भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में 44 वस्तुओं पर शुल्क के लिए नया वर्गीकरण (टैरिफ लाइन) किया है। इसका मकसद उन वस्तुओं के आयात पर सटीक नजर रखना है, जिनके बाजार में अमेरिका को व्यापार समझौते के तहत ज्यादा प्रवेश दिया गया है। इनमें पेकन नट्स, ताजे और सूखे क्रैनबेरी और ब्लूबेरी आदि शामिल हैं।
बजट दस्तावेज में कहा गया है, ‘नई टैरिफ लाइन बनाने यानी वस्तुओं पर नए सिरे से शुल्क तय करने के लिए सीमा शुल्क अधिनियम, 1975 की पहली अनुसूची में भी संशोधन किया गया है। इससे अन्य बातों के अलावा उत्पाद की बेहतर पहचान में मदद मिलेगी। साथ ही किसी पदार्थ के मूल रसायन के लेनदेन का वास्तविक आंकड़ा हासिल करने और उन पर बेहतर नजर रखने, निर्यात पर नजर रखने और पौधों के अंशों से बनाए जाने वाले उत्पादों के लिए नीतिगत उपाय तय करने में सुविधा होगी। अगर कोई और निर्देश नहीं आता है, तो ये बदलाव 1 मई 2026 से प्रभावी होंगे।’
कुछ अन्य वस्तुओं के भी 8 अंक वाले नए एचएसएन कोड बनाए गए हैं। इनमें फ्रोजन क्रिल, क्रैनबेरी उत्पाद, जिबरेलिक एसिड, थाइमिडीन, बैटरी सेपरेटर और रेफ्रिजरेटेड कंटेनर शामिल हैं। पत्र सूचना ब्यूरो की शोध शाखा द्वारा जारी एक स्पष्टीकरण में सरकार ने कहा कि इस समझौते से उपभोक्ताओं पर केंद्रित चुनिंदा वस्तुओं का आयात बढ़ाकर ग्राहकों का कल्याण सुनिश्चित किया जाएगा ताकि देश के किसानों पर बोझ डाले बगैर मांग और आपूर्ति का अंतर कम किया जा सके।
सरकार ने इसमें कहा, ‘आयात की सीमित और चरणबद्ध उपलब्धता से सुनिश्चित होगा कि यह देसी उत्पादों की जगह लेने के बजाय उनकी कमी को पूरा करे। इससे ग्राहकों के लिए कीमतें ठहरी रहेंगी और विविध प्रकार के उत्पाद मिल सकेंगे। इन उत्पादों में ट्री नट्स, बेरी जैसे ताजे और प्रसंस्कृत फल, विशेष और उच्च गुणवत्ता वाले तेल, यीस्ट, मार्जरीन और अबलोनी सहित प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद, वाइन और प्रीमियम पेय पदार्थ, पालतू जानवरों के चुनिंदा उत्पाद और सैमन, कॉड तथा अलास्का पोलक जैसे फ्रोजन खाद्य शामिल हैं।’
स्पष्टीकरण में कहा गया है कि पिछले व्यापार समझौतों की तरह ही भारत ने कृषि बाजार यह देखते हुए खोला है कि कौन सा उत्पाद हमारे लिए कितना जरूरी है। इसमें कहा गया है, ‘इसमें कई श्रेणियां हैं – शुल्क का तत्काल खात्मा, 10 साल तक के चरणों में खात्मा, शुल्क घटाना आदि। साथ ही मार्जिन ऑफ प्रेफरेंस और टैरिफ रेट कोटा व्यवस्था भी शामिल है। कुछ अत्यधिक संवेदनशील वस्तुओं की बेहद कम मात्रा को टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) में रखा गया है, जिस पर कम शुल्क लगेगा। इस श्रेणी साबुत बादाम, अखरोट, पिस्ता, दालें आदि शामिल हैं।’
अमेरिका की कृषि सचिव ब्रुक रॉलिंस ने 2 फरवरी को कहा था कि भारत-अमेरिका समझौते से अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत का विशाल बाजार मिलेगा और अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में नकदी आएगी। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘2024 में भारत के साथ अमेरिका का कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर था। भारत की बढ़ती आबादी अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अहम बाजार है और आज का समझौता इस घाटे को पाटने में काफी मदद करेगा।’
वाणिज्य विभाग ने शुक्रवार को कहा कि व्यापार समझौते में किसानों के हितों को सबसे आगे रखा गया है। विभाग ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘गेहूं, चावल, बाजरा, सोया खली, मक्का, मसाले, आलू और प्रमुख फलों को बचाकर रखा गया है। डेरी और पोल्ट्री क्षेत्रों को नहीं खोला गया है। मगर प्रमुख कृषि उत्पादों में बेहतर निर्यात अवसरों से मांग बढ़ने, भारत के निर्यात को विस्तार मिलने और कृषि आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।’
स्पष्टीकरण में कहा गया है कि चुनिंदा संवेदनशील कृषि उत्पादों पर शुल्क में कमी यह सुनिश्चित करने के लिए की गई है कि एक स्तर तक शुल्क संरक्षण बना रहे। इसमें कहा गया है, ‘उदाहरण के लिए इसमें पौधों के अंश, जैतून, पाइरेथ्रम और खली शामिल हैं। न्यूनतम आयात शुल्क पर आधारित नीति के तहत अल्कोहल युक्त पेय पर शुल्क में कमी की गई है, जो भारत के अन्य मुक्त व्यापार समझौतों के अनुरूप ही है।’