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पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के ‘संस्मरण’ पर संसद में तीसरे दिन भी गतिरोध

लोक सभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे जैसे ही आरंभ हुई, तो विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दिया। इस कारण कुछ देर बाद ही कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

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अर्चिस मोहन   
Last Updated- February 05, 2026 | 10:47 AM IST

पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित ‘संस्मरण’, विशेष रूप से अगस्त 2020 के भारत-चीन सीमा संघर्ष पर उनकी टिप्पणी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बुधवार को लगातार तीसरे दिन संसद में गतिरोध जारी रहा। सरकार की ओर से पहले संकेत दिया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब शाम 5 बजे देंगे, लेकिन लोक सभा अध्यक्ष ने विपक्षी दलों के लगातार विरोध के बीच सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।

लोक सभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे जैसे ही आरंभ हुई, तो विपक्षी दलों ने विरोध शुरू कर दिया। इस कारण कुछ देर बाद ही कार्यवाही स्थगित कर दी गई। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बयान पढ़ा। विपक्षी सदस्य फिर शोर-शराबा करने करने लगे। विपक्ष के नेता राहुल गांधी को सदन में एक किताब लहराते हुए देखा गया।

हंगामा नहीं थमने पर स्पीकर ने सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। संसद भवन परिसर में राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख नरवणे के ‘अप्रकाशित’ संस्मरण को दिखाते हुए दावा किया कि प्रधानमंत्री ने 2020 में भारत-चीन संघर्ष के दौरान जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और पूरा मामला जनरल पर छोड़ दिया। गांधी ने कहा कि भारत के युवाओं को पता होना चाहिए कि सरकार के दावों के उलट यह पुस्तक विदेश में छप चुकी है।

गांधी ने कहा कि नरवणे ने लद्दाख में जो कुछ हुआ, उसका पूरा विवरण इस किताब में लिखा है। उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया कि वह लोक सभा में इस ‘संस्मरण’ का जिक्र नहीं कर सकते। लेकिन मुख्य पंक्ति वही है जो प्रधानमंत्री ने कही- ‘जो उचित समझो वह करो।’ कांग्रेस नेता ने किताब का हवाला देते हुए कहा, ‘इससे नरेंद्र मोदी ने संदेश दिया- ‘जो उचित समझो, वह करो।’

इससे पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोक सभा में कुछ किताबों का जिक्र करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधा। इस मुद्दे पर विपक्षी सदस्यों ने भारी हंगामा किया। बार-बार हंगामे के कारण बाधा के बाद शाम पांच बजे सदन की बैठक पुन: शुरू हुई तो पीठासीन सभापति संध्या राय ने धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेने के लिए भाजपा सांसद पीपी चौधरी का नाम पुकारा। हालांकि, विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच उन्होंने तत्काल बैठक को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया। सदन स्थगित होने के बाद कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की और दुबे को किताबों से उद्धृत करते हुए बोलने की अनुमति देने के अध्यक्ष के फैसले का विरोध किया।

First Published : February 5, 2026 | 10:47 AM IST