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बजट की सरगर्मी से संसद रही बेपरवाह
बीएस संवाददाता / नई दिल्ली February 17, 2014

एक वरिष्ठï केंद्रीय मंत्री से जब यह पूछा गया कि इस बजट से उनके मंत्रालय के ढांचे में क्या बदलाव होगा तो उन्होंने मजाकिया लहजे में यही कहा, 'सच कहूं तो मुझे इस बात से कोई फर्क ही नहीं पड़ता।'
ज्यादातर सांसदों का मानना है कि अगली सरकार बजट में फेरबदल जरूर करेगी। सांसदों ने इस बजट के राजनीतिक इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े किए, उनका मानना है कि इससे न तो चुनावों में किसी दल को फायदा मिलेगा और न ही इससे कोई नुकसान होगा।
उम्मीद के मुताबिक अंतरिम बजट को लेकर सबसे अधिक उत्साह कांग्रेस के सांसदों के बीच ही देखने को मिला। पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने कहा, 'वित्त मंत्री ने क्या शानदार काम किया है। उन्होंने दिखा दिया कि वैश्विक मंदी के बावजूद हर साल तरक्की हुई है। पांच सालों के दौरान औसतन 6.2 फीसदी की वृद्घि दर देखने को मिली जो राजग सरकार के कार्यकाल के मुकाबले कहीं अधिक है।'
दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कुछ अलग ही अंदाज में बजट की खूबियों के बारे में बात की। उन्होंने कहा, 'सभी मानकों के मुताबिक यह एक अच्छा बजट है। पिछले पांच सालों के संप्रग सरकार के कार्यकाल के दौरान करीब 14 करोड़ लोग गरीबी की रेखा से ऊपर उठे हैं। कृषि क्षेत्र की औसत विकास दर 4 फीसदी रही।' अच्छी खाद्यान्न पैदावार का श्रेय मॉनसून को देने के बजाय उन्होंने कहा, 'सरकार ने किसानों के हाथों में अधिक धन दिया। करीब 7 लाख करोड़ रुपये का कृषि ऋण दिया गया। न्यूनतम समर्थन मूल्य में इजाफा किया गया। इन सभी चीजों की वजह से विकास हुआ है। दुनिया में कौन सी ऐसी उभरती हुई अर्थव्यवस्था है जो पांच फीसदी की दर से विकास कर रही है।' उन्होंने कहा कि शिक्षा और अन्य सामाजिक क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे के विकास को देखते हुए साफतौर पर यह कहा जा सकता है कि सरकार की ओर से कोई भी नीतिगत जड़ता नहीं है।
सांसदों ने संक्षिप्त बजट दस्तावेज का अच्छी तरह से इस्तेमाल किया। लोकसभा में चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले बंसल ने कहा, 'मैं काफी लंबे समय से एक रैंक-एक पेंशन के लिए कोशिश कर रहा था और मैं इस बात से काफी खुश हूं कि इसे बजट में शामिल किया गया क्योंकि अब मैं अपने क्षेत्र में जाकर लोगों से कुछ कह सकूंगा।' भारतीय जनता पार्टी को सरकार बनाने से रोकने के लिए अगले चुनावों में कांग्रेस के संभावित साथी दलों ने वित्त मंत्री की ओर नरम रुख अपनाया। बीजू जनता दल से राज्यसभा सदस्य भतृहरि महताब ने पूछा, 'बजट में दिखाया गया है कि अब ज्यादा पैसा राज्यों की ओर जाएगा। राज्यों और केंद्र शासित राज्यों की योजनाओं को केंद्र की ओर से दी जाने वाली मदद वर्ष 2013-14 के 1,36,245 करोड़ रुपये बजट अनुमान से बढ़ाकर वर्ष 2014-15 के लिए 3,38,562 रुपये कर दिया गया। तो मैं यह कैसे कह सकता हूं कि यह अच्छा बजट नहीं है।' हालांकि उन्होंने योजनागत खर्च में कटौती पर अपनी चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि गैर-योजनागत खर्च में इजाफा भी खतरे की घंटी है। उन्होंने कहा, 'राजकोषीय घाटा कम कैसे हो सकता है जबकि रुझान ऐसा है। यह व्यावहारिक नहीं है।'
उन्होंने कहा कि बिहार और ओडिशा जैसे विकासशील राज्य इस बात से निराश जरूर हैं कि आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन द्वारा विकासशील राज्यों पर पेश की गई रिपोर्ट का कोई प्रभाव बजट में देखने को नहीं मिला। विकास को बढ़ावा देने का यह भी एक तरीका हो सकता है।
बजट पर तीखी टिप्पणी करते हुए लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ से कहा, 'अब तो आप स्प्रे भी इस्तेमाल कर चुके हैं, करने के लिए कुछ भी बाकी नहीं बचा है।' इस त्वरित टिप्पणी का जवाब देते हुए कमलनाथ ने अंतरिम बजट की ओर इशारा करते हुए कहा, 'हम जहां जाते हैं, अपनी छाप छोड़ ही आते हैं। यही हमारी आदत है।'

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