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ईरान ने इजराइल पर मिसाइल बरसाई, ट्रंप ने 48 घंटे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने का अल्टीमेटम दिया!

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ईरान-इजरायल युद्ध ने खतरनाक मोड़ ले लिया है, जहां मिसाइल हमले, हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट और वैश्विक सैन्य हलचल से अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और तेल आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा

Last Updated- March 22, 2026 | 9:47 AM IST
Iran Israel War
युद्ध का असर पश्चिम एशिया से कहीं आगे तक दिख रहा है, जिससे खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। (फोटो: रॉयटर्स)

ईरानी मिसाइलों ने शनिवार देर रात इजराइल के दो दक्षिणी शहरों को निशाना बनाया, जिससे कई इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं और दर्जनों लोग घायल हुए। हमले इजराइल के मुख्य न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर के काफी करीब हुए, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है।

साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से नहीं खोलेगा तो अमेरिका ईरानी पावर प्लांट्स को नष्ट कर देगा। उन्होंने कहा कि सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू कर सभी महत्वपूर्ण संयंत्रों को तबाह किया जाएगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और वैश्विक तेल संकट

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को विश्व के अन्य महासागरों से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण जलमार्ग है। इस मार्ग के बिना विश्व की तेल आपूर्ति प्रभावित होती है। पिछले कुछ दिनों से ईरानी हमलों और खतरों के कारण अधिकांश टैंकर तेल, गैस और अन्य वस्तुएं ले जाने में असमर्थ हैं। इसके चलते विश्व के कुछ बड़े तेल उत्पादकों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है क्योंकि उनका क्रूड तेल कहीं भेजा नहीं जा रहा।

हमले और उनके असर

ईरानी मिसाइल हमले नतान्ज में ईरान के मुख्य न्यूक्लियर एन्हांसमेंट साइट पर पहले दिन हुए हमलों के बाद किए गए। इजराइल की सेना ने बताया कि मिसाइलों को रोकने में वह सफल नहीं हो पाई। हमला डिमोना और अराड शहरों में हुआ। यह पहला मौका था जब ईरानी मिसाइलें न्यूक्लियर साइट के आसपास की इजराइल एयर डिफेंस सिस्टम को पार कर गईं।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने कहा कि “यदि डिमोना के कड़ी सुरक्षा क्षेत्र में मिसाइलें अवरोधित नहीं हो पाती हैं तो यह युद्ध के नए चरण में प्रवेश का संकेत है।”

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बताया कि आपातकालीन टीमों को मौके पर भेजा जा रहा है। उन्होंने कहा कि “यह एक बहुत कठिन शाम है।”

क्षति का विवरण

रक्षा और बचावकर्मी बताते हैं कि अराड में सीधे हमले से कम से कम 10 अपार्टमेंट बिल्डिंग्स को नुकसान हुआ, जिनमें से तीन गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हैं और गिरने का खतरा है। कम से कम 64 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

डिमोना न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर से लगभग 20 किलोमीटर पश्चिम और अराड लगभग 35 किलोमीटर उत्तर में स्थित है।

ईराइल को माना जाता है कि यह अकेला पश्चिम एशियाई देश है जिसके पास न्यूक्लियर हथियार हैं, हालांकि इजराइली अधिकारी इसकी पुष्टि या खंडन नहीं करते। संयुक्त राष्ट्र के न्यूक्लियर वॉचडॉग ने कहा कि उसे इजराइली न्यूक्लियर साइट में किसी भी तरह की क्षति या असामान्य रेडिएशन स्तर की जानकारी नहीं मिली है।

युद्ध ने लिया खतरनाक मोड़, ईरान-इजरायल संघर्ष का असर अब वैश्विक स्तर पर

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में पहुंचता दिखाई दे रहा है। इजरायल की सेना के प्रमुख जनरल एयाल जमीर ने साफ कहा है कि यह युद्ध अभी समाप्त होने से काफी दूर है, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

इस बीच, ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर भी नई चिंताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हिंद महासागर में स्थित संयुक्त ब्रिटेन-अमेरिका के डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की कोशिश की, जो करीब 4000 किलोमीटर दूर है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान के पास पहले के अनुमान से अधिक दूरी तक मार करने वाली मिसाइल क्षमता हो सकती है या उसने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम का इस्तेमाल किसी विशेष लॉन्च के लिए किया हो सकता है।

अमेरिका और इजरायल इस युद्ध को लेकर अलग-अलग तर्क दे रहे हैं। कभी इसे ईरान की सत्ता के खिलाफ जनविद्रोह भड़काने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, तो कभी इसे ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने की रणनीति बताया जा रहा है। हालांकि, अब तक ईरान में किसी बड़े जनविद्रोह के संकेत नहीं मिले हैं। इंटरनेट पर सख्त पाबंदियों के कारण वहां से सही जानकारी मिलना भी मुश्किल बना हुआ है।

इस युद्ध का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य और ईंधन की कीमतों पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।

ईरान को हुए नुकसान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। 28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिकी और इजरायली हमलों में कितना नुकसान हुआ है, इस पर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। वहीं, ईरान की नेतृत्व व्यवस्था को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं।

