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Middle East crisis: अमेरिका ने फंसे ईरानी तेल को बाजार में लाने का रास्ता खोला

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अमेरिका ने बढ़ती तेल कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी रूप से ईरानी तेल पर ढील दी, जबकि मध्य पूर्व तनाव से वैश्विक आपूर्ति और बाजार पर दबाव बना हुआ है।

Last Updated- March 21, 2026 | 8:43 AM IST
crude oil
Representative Image

Middle East crisis: अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती कीमतों को काबू में लाने के लिए एक अहम और अस्थायी कदम उठाया है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगे कुछ प्रतिबंधों में सीमित अवधि के लिए ढील दी है, ताकि बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके और कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में एक सामान्य लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत उन ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल कार्गो की बिक्री की अनुमति दी गई है, जो शुक्रवार को न्यूयॉर्क समयानुसार रात 12 बजकर 1 मिनट से पहले जहाजों पर लोड किए जा चुके थे। यह छूट 19 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी, यानी करीब एक महीने की अवधि के लिए यह व्यवस्था लागू रहेगी।

दरअसल, अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष का असर वैश्विक तेल आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है। इस तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है।

इसी कारण हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो साल 2022 के मध्य के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। ऐसे में आपूर्ति बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है, ताकि बाजार में संतुलन बनाया जा सके।

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले को सीमित दायरे वाला और अस्थायी उपाय बताया है। उनके अनुसार इस कदम से बाजार में लगभग 14 करोड़ बैरल तेल की अतिरिक्त आपूर्ति हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस बिक्री से होने वाली आय तक ईरान की सीधी पहुंच आसान नहीं होगी।

ईंधन कीमतों में तेजी

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने अब आर्थिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका में ईंधन की महंगाई एक अहम मुद्दे के रूप में उभर रही है, खासकर ऐसे समय में जब देश में नवंबर में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। बढ़ती महंगाई सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का कारण बन सकती है, क्योंकि इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है।

कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से 4.5 करोड़ बैरल से अधिक तेल जारी किया है। इसके साथ ही परिवहन लागत को कम करने के उद्देश्य से लंबे समय से लागू शिपिंग नियमों में अस्थायी ढील भी दी गई है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से ईंधन की कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिल सकती है, लेकिन बाजार में अस्थिरता अभी भी बनी हुई है।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बयान भी बाजार की दिशा को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने हाल ही में संकेत दिया कि वे सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे कम करने पर विचार कर रहे हैं। यह बयान उस समय आया जब तेल की कीमतों में एक और उछाल देखने को मिला और बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी। इससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता और बढ़ गई है।

दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि वह अपने जवाबी हमलों का दायरा बढ़ा सकता है। मध्य पूर्व में ऊर्जा ढांचे पर हो रहे हमलों ने पहले ही वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर दबाव बढ़ा दिया है। ऐसे हालात में कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में साफ दिखाई दे रहा है।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान में पारंपरिक त्योहार नौरोज मनाया जा रहा है। हालांकि इस बार यह त्योहार हवाई हमलों और बढ़ते तनाव के साए में मनाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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First Published - March 21, 2026 | 8:43 AM IST

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