आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल निफ्टी स्मॉलकैप 250 एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) के लॉन्च से पैसिव स्मॉलकैप फंड्स पर फिर से ध्यान गया है। अब इन्वेस्टर्स के पास चुनने के लिए 27 पैसिव स्मॉलकैप फंड्स हैं। इनमें से 17 इंडेक्स फंड्स और 10 ETFs हैं। इन्वेस्टर्स को यह तय करना चाहिए कि उनके लिए एक्टिव या पैसिव अप्रोच में से कौन सा बेहतर है। अगर वे पैसिव विकल्प चुनते हैं, तो उन्हें यह भी तय करना होगा कि वे मार्केट-कैप वेटेड इंडेक्स में निवेश करें या स्मार्ट-बेटा इंडेक्स में।
फाइनेंशियल एडवाइजर पारंपरिक रूप से लार्ज कैप सेगमेंट में पैसिव फंड्स और मिड कैप तथा स्मॉल कैप सेगमेंट में एक्टिव फंड्स की सिफारिश करते रहे हैं।
कहा जाता है कि लार्ज-कैप मार्केट ज्यादा कुशल हो गए हैं, जिससे एक्टिव लार्ज-कैप फंड्स के लिए बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल हो गया है। फंड्सइंडिया में रिसर्च के सीनियर मैनेजर जिरल मेहता कहते हैं, “हाल के वर्षों में एक्टिव लार्ज-कैप फंड्स के बेहतर प्रदर्शन में कमी आई है, इसलिए लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करने वाले लार्ज-कैप इंडेक्स को ट्रैक करने वाले इंडेक्स फंड या पैसिव फंड को प्राथमिकता दी जाती है।”
लार्ज-कैप सेगमेंट में, मार्केट में शामिल लोगों को ज्यादातर जानकारी पहले से ही होती है, इसलिए लगातार इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल होता है। स्मॉल-कैप सेगमेंट इससे अलग है। फिनप्रो वेल्थ के फाउंडर और चीफ फाइनेंशियल प्लानर हर्ष वीरा कहते हैं, “स्मॉल-कैप शेयरों पर कम रिसर्च होती है और उनमें उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है, जिससे कुशल फंड मैनेजरों को अच्छे प्रदर्शन करने वाले शेयरों को जल्दी पहचानने का बेहतर मौका मिलता है।”
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) में इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी के हेड चिंतन हरिया कहते हैं, “एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स स्मॉलकैप सेगमेंट में स्टॉक चुनकर अल्फा जेनरेट करने की क्षमता देते हैं।”
Also Read: रिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझें
एक्टिव स्मॉलकैप फंड्स का प्रदर्शन आमतौर पर अच्छा रहा है। मेहता कहते हैं, “इनमें से काफी फंड्स ने एक बाजार चक्र (market cycle) में अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया है।”
इन फंड्स के फंड मैनेजर बाजार की स्थिति के अनुसार किसी खास सेक्टर में एक्सपोजर बढ़ा या घटाकर जोखिम को बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। आनंद राठी वेल्थ में म्युचुअल फंड्स की हेड श्वेता रजनी कहती हैं, “एक्टिव मैनेजर्स बदलते हुए बिजनेस फंडामेंटल्स के अनुसार प्रतिक्रिया दे सकते हैं।”
एक अच्छा फंड मैनेजर कमजोर कंपनियों और संभावित वैल्यू ट्रैप्स से बच सकता है। एक्टिव मैनेजर्स निफ्टी स्मॉलकैप 250 के दायरे से बाहर जाकर भी निवेश कर सकते हैं और उन उभरते हुए व्यवसायों की पहचान कर सकते हैं जो अभी इंडेक्स का हिस्सा नहीं हैं।
हालांकि, इन फंड्स की कुछ कमियां भी हैं। वीरा बताते हैं, “हर एक्टिव फंड मैनेजर स्मॉल कैप सेगमेंट में सफल नहीं होता।” इसलिए इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि चुना गया फंड अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करेगा। इसके अलावा, एक्टिव फंड्स में निवेशकों को ज्यादा फीस देनी पड़ती है, चाहे फंड बेहतर प्रदर्शन करे या नहीं।
एक पैसिव स्ट्रैटेजी निवेशकों को स्मॉलकैप सेगमेंट में डायवर्सिफाइड, पारदर्शी और कम लागत वाली एक्सपोजर देती है। वीरा कहते हैं, “पैसिव फंड्स सस्ते, सरल होते हैं और गलत फंड मैनेजर चुनने के जोखिम को खत्म करते हैं।”
हालांकि, इसमें जोखिम यह है कि पैसिव फंड्स इंडेक्स के सभी शेयरों में निवेश करते हैं, जिनमें कमजोर कंपनियां भी शामिल होती हैं। इनक्रेड मनी में म्युचुअल फंड्स के सीईओ नितिन अग्रवाल कहते हैं, “मार्केट-कैप वेटेड स्मॉल कैप इंडेक्स में डिफॉल्ट रूप से कमजोर या ‘जंक’ एक्सपोजर भी शामिल हो सकता है।”
