देश की अपनी रियल टाइम भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई को शुरू हुए दस साल हो गए हैं। आज 45 करोड़ से अधिक भारतीय इसका उपयोग कर रहे हैं और इससे हर महीने 22 अरब से अधिक लेन-देन होता है। अप्रैल 2016 में भारतीय रिजर्व बैंक के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन द्वारा शुरू किए गए यूपीआई का उद्देश्य ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देना था, जिसे बाद में केंद्रीय बैंक के पेमेंट्स विजन-2018 में भी स्पष्ट किया गया।
इसकी कामयाबी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस साल अकेले मार्च में ही रिकॉर्ड 22.64 अरब यूपीआई भुगतान हुए हैं, जिनका कुल मूल्य 29.52 लाख करोड़ रुपये रहा।
इतने बड़े पैमाने पर यूपीआई के इस्तेमाल के बावजूद इसकी वृद्धि दर धीमी पड़ रही है। वित्त वर्ष 2026 में यूपीआई में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वित्त वर्ष 25 में यह 41.75 प्रतिशत, वित्त वर्ष 24 में 56.56 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2023 में 56.56 प्रतिशत रही थी।
यूपीआई इस्तेमाल में यह सुस्ती आधार-प्रभाव के कारण देखी गई है, क्योंकि हर महीने बड़ी संख्या में लेन-देन संसाधित किए जाते हैं लेकिन यूपीआई अभी भी काफी हद तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट से मुक्त है, जो इसके प्रसार के उद्देश्य से होने वाले निवेश के लिए प्रोत्साहनों को सीमित करता है। बीते वर्षों में यूपीआई ने विस्तार करते हुए बड़े पैमाने पर ग्राहकों के बीच पैठ बनाई है।