मायापुरी निवासी महेश को निचली अदालत ने 7 जनवरी 2010 को पर्याप्त दहेज नहीं लाने पर पत्नी को आग लगाने का दोषी ठहराया था।
अदालत ने महेश की उन दलीलों को खारिज कर दिया कि पीडि़ता का मृत्यु से पूर्व दिया गया बयान संदिग्ध है क्योंकि 95 से 100 प्रतिशत जल जाने के कारण वह बयान देने की स्थिति में नहीं थी।
अदालत ने कहा कि इस तरह के जघन्य अपराध से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय में न्यायमूर्ति कैलाश गंभीर और न्यायमूर्ति इंदरमीत कौर ने हाल के अपने फैसले में कहा, हम मानते हैं कि इस तरह के जघन्य अपराध से काफी सख्ती से निपटा जाना चाहिए। सम्मान हमारे समाज का आधार तैयार करता है और महिलाओं के सम्मान को तवज्जो दी जानी चाहिए।
जारी भाषा