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SIAM का ई-बस और ट्रकों के स्थानीयकरण नियम 7 महीने टालने का आग्रह, चीन के रेयर अर्थ संकट का असर

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SIAM का कहना है कि चीन ने रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है जिससे इन मैग्नेट की आपूर्ति में अब भी बाधा आ रही है

Last Updated- August 04, 2026 | 10:15 PM IST
Electric Bus
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सायम) ने भारी उद्योग मंत्रालय से अनुरोध किया है कि पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों के लिए स्थानीयकरण के नियम लागू करने की समय-सीमा 7 महीने और बढ़ाई जाए। उसने यह मियाद 1 अप्रैल 2027 करने का आग्रह किया है। अभी यह समय-सीमा 1 सितंबर 2026 तय की गई थी।

सायम का कहना है कि चीन ने रेयर अर्थ मैग्नेट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है जिससे इन मैग्नेट की आपूर्ति में अब भी बाधा आ रही है। ये मैग्नेट इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों की ट्रैक्शन मोटर बनाने के लिए बहुत जरूरी होते हैं।

सायम ने 22 जुलाई को मंत्रालय को भेजे अपने पत्र में यह मांग की। पीएम ई-ड्राइव योजना के चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) के तहत इलेक्ट्रिक बस और ट्रक निर्माता कंपनियों को ट्रैक्शन मोटर के अहम घटकों का निर्माण भारत में करना अनिवार्य है। सरकार पहले इन नियमों को 1 सितंबर 2025 से लागू करना चाहती थी लेकिन उद्योग की मांग पर इसे दो बार पहले ही टाला जा चुका है।

30 सितंबर 2025 को पहली बार समय-सीमा बढ़ाकर मार्च 2026 की गई। फिर 13 मार्च 2026 को कंपनियों को 31 अगस्त 2026 तक विदेश से ट्रैक्शन मोटर आयात करने की अनुमति दे दी गई और नई समय-सीमा 1 सितंबर 2026 तय की गई। 

अब सायम का कहना है कि चीन ने डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे भारी रेयर अर्थ तत्वों और परमानेंट मैग्नेट के निर्यात पर नियंत्रण लगा दिया है। इससे पूरी दुनिया में इन मैग्नेट की आपूर्ति अस्त-व्यस्त हुई है। यह मैग्नेट इलेक्ट्रिक बसों और ट्रकों में इस्तेमाल होने वाली ट्रैक्शन मोटर के लिए अहम है।

उद्योग संगठन ने कहा, ‘हालांकि कुछ कंपनियों को निर्यात की अनुमति मिली है, लेकिन हर खेप के लिए सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती है। इससे सामान मिलने में काफी समय लग रहा है और आपूर्ति अनिश्चित बनी हुई है।’ सायम ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण माल ढुलाई में अधिक समय लग रहा है। इसी वजह से वाहन कंपनियों को एक तरफ जरूरी मैग्नेट की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने में कठिनाई हो रही है और दूसरी तरफ स्थानीयकरण के नियमों को लागू करना भी मुश्किल हो रहा है।

सायम का मानना है कि यदि समय-सीमा 1 अप्रैल 2027 तक बढ़ा दी जाए तो उत्पादन में रुकावट नहीं आएगी। कंपनियों को भारत में स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला तैयार करने के लिए समय मिलेगा। घरेलू निर्माण क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। आयातित तंत्र से धीरे-धीरे आंशिक रूप से स्थानीय और फिर पूरी तरह भारत में बनी ट्रैक्शन मोटर और मोटर कंट्रोल सिस्टम की ओर आसानी से जाया जा सकेगा।

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First Published - August 4, 2026 | 10:10 PM IST

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