ई20 (20 फीसदी एथनॉल मिश्रित पेट्रोल) ईंधन को लेकर बढ़ती चिंता के बीच जुलाई में वाहनों की कुल बिक्री में पेट्रोल से चलने वाली कारों की हिस्सेदारी 41.68 फीसदी के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की मांग बढ़ी है। वाहन डीलरों के सगंठन फाडा के आंकड़ों के अनुसार जुलाई में पेट्रोल और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की बिक्री का अंतर महज 1.09 फीसदी रह गया। कुल बिक्री में वैकल्पिक ईंधन से चलने वाले वाहनों की हिस्सेदारी 40.59 फीसदी रही। वैकल्पिक ईंधन खंड में सीएनजी की हिस्सेदारी 24.67 फीसदी, हाइब्रिड 8.02की फीसदी और इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) की 7.90 फीसदी रही।
दिलचस्प है कि पिछले साल जुलाई में कुल वाहनों की बिक्री में पेट्रोल वाहनों की हिस्सेदारी 48.11 फीसदी और जुलाई 2024 में 51.75 फीसदी थी, जो दर्शाता है कि यह गिरावट मुख्य रूप से ई20 ईंधन को लेकर विवाद के कारण हुई है। जुलाई 2025 में वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की हिस्सेदारी 34.14 फीसदी और जुलाई 2024 में 29.89 फीसदी थी। गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अकेले सीएनजी वाहनों की बिक्री पेट्रोल से चलने वाली यात्री वाहनों से अधिक हो गई। इस बीच, नई कार बिक्री में डीजल की हिस्सेदारी जून के 16.32 फीसदी से मामूली बढ़कर जुलाई में 17.73 फीसदी हो गई। जुलाई 2025 में कुल बिक्री में डीजल वाहनों की हिस्सेदारी 17.75 फीसदी थी।
फाडा के उपाध्यक्ष साई गिरिधर ने कहा, ‘ई20 ईंधन को लेकर ग्राहकों की झिझक ने खरीदारों को सीएनजी, हाइब्रिड और ईवी का रुख करने के लिए मजबूर किया। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में इस साल जुलाई में पेट्रोल वाहनों की बिक्री में 6 फीसदी की गिरावट आई है। लेकिन डीजल वाहनों की बिक्री लगभग स्थिर है। इससे संकेत मिलता है ई20 के प्रति धारणा ने ग्राहकों को वैकल्पिक ईंधनों की ओर रुख करने में बड़ी भूमिका निभाई है।’
जुलाई में दोपहिया, तिपहिया, वाणिज्यिक वाहन, यात्री वाहन तथा ट्रैक्टर आदि की बिक्री अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर थी। उद्योग की कुल बिक्री 25.9 लाख रही जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 26 फीसदी अधिक है।
ईवी की कुल खुदरा बिक्री भी 3,27,901 वाहन तक पहुंच गई जो किसी भी महीने में अभी तक का सर्वाधिक आंकड़ा है। इसमें दोपहिया और वाणिज्यिक ईवी की बिक्री सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर रही और कुल वाहन बिक्री में ईवी की हिस्सेदारी बढ़कर 12.7 फीसदी हो गई।
ई20 ईंधन मिश्रण कार्यक्रम वाहनों के लिए एथनॉल के उपयोग को बढ़ाने और आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की केंद्र सरकार की रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों में कार खरीदारों, राजनीतिक दलों और उद्योग निकायों द्वारा ई20 ईंधन की गुणवत्ता और इसके संभावित प्रभाव पर चिंता जताई गई है।
बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिले विशिष्ट आंकड़ों के अनुसार देश भर में यात्री वाहनों में वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ा है और कई राज्यों में सीएनजी ने पारंपरिक ईंधन को पीछे छोड़ दिया है। हरियाणा में जुलाई 2025 में वाहनों की कुल बिक्री में सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी 36.2 फीसदी थी जो जुलाई 2026 में बढ़कर 43.17 फीसदी हो गई। इसी अवधि के दौरान उत्तर प्रदेश में सीएनजी वाहनों की हिस्सेदारी 31.63 फीसदी से बढ़कर 38.46 फीसदी, राजस्थान में 29.35 फीसदी से बढ़कर 34.86 फीसदी, महाराष्ट्र में 34.75 फीसदी से 37.72 फीसदी और गुजरात में 38.9 फीसदी से बढ़कर 40.58 फीसदी हो गई। दिल्ली में पिछले साल जुलाई में वाहनों की कुल बिक्री में सीएनजी की हिस्सेदारी 27.27 फीसदी थी जो इस साल जुलाई में बढ़कर 31.20 फीसदी हो गई।
गिरिधर ने कहा, ‘आंकड़े से पता चलता है कि वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की बिक्री इस साल कभी भी पेट्रोल को पीछे छोड़ सकती है। यात्री वाहन इन्वेंट्री जून के अंत से एक और दिन बढ़कर 33 से 35 दिनों तक पहुंच गई जो फाडा द्वारा अनुशंसित 21 दिन के बेंचमार्क से काफी ज्यादा है।’ जुलाई में दोपहिया वाहनों की बिक्री 28.25 फीसदी, ट्रैक्टर की 28.1 फीसदी, वाणिज्यिक वाहन की 24.04 फीसदी, यात्री वाहन की 19.13 फीसदी बढ़ी है।