यात से होने वाली आय में 10.1 प्रतिशत का योगदान करता है।
ऐसोचैम की रपट के मुताबिक विभिन्न राज्यों में इस अवधि में जितनी कपड़ा फैक्टि्रयां बंद हुईं उनमें तमिलनाडु, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 88 प्रतिशत है।
भाषा