इसके अलावा, पैसिव फंड्स तब एडजस्ट नहीं कर सकते जब वैल्यूएशन बहुत ज्यादा हो जाएं। इनके पास बदलते बाजार हालात पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी सीमित होती है।
एक्सपर्ट्स कोर स्मॉल कैप एलोकेशन के लिए अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाले एक्टिवली मैनेज्ड स्मॉल कैप फंड्स की सिफारिश करते हैं। रजनी कहती हैं, “इस सेगमेंट की अक्षमताओं (inefficiencies) और इसकी गतिशील प्रकृति (dynamic nature) के कारण कोर स्मॉल कैप निवेश के लिए एक्टिव मैनेजमेंट ज्यादा बेहतर रहता है।”
लेकिन निवेशकों को कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं। वीरा कहते हैं, “जो निवेशक फंड मैनेजर को चुन और मॉनिटर कर सकते हैं और ज्यादा रिटर्न की संभावना चाहते हैं, वे एक्टिव फंड्स चुन सकते हैं। वहीं जो लोग कम लागत वाला, आसान और बिना झंझट वाला विकल्प चाहते हैं और फंड मैनेजर के प्रदर्शन की चिंता नहीं करना चाहते, उनके लिए पैसिव फंड्स बेहतर हो सकते हैं।”
उनके अनुसार, चुनाव इस बात पर निर्भर करना चाहिए कि क्या निवेशक का मानना है कि एक्टिव मैनेजर फीस काटने के बाद भी लगातार वैल्यू जोड़ सकते हैं।
निवेशकों को सबसे पहले एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर की जांच करनी चाहिए। ETF के मामले में लिक्विडिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम देखना जरूरी है, क्योंकि कम लिक्विडिटी होने पर खरीद और बिक्री की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, पर्याप्त और उचित आकार (reasonable corpus) वाले फंड का चयन करना भी जरूरी है।
स्मॉल-कैप स्पेस में छह स्मार्ट-बीटा फंड मौजूद हैं। अग्रवाल कहते हैं, “स्मार्ट-बीटा स्मॉल-कैप फंड किसी ब्रॉड मार्केट-कैप इंडेक्स को ट्रैक करने के बजाय, स्मॉल-कैप यूनिवर्स पर मोमेंटम, क्वालिटी, वैल्यू या इनके कॉम्बिनेशन जैसे नियम-आधारित फैक्टर फिल्टर लागू करते हैं।”
ये स्ट्रैटेजीज उन कमजोर कंपनियों के एक्सपोजर को कम कर सकती हैं, जो आमतौर पर साधारण मार्केट-कैप वेटेड स्मॉलकैप इंडेक्स चुनने पर मिल जाता है।
हालांकि, यह विकल्प पूरी तरह जोखिम से मुक्त नहीं है। स्मार्ट-बीटा निवेश अभी अपेक्षाकृत नई निवेश शैली है और विभिन्न बाजार चक्रों में इसका ट्रैक रिकॉर्ड सीमित रहा है। ये स्ट्रैटेजीज पिछले आंकड़ों और पहले से तय नियमों पर आधारित होती हैं, जो हर बाजार चक्र में प्रभावी साबित नहीं होतीं। उदाहरण के लिए, मोमेंटम आधारित स्ट्रैटेजी अचानक बाजार का रुख बदलने पर कमजोर प्रदर्शन कर सकती हैं, क्योंकि वे पिछले रुझानों पर निर्भर रहती हैं।
फैक्टर आधारित निवेश भी चक्रीय (cyclical) होता है और लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन कर सकता है। नियम-आधारित पोर्टफोलियो में बाजार के बदलते हालात के अनुसार तेजी से खुद को ढालने की लचीलापन अक्सर नहीं होती। रजनी कहती हैं, “स्मार्ट-बीटा फंड्स में किसी एक सेक्टर या निवेश शैली में ज्यादा निवेश केंद्रित होने का जोखिम भी रहता है।”
Also Read: Gold ETF में निवेश पर AMCs की रोक, अब क्या करें निवेशक– खरीदें, बेचें या होल्ड करें?
साधारण स्मॉल कैप इंडेक्स फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर है, जो किसी खास निवेश फैक्टर पर दांव लगाए बिना कम लागत में स्मॉलकैप सेगमेंट में निवेश करना चाहते हैं।
अग्रवाल कहते हैं, “स्मार्ट-बीटा स्मॉल कैप फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं, जो फैक्टर-आधारित निवेश को समझते हैं, आंकड़ों पर आधारित निवेश रणनीति में भरोसा रखते हैं और क्वालिटी या मोमेंटम जैसे फंड्स में अलग या अपेक्षाकृत ज्यादा जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं।”
निवेशकों को स्मार्ट-बीटा फंड तभी चुनने चाहिए, जब वे उन अवधियों में भी निवेश बनाए रख सकें, जब यह रणनीति अपेक्षित प्रदर्शन न करे।
कम से कम 5 से 7 साल के समय-सीमा का लक्ष्य रखें, क्योंकि स्मॉल-कैप में कई सालों तक गिरावट के दौर से गुजरने के लिए धैर्य की जरूरत होती है। यह पक्का करें कि इक्विटी पोर्टफोलियो में स्मॉल-कैप का कुल हिस्सा 25 फीसदी से ज्यादा न हो।
आखिर में, बाजार में गिरावट के दौरान भी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) जारी रखें।