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भारतीयों के लिए दुबई में घर खरीदना होगा आसान, रेजीडेंसी वीजा के लिए प्रॉपर्टी की न्यूनतम कीमत सीमा खत्म

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दुबई द्वारा दो साल के रेजीडेंसी वीजा के लिए प्रॉपर्टी की न्यूनतम कीमत सीमा हटाने से भारतीय मध्यम वर्ग और युवा निवेशकों में किफायती अपार्टमेंट की मांग तेजी से बढ़ेगी

Last Updated- May 16, 2026 | 10:25 AM IST
Dubai Real Estate
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

दुबई के मझोले बाजार वाले इलाकों में तैयार स्टूडियो और एक बेडरूम वाले अपार्टमेंट के लिए भारतीय निवेशकों की मांग में भारी उछाल आने के आसार हैं। अमीरात ने दो साल का रेजीडेंसी वीजा चाहने वाले एकल निवेशकों के लिए न्यूनतम प्रॉपर्टी मूल्य (एमपीवी) की आवश्यकताओं को खत्म कर दिया है।

दुबई लैंड डिपार्टमेंट (डीएलडी) ने पिछले सप्ताह अपने क्यूब प्लेटफॉर्म पर निवेशक वीजा और रियल एस्टेट सेवाओं के लिए जारी एक अपडेट में एकल खरीदारों के लिए 7,50,000 दिरहम की सीमा हटा दी। साथ ही संयुक्त खरीदारों के लिए 4,00,000 दिरहम की न्यूनतम मूल्य सीमा निर्धारित की गई है।

बाजार पर नजर रखने वालों का कहना है कि जुमेराह विलेज सर्कल (जेवीसी), इंटरनैशनल सिटी और अर्जन जैसी रिहाइशी परियोजनाओं में सबसे अधिक हलचल दिख सकती है। इससे प्रीमियम श्रेणी से इतर अन्य बाजारों में भागीदारी बढ़ रही है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब भू-राजनीतिक चुनौतियों के कारण गतिवि​धियों में फिलहाल ठहराव दिख रहा है।

दुबई के रियल एस्टेट रणनीतिकार और प्रोएक्ट लग्जरी रियल एस्टेट के सीईओ रितु कांत ओझा ने कहा, ‘पहले जेवीसी में 4,50,000 दिरहम का स्टूडियो खरीदने वाला व्यक्ति वीजा कार्यक्रम से बाहर था। मगर अब वही प्रॉपर्टी उन्हें दो साल की रेजीडेंसी दिलाएगी।’

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म सीबीआरई के अनुसंधान प्रमुख (भारत, प​श्चिम ए​शिया और उत्तरी अफ्रीका) अभिनव जोशी ने कहा कि यह कदम पहली बार के अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, मध्यम आय वर्ग के पेशेवरों और युवा भारतीय निवेशकों को अधिक व्यवहार्य भागीदार बना सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम खास तौर पर बड़ी तादाद में मौजूद उन भारतीय प्रौद्योगिकी एवं वित्तीय पेशेवरों को प्रभावित कर सकता है जो फिलहाल दुबई में किराए पर रहते हैं। ओझा ने कहा, ‘पहले वह प्रॉपर्टी वीजा प्रणाली से बाहर महसूस करते थे। मगर अब वे भी कोई स्टूडियो अपार्टमेंट खरीद सकते हैं, अपने नियोक्ता से स्वतंत्र रेजीडेंसी वीजा प्राप्त कर सकते हैं और बढ़ती संपत्ति के मालिक बन सकते हैं।’

भारतीय दुबई में शीर्ष विदेशी खरीदारों में शामिल हैं, जिनका 2025 में कुल रिहायशी सौदों में 22 फीसदी हिस्सेदारी थी। दुबई के एक अन्य प्रॉपर्टी कंसल्टेंट ने कहा, ‘वे 6 से 9 फीसदी किराया आय के साथ सबसे अधिक लाभान्वित होंगे।’

यह खबर ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण दुबई का बाजार भू-राजनीतिक घबराहट का सामना कर रहा है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष ने दुबई के लक्जरी बाजार की रफ्तार को प्रभावित किया है। कुछ विशेषज्ञों ने इसे धारणा पर अस्थायी चोट कहा है जहां बुकिंग में नरमी और धनाढ्य व्यक्तियों (एचएनआई) द्वारा चुनिंदा खरीद देखी गई।

पाम जुमेराह जैसी प्रतिष्ठित संपत्तियों से बड़े पैमाने पर निवेशकों का बाहर निकलना शुरू नहीं हुआ है। मगर कुछ लोग कम कीमत में बिक्री कर रहे हैं जिसकी मुख्य वजह तरलता की कमी है।

ओझा ने कहा, ‘मार्च से अप्रैल के दौरान बाजार में नरमी आई थी लेकिन बाजार पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुआ है। ऑफ-प्लान फ्लिपिंग (डेवलपर से खरीदकर पूरा होने से पहले बेचना) में सबसे बड़ी गिरावट दिख रही है।’ उन्होंने कहा कि भुगतान योजनाओं पर बहुत अधिक निर्भर रहने वाले खुदरा सट्टेबाज क्षेत्रीय तनाव की खबरों के बाद पीछे हट गए हैं। ऐसे में नकदी से संचालित प्रीमियम निवेश में अभी भी काफी ​स्थिरता बरकरार है।

बाजार विशेषज्ञों को दुबई में वैश्विक कनेक्टिविटी, किराया आय, कर दक्षता, रेजीडेंसी विकल्प और डॉलर से जुड़ी विविधीकरण के कारण भारतीयों की दिलचस्पी बरकरार रहने की उम्मीद है।

ईएक्सपी रियलिटी इंडिया के अध्यक्ष और कंट्री हेड सैम चोपड़ा ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि अगले 12 से 18 महीनों में दुबई पूरी तरह से पटरी पर वापस आ जाएगा। वहां 2027 की शुरुआत तक मजबूत निवेशक धारणा और दमदार रिटर्न दिखेगा। ऐसा खास तौर पर भरोसेमंद डेवलपरों की परियोजनाओं में दिखेगा।’

अन्य अमीरात भी प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए अपनी रियल एस्टेट संबंधित वीजा नियमों में बदलाव कर सकते हैं।

ओझा ने कहा, ‘जब दुबई बाधा को कम कर रहा है तो अबू धाबी, शारजाह और रास अल खैमा जैसे अन्य अमीरात को प्रतिस्पर्धी बने रहने और विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के लिए खुद के रियल एस्टेट वीजा नियमों में ढील देनी पड़ेगी।’

प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय के तौर पर संयुक्त संपत्ति मालिकों के लिए प्रतिबंध बने हुए हैं। इसमें प्रति सह-मालिक न्यूनतम 4,00,000 दिरहम की न्यूनतम मूल्य सीमा तय की गई है।

जोशी ने कहा, ‘संयुक्त संपत्ति मालिकों के लिए प्रति निवेशक एक सीमा का प्रतिधारण वीजा-पूलिंग के खिलाफ एक जानबूझकर नियामक सुरक्षा उपाय हो सकता है, जहां कई निवेशक इसे सह-स्वामित्व में लेकर एकल कम मूल्य वाली संपत्ति के जरिये रेजीडेंसी हासिल करने का प्रयास करते हैं।’

ओझा ने कहा कि अगर संयुक्त स्वामित्व के लिए कोई सीमा नहीं होती तो कुछ लोग केवल रेजीडेंसी हासिल करने के लिए कोई सस्ता स्टूडियो खरीद सकते थे।

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First Published - May 16, 2026 | 10:25 AM IST

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