भारत माइक्रोसॉफ्ट के लिए एंटरप्राइज एआई की शुरुआत करने वाले सबसे बड़े और सबसे तेजी से उभरते बाजारों में से एक बन चुका है। देश की तीन सबसे बड़े आईटी सेवा प्रदाता – टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), इन्फोसिस और विप्रो में से प्रत्येक ने अपने 1,00,000 कर्मचारियों के लिए माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट को सफलतापूर्वक लागू किया है। इसके साथ ही छह महीने के भीतर 3,00,000 लाइसेंस की संयुक्त प्रतिबद्धता पूरी हो गई है। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया और दक्षिण एशिया के अध्यक्ष पुनीत चंडोक कहना है कि बड़े स्तर पर एंटरप्राइज एआई अपनाने की रफ्तार तेज हो रही है। शिवानी शिंदे के साथ बातचीत में उन्होंने एजेंटिक एआई को अपनाने, सबसे बड़े डेटा सेंटर की तैनाती और भारतीय बाजार के बारे में चर्चा की। संपादित अंश …
भारत में 3,00,000 कर्मचारी माइक्रोसॉफ्ट 365 कोपायलट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके बरअक्स भारत में एंटरप्राइज एआई अपनाने के क्या मायने हैं?
कोपायलट अब इन्फोसिस, टीसीएस और विप्रो में 3,00,000 से अधिक इंजीनियरों और सहयोगियों के बीच एक कड़ी बन रहा है। मेरे लिए इसके तीन मायने हैं।
पहला, कोपायलट अब इस तरह से भारतीय आईटी सेवाओं का हिस्सा बन रहा है कि वे दुनिया को अपनी सेवाएं कैसे देती हैं। यह भारतीय आईटी सेवाओं में एआई के लिए एक जोड़ने वाली कड़ी या यूजर इंटरफेस बनता जा रहा है, जो कि बहुत ही रोमांचक बात है।
दूसरे, यह बड़े स्तर पर एंटरप्राइज एआई का सबूत है। हम अब प्रयोगों और पायलट परियोजनाओं से बहुत आगे निकल चुके हैं और बड़े स्तर पर, स्थायी इस्तेमाल वाले दौर में पहुंच गए हैं। अगर आप इस्तेमाल के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इन्फोसिस में 91 प्रतिशत इस्तेमाल हो रहा है, टीसीएस में रोजाना 86 प्रतिशत उपयोग होता है। विप्रो ने 29,000 सिटिजन एजेंट तैयार किए हैं। ये ऐसे एजेंट हैं जिन्हें खुद कर्मचारियों ने बनाया है और जो काम करने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहे हैं।
तीसरे, भारत इस मामले में सबसे आगे है। भारत अब बड़े स्तर पर एआई को लागू करने के मामले में वैश्विक मॉडल बनता जा रहा है। हमारे पास प्रायोगिक परीक्षणों से लेकर उन्हें पूरी तरह से लागू करने तक का पूरा तरीका मौजूद है।
वैश्विक बाजारों की तुलना में यह कैसा है? क्या आपको लगता है कि अब इसे अपनाना ज्यादा सहज हो जाएगा?
अभी तो केवल दो साल ही हुए हैं। यह हैरानी की बात है कि हम तकनीक के साथ कितने अधीर हो जाते हैं। वैश्विक स्तर की बात करें, तो जैसा कि हमारे पिछले तिमाही नतीजों में देखा गया है, हम 2 करोड़ कोपायलट तक पहुंच चुके हैं और सालाना आधार पर 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। स्तर बहुत बड़ा है। हम यह भी देख रहे हैं कि जो ग्राहक बड़े स्तर पर कोपायलट का उपयोग करते हैं, वे इसका इस्तेमाल बढ़ाना जारी रखते हैं।
50,000 से अधिक कोपायलट वाले ग्राहकों की संख्या चार गुना हो चुकी है। एक बार जब संगठन इसका उपयोग करना शुरू कर देते हैं तथा प्रभाव और महत्त्व देखते हैं, तो वे तेजी से विस्तार करते हैं। यही बात इन्फोसिस, टीसीएस और विप्रो के साथ भी हुई। वे छह महीने पहले लगभग 50,000 कोपायलट पर थे। उन्होंने यह संख्या दोगुनी कर दी है क्योंकि उन्होंने वैल्यू और असर देखा।
क्या कोपायलट को लेकर चल रही चर्चा अब उत्पादकता से आगे बढ़ रही है? आज उद्यम किन चीजों पर ध्यान दे रहे हैं?
शुरुआत में एआई का सिद्धांत उत्पादकता और दक्षता पर केंद्रित था यानी काम को तेजी से और सुचारू रूप से करना। हालांकि हमारी हालिया वर्क ट्रेंड इंडेक्स रिपोर्ट में सबसे उत्साहजनक निष्कर्षों में से एक यह था कि आज कोपायलट पर होने वाले 49 प्रतिशत काम संज्ञानात्मक कार्य हैं। लोग इसका उपयोग विश्लेषण, गहन चिंतन और समस्या-समाधान के लिए कर रहे हैं।
वे अपने सोच को आउटसोर्स नहीं कर रहे हैं, वे एआई को संज्ञानात्मक क्षमता बढ़ाने वाले टूल के रूप में उपयोग कर रहे हैं। एक और खास निष्कर्ष यह है कि 58 प्रतिशत लोग कहते हैं कि वे अब ऐसे काम कर सकते हैं जो वे 12 महीने पहले नहीं कर सकते थे। एआई पूरी तरह से नई क्षमताओं के निर्माण में मदद कर रही है।
नयारा प्रकरण और व्यापक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बाद डिजिटल संप्रभुता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्या ग्राहक डेटा कहां रहेगा और इसकी मजबूती के बारे में ज्यादा सवाल पूछ रहे हैं?
ग्राहकों का डेटा रेजीडेंसी और स्थानीय डेटा कैप्चर के संबंध में पूछना बिल्कुल सही है। यही एक वजह है कि हम पहले से घोषित 3 अरब डॉलर के अलावा 17.5 अरब डॉलर का निवेश कर रहे हैं, जिससे अगले चार वर्षों में भारत में हमारा कुल नियोजित निवेश 20 अरब तक पहुंज जाएगा। हैदराबाद क्षेत्र अगली तिमाही में चालू हो जाएगा। हमारे पास देश में पहले से ही सबसे बड़ी क्लाउड क्षमता मौजूद है और हम भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार निवेश कर रहे हैं।
क्या आप हैदराबाद डेटा सेंटर के बारे में कोई नई जानकारी दे सकते हैं? साथ ही आप जिस मांग की योजना बना रहे हैं, उसमें से कितना हिस्सा पारंपरिक क्लाउड अपनाने की तुलना में एआई और जेनरेटिव एआई वर्कलोड से आ रहा है?
हैदराबाद रीजन अगली तिमाही में शुरू हो जाएगा। यह देश में डेटा सेंटर के सबसे बड़े निवेश में से एक है और यह हमारी एआई और क्लाउड क्षमता को मजबूत करेगा। इसमें क्लाउड माइग्रेशन और एआई वर्कलोड दोनों ही शामिल हैं। क्लाउड पर माइग्रेशन की बड़ी लहर चल रही है, क्योंकि संगठनों को यह एहसास हो गया है कि कार्यस्थल के परिसर में एआई को प्रभावी ढंग से चलाना मुश्किल होता है।