ईरान ने अपनी ऊर्जा और ईंधन से जुड़ी सुविधाओं पर किसी भी संभावित हमले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। तेहरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया गया तो वह अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर व्यापक जवाबी कार्रवाई करेगा।
ईरानी सरकारी मीडिया Islamic Republic of Iran Broadcasting के मुताबिक, यह बयान ईरान के खतम अल-अनबिया सेंट्रल मुख्यालय के प्रवक्ता Ebrahim Zolfaghari ने दिया। उन्होंने कहा कि संभावित जवाबी कार्रवाई केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें नागरिक और तकनीकी ढांचे को भी शामिल किया जा सकता है।
जोफाघरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर ईरान की ईंधन और ऊर्जा सुविधाओं पर हमला किया जाता है, तो अमेरिका और क्षेत्र में उसके सहयोगियों के ऊर्जा नेटवर्क, सूचना प्रौद्योगिकी सिस्टम और समुद्री पानी को मीठा बनाने वाली इकाइयों को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान से संकेत मिलता है कि किसी भी संघर्ष की स्थिति में साइबर और तकनीकी हमलों का खतरा भी बढ़ सकता है।
ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Pentagon के रक्षा अधिकारियों ने ईरान में जमीनी सेना भेजने की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कई रणनीतियां तैयार की हैं। इस संबंध में कुछ सूत्रों ने अमेरिकी मीडिया को जानकारी दी है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में पश्चिम एशिया में संभावित जमीनी बलों की तैनाती को लेकर गहन विचार-विमर्श जारी है। सीबीएस न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन परिस्थितियों में वे अपने सैनिकों के इस्तेमाल की अनुमति देंगे। यह चर्चा गोपनीय तरीके से हो रही है, और इसमें शामिल अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से किसी भी संवेदनशील योजना पर बात करने की अनुमति नहीं दी गई है।
ओवल ऑफिस में जब गुरुवार को ट्रंप से जमीनी तैनाती की संभावना पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, “नहीं, मैं किसी जगह पर सैनिक नहीं भेज रहा हूं,” लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा, “अगर मैं भेजता, तो निश्चित रूप से मैं आपको नहीं बताता।”
साथ ही, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि पेंटागन का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति को किसी भी संकट की स्थिति में “अधिकतम विकल्प” उपलब्ध हों। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की तैयारियाँ अंतिम निर्णय का संकेत नहीं हैं। लीविट ने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति ने ओवल ऑफिस में कहा, इस समय वह किसी भी स्थान पर जमीनी सैनिक भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं।”
फिर भी, सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने संभावित आक्रमण की स्थिति में ईरानी कर्मियों और अर्धसैनिक समूहों को पकड़ने और हिरासत में रखने की योजना पर बैठकें की हैं। इन तैयारियों में यह भी तय किया जा रहा है कि बंदियों को कहाँ और किस तरीके से रखा जाएगा।
रणनीतिक रूप से, अमेरिका 82वीं एयरबोर्न डिवीज़न के कुछ घटकों को पश्चिम एशिया में संभावित तैनाती के लिए तैयार कर रहा है। इस तैयारी में मरीन कॉर्प्स की मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट और सेना की ग्लोबल रिस्पॉन्स फोर्स भी शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, हजारों मरीन पहले ही पश्चिम एशिया की ओर रवाना हो चुके हैं। कैलिफ़ोर्निया से तीन नौसैनिक जहाजों के माध्यम से लगभग 2,200 मरीन भेजे गए हैं। यह दूसरा ऐसा समूह है जिसे संघर्ष के शुरू होने के बाद भेजा गया है। इससे पहले एक अन्य इकाई, जो प्रशांत महासागर से पुनर्निर्देशित की गई थी, अभी भी क्षेत्र की ओर बढ़ रही है।