भारतीय मौसम विभाग ने इस साल सामान्य से कम मॉनसूनी बारिश का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने पिछले 12 वर्षों में करीब आधे बार यानी 6 साल मॉनसून की बारिश की मात्रा का सही अनुमान लगाया है। यह आकलन मौसम विभाग के 5 फीसदी घट-बढ़ (त्रुटि मार्जिन) को ध्यान में रखते हुए किया गया है। मॉनसूनी बारिश का सटीकता से पूर्वानुमान कृषि क्षेत्र के लिए महत्त्वपूर्ण है। हालांकि हाल के वर्षों में देश की समग्र अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का प्रभाव कम हुआ है।
मॉनसून का फसलों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है क्योंकि देश के कुल फसल रकबे का केवल 55 फीसदी ही सिंचित है। इसलिए अपर्याप्त मॉनसूनी बारिश वाले वित्त वर्ष 2014 और 2015 में फसल जीवीए वृद्धि में गिरावट आई। हालांकि वित्त वर्ष 2015 में 62 फीसदी की तुलना में वित्त वर्ष 2025 में समग्र कृषि जीवीए में फसलों की हिस्सेदारी घटकर 54 फीसदी रह गई। पशुधन इस अवधि में 24 फीसदी से बढ़कर 31 फीसदी हो गया और मॉनसूनी बारिश के सामान्य से कम रहने का इस पर उतना प्रभाव नहीं पड़ता है।