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Coal Import: महंगाई और वैश्विक संकट का असर, 4.2% घटा कोयला आयात

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Coal Import: घरेलू उत्पादन बढ़ने और वैश्विक कीमतों में तेजी के चलते देश में कोयला आयात घटा, आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती।

Last Updated- March 22, 2026 | 2:25 PM IST
coal import
Representative Image

Coal Import: देश में चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कोयला आयात में गिरावट दर्ज की गई है, जो ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों को दर्शाता है। अप्रैल से जनवरी के बीच कोयले का कुल आयात 4.2 प्रतिशत घटकर 213.10 मिलियन टन रह गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में यह गिरावट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में समुद्री मार्ग से आने वाले कोयले की कीमतों में हालिया तेजी और आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों के कारण निकट भविष्य में आयात सीमित ही रहने की संभावना है। इसके साथ ही देश में घरेलू कोयला उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है।

mjunction services ltd द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, गैर-कोकिंग कोयले का आयात अप्रैल से जनवरी के दौरान घटकर 127.80 मिलियन टन रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 141.18 मिलियन टन था। यह गिरावट मुख्य रूप से बिजली उत्पादन और अन्य औद्योगिक जरूरतों के लिए घरेलू आपूर्ति में सुधार के कारण आई है।

वहीं दूसरी ओर, कोकिंग कोयले के आयात में बढ़ोतरी देखी गई है। इस अवधि में कोकिंग कोयले का आयात 50.39 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 45.83 मिलियन टन था। कोकिंग कोयला मुख्य रूप से इस्पात उद्योग में इस्तेमाल होता है, और इसकी घरेलू उपलब्धता सीमित होने के कारण आयात पर निर्भरता बनी हुई है।

जनवरी महीने के आंकड़े भी आयात में गिरावट का संकेत देते हैं। इस दौरान कोयले का कुल आयात 22.1 प्रतिशत घटकर 16.64 मिलियन टन रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष के जनवरी में यह 21.37 मिलियन टन था।

जनवरी महीने में कुल आयात के भीतर नॉन-कोकिंग कोयले का आयात 9.45 मिलियन टन रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने के 12.33 मिलियन टन की तुलना में काफी कम है। इसी तरह कोकिंग कोयले का आयात भी घटकर 4.23 मिलियन टन रह गया, जबकि पिछले साल जनवरी में यह 5.23 मिलियन टन था।

उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार, जब देश के भीतर कोयले की उपलब्धता बेहतर रहती है तो आयात पर निर्भरता स्वतः कम हो जाती है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में समुद्री मार्ग से आने वाले कोयले की कीमतों में बढ़ोतरी भी आयात घटने की एक बड़ी वजह मानी जा रही है।

mjunction के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनय वर्मा के अनुसार, थर्मल कोयले के आयात में साल दर साल आधार पर उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि घरेलू स्तर पर पर्याप्त स्टॉक और वैश्विक कीमतों में तेजी के चलते निकट भविष्य में भी आयात सीमित रहने की संभावना है।

इस बीच सरकार का जोर घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर बना हुआ है। आने वाले वर्षों में देश में कोयला उत्पादन में हर साल 6 से 7 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है। इस रफ्तार से उत्पादन बढ़कर वर्ष 2029-30 तक करीब 1.5 अरब टन तक पहुंच सकता है।

कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने पहले ही संकेत दिया है कि देश में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है और कोयले की खपत में भी इजाफा जारी रहेगा। अनुमान है कि कोयले की मांग वर्ष 2040 के आसपास अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है।

सरकार का फोकस इस बात पर है कि भविष्य की जरूरतों को अधिकतम हद तक घरेलू उत्पादन से पूरा किया जाए और गैर-जरूरी आयात को कम किया जाए। इसी रणनीति के तहत कोयला उत्पादन को लगातार बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित और स्थिर तरीके से पूरा किया जा सके।

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First Published - March 22, 2026 | 12:39 PM IST

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