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RBI MPC Meeting 2026: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की जून 2026 बैठक से पहले होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले करोड़ों ग्राहकों की चिंता बढ़ गई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई के दबाव ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले समय में EMI में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन पर दबाव के कारण महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है। यदि कच्चे तेल और अन्य कमोडिटी की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं तो इसका असर भारत की मुद्रास्फीति पर पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना आसान नहीं होगा, जिसका सीधा असर लोन की EMI पर पड़ सकता है।
ईज़ीपे के सीनियर अकाउंटेंट आदिल मलिक का कहना है कि केवल वैश्विक तनावों के आधार पर EMI में तुरंत बदलाव की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। RBI अपने फैसले घरेलू महंगाई, आर्थिक विकास, तरलता और वित्तीय स्थिरता जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर लेता है।
वहीं नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Shishir Baijal का मानना है कि मौजूदा हालात में RBI नीतिगत ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। उनके अनुसार महंगाई का बड़ा हिस्सा आपूर्ति संबंधी कारणों से जुड़ा है, ऐसे में ब्याज दर बढ़ाने से आर्थिक विकास पर दबाव पड़ सकता है और इसका सीमित असर महंगाई पर होगा।
वहीं, Voice of Banking के फाउंडर अश्विनी कुमार राणा ने कहा कि जिन लोगों ने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन लिया है या जो नियमित EMI भरते हैं, उनके लिए फिलहाल राहत की उम्मीद कम है।
उन्होंने कहा कि महंगाई पहले से ही ऊंचे स्तर पर है, इसलिए संभावना कम है कि RBI इस बार रीपो रेट में कोई बदलाव करेगा। राणा के अनुसार RBI का मुख्य फोकस फिलहाल महंगाई को नियंत्रित करने पर रहेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि रीपो रेट में बढ़ोतरी होती है तो इसका सीधा असर आम लोगों की EMI पर पड़ेगा और उनका बोझ बढ़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला RBI ही अपने आर्थिक आकलन के आधार पर करेगा।
अश्विनी राणा ने लोगों को 5 जून के RBI फैसले का इंतजार करने की सलाह दी है, ताकि यह साफ हो सके कि EMI में कोई बदलाव होगा या नहीं।
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फ्लोटिंग रेट होम लोन लेने वाले ग्राहकों पर ब्याज दरों में बदलाव का असर जल्दी दिखाई देता है। अगर बैंक की फंडिंग लागत बढ़ती है तो EMI या लोन अवधि में बदलाव संभव है। वहीं फिक्स्ड रेट लोन पर इसका असर सीमित रहता है।
जून 2026 की MPC बैठक सिर्फ ब्याज दरों का फैसला नहीं करेगी, बल्कि यह भी संकेत देगी कि आने वाले महीनों में लोन महंगे होंगे या नहीं। फिलहाल विशेषज्ञों के बीच यह राय है कि RBI इस बार दरों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा, लेकिन अंतिम तस्वीर 5 जून को साफ होगी।