विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 15 और 16 मार्च को यूरोपीय संघ (ईयू) के मुख्यालय ब्रसेल्स की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान ईयू नेताओं के साथ पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। इसमें ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ने वाले युद्ध के प्रभाव पर भी बातचीत हुई।
मंगलवार को जारी बयान में विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा ईयू नेताओं की भारत की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के छह सप्ताह के भीतर और सफल 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद हुई है। इस शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी की। दोनों पक्षों के बीच चर्चा हालिया शिखर सम्मेलन के बाद भारत-ईयू संबंधों और संयुक्त भारत-ईयू व्यापक रणनीतिक एजेंडे के तहत चिह्नित प्राथमिकताओं पर केंद्रित रही। इसमें भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते, यूक्रेन और हिंद प्रशांत की स्थिति भी शामिल हैं।
ईयू नेताओं के साथ वार्ता के दौरान जयशंकर ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की पूरी क्षमता का उपयोग करने, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी के तहत रक्षा औद्योगिक सहयोग और समुद्री सहयोग बढ़ाने, व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद को उद्योग के साथ जोड़ने, तेज विकास और हरित व स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने तथा मोबिलिटी ढांचे को मजबूत करने जैसे विषयों पर बात की।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि जयशंकर ने ईयू के विदेश मंत्रियों से भारत के साथ ईयू के संबंधों को और मजबूती देने का आग्रह किया। ईयू नेताओं ने भी इसी तरह की भावना का इजहार किया। जयशंकर ने एक स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने तथा बहुपक्षवाद को मजबूत करने में भारत और ईयू के बीच बढ़ती समझ और समानता पर जोर दिया।
अपनी यात्रा के दौरान जयशंकर ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सला वॉन डेर लेऐन से मुलाकात की। उन्होंने ईयू की उच्च प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष काजा कलास, ईयू सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों और व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए यूरोपीय आयुक्त मारोस शेफकोविच के साथ भी चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने बेल्जियम, जर्मनी, यूनान, नीदरलैंड और स्लोवाकिया के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। भारत और बेल्जियम ने विदेश मंत्रियों के स्तर पर रणनीतिक संवाद स्थापित करने पर सहमति जताई।