इधर, इजरायल ने तेहरान से करीब 220 किलोमीटर दूर स्थित नतांज परमाणु संयंत्र पर हमले की जिम्मेदारी से इनकार किया है। ईरान की न्यायपालिका से जुड़ी समाचार एजेंसी मिजान के अनुसार, इस हमले के बाद किसी तरह के रेडिएशन लीक की सूचना नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने भी इस मामले पर नजर बनाए रखी है। एजेंसी के अनुसार, ईरान के पास मौजूद लगभग 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम का बड़ा हिस्सा इस्फहान स्थित एक अन्य परिसर में मौजूद है, जो मलबे के नीचे दबा हुआ है। एजेंसी ने कहा है कि वह इस हमले की जांच कर रही है।

वहीं, अमेरिका के रक्षा विभाग पेंटागन ने नतांज पर हुए हमले को लेकर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। दूसरी ओर, रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जाखारोवा ने चेतावनी दी है कि ऐसे हमले पूरे मध्य पूर्व में किसी बड़े और विनाशकारी संकट का कारण बन सकते हैं।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर हालात और गंभीर होते जा रहे हैं। इस बीच यह संकेत मिले हैं कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर हिंद महासागर स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे का इस्तेमाल इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए कर सकता है।

ब्रिटेन के अधिकारियों ने शुक्रवार को डिएगो गार्सिया बेस को निशाना बनाकर किए गए एक हमले की पुष्टि की, हालांकि यह हमला सफल नहीं रहा। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान पूरे क्षेत्र में आक्रामक रुख अपना रहा है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मिसाइलें इस द्वीप के कितनी करीब पहुंचीं।

ईरान पहले दावा कर चुका है कि उसकी मिसाइलों की रेंज 2000 किलोमीटर से कम है। लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ईरान ने अपने स्पेस प्रोग्राम से जुड़ी तकनीक का इस्तेमाल किया हो सकता है। रॉयल नेवी के पूर्व कमोडोर स्टीव प्रेस्ट ने कहा कि यदि किसी देश के पास अंतरिक्ष कार्यक्रम है तो उसके पास बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता भी होती है।

दूसरी ओर, इजरायल के सेना प्रमुख ने दावा किया है कि ईरान ने दो चरणों वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया। हालांकि इस पर ईरान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

डिएगो गार्सिया से हमले की अनुमति, ब्रिटेन का रुख साफ

ब्रिटेन ने सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल के हमलों में भाग नहीं लिया है, लेकिन उसने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दी है। ब्रिटिश सरकार ने साफ किया है कि अमेरिकी बमवर्षक डिएगो गार्सिया बेस से उन ठिकानों पर हमला कर सकते हैं, जहां से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाया जा रहा है।

समुद्री सुरक्षा को लेकर वैश्विक दबाव बढ़ा

ईरान की ओर से जहाजों को खतरा बढ़ने के बाद दुनिया के कई देशों ने मिलकर इस अहम समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखने की बात कही है। संयुक्त अरब अमीरात के साथ ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और जापान समेत 21 देशों ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सहयोग देने की इच्छा जताई है।

तेल की कीमतों में तेजी को देखते हुए अमेरिका ने एक अस्थायी कदम उठाते हुए उन ईरानी तेल खेपों पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी है, जो पहले से जहाजों पर लदी हुई हैं। हालांकि इससे उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, जो कीमतों में उछाल का मुख्य कारण है।

ईरान के तेल मंत्रालय ने दावा किया है कि उसके पास समुद्र में स्टोरेज के लिए लगभग कोई अतिरिक्त कच्चा तेल नहीं बचा है।

ईरान की सैन्य क्षमता पर असर का दावा

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि ईरान की जहाजों पर हमला करने की क्षमता कमजोर हुई है। उन्होंने बताया कि इस हफ्ते ईरान के तटीय क्षेत्र में एक भूमिगत ठिकाने पर भारी बम गिराए गए, जहां एंटी-शिप मिसाइल और मोबाइल लॉन्चर रखे गए थे।

अमेरिका की सैन्य तैनाती बढ़ी

तनाव को देखते हुए अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, तीन अतिरिक्त युद्धपोत और करीब 2500 मरीन सैनिक क्षेत्र में भेजे जा रहे हैं।

खाड़ी देशों में हमले तेज

तनाव का असर खाड़ी देशों में भी दिख रहा है। दुबई में शनिवार रात मिसाइल अलर्ट जारी किया गया, जबकि सऊदी अरब ने अपने पूर्वी हिस्से में 20 ड्रोन मार गिराने का दावा किया है।

जंग में बढ़ता आंकड़ा

इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं इजरायल में ईरानी मिसाइल हमलों में 15 लोगों की जान गई है। इसके अलावा अमेरिका के 13 सैनिक और खाड़ी देशों में कई नागरिक भी इस संघर्ष की चपेट में आए हैं।

लेबनान में भी बढ़ी टकराव की स्थिति

इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच लेबनान के दक्षिणी हिस्से में झड़पें तेज हो गई हैं। इजरायली सेना ने लक्षित जमीनी कार्रवाई की पुष्टि की है, जिसमें कम से कम चार लड़ाके मारे गए। हिज्बुल्लाह ने भी कहा कि उसके लड़ाकों ने इजरायली सैनिकों का मुकाबला किया।

लेबनान सरकार के अनुसार, इजरायली हमलों में अब तक 1000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 10 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं।

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First Published - March 22, 2026 | 8:55 AM IST

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