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CAFE-III Norms 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की तैयारी में सरकार, भारी उद्योग मंत्रालय ने दिए सख्त संकेत

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कंपनियों में इसको लेकर मतभेद है जिसके चलते सरकार 16 अप्रैल को एक हाई-लेवल बैठक करने जा रही है। इसमें पावर, भारी उद्योग और सड़क परिवहन मंत्रालयों के सचिव शामिल होंगे

Last Updated- April 13, 2026 | 7:03 PM IST
CAFE-III norms
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार अगले साल 1 अप्रैल से कार कंपनियों पर कड़े फ्यूल एफिशिएंसी (ईंधन दक्षता) नियम लागू करने की तैयारी में है। भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी ने सोमवार को कहा कि CAFE-III मानकों की डेडलाइन बढ़ाने की जरूरत नहीं दिख रही है। सरकार इस पूरे मामले पर ऑटो इंडस्ट्री के साथ लगातार बातचीत कर रही है और कंपनियों से राय भी ले रही है। 

ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से शुरू होकर 31 मार्च 2032 तक लागू रहेंगे। इन नियमों के तहत कंपनियों को अपनी सभी गाड़ियों की औसत फ्यूल एफिशिएंसी और बेहतर करनी होगी, ताकि कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके।

Also Read: रफ्तार पकड़ रही हैं इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलें, वित्त वर्ष 2026 में बिक्री में दर्ज हुई 28% की शानदार बढ़त

छोटी कारों को लेकर विवाद

ऑटो कंपनियों के बीच इस नियम को लेकर अलग-अलग राय है। छोटी कार बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि गाड़ियों के वजन और कीमत को देखते हुए उन्हें कुछ राहत मिलनी चाहिए, ताकि आम लोगों के लिए सस्ती कारें बनी रह सकें। मारुति सुजुकी और टोयोटा किर्लोस्कर जैसी कंपनियां भी छोटी कारों को फायदा देने के पक्ष में हैं।

वहीं दूसरी तरफ टाटा मोटर्स, महिंद्रा, हुंडई और किआ जैसी बड़ी कंपनियां इसका विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि अगर अलग-अलग नियम लागू किए गए तो गाड़ियों में सिक्योरिटी फीचर्स पर असर पड़ सकता है और सभी कंपनियों के लिए बराबर प्रतिस्पर्धा का माहौल नहीं रहेगा।

सरकार इस मुद्दे पर 16 अप्रैल को एक हाई-लेवल बैठक करने जा रही है। इसमें पावर, भारी उद्योग और सड़क परिवहन मंत्रालयों के सचिव शामिल होंगे। इस बैठक में ड्राफ्ट नियमों पर सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोशिश होगी।

ड्राफ्ट नियमों में कुछ आसान नियम भी शामिल हैं। अगर कोई कंपनी तय टारगेट से बेहतर प्रदर्शन करती है, तो वह अपने अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट दूसरी कंपनियों को बेच सकती है, और यह प्रक्रिया आपसी सहमति से होगी। इसी तरह, अगर किसी कंपनी के पास क्रेडिट की कमी रह जाती है तो वह ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) से क्रेडिट खरीदकर अपना बैलेंस ठीक कर सकती है। साथ ही पेनल्टी से जुड़े नियमों को भी कुछ हद तक आसान किया गया है।

सरकार का दावा है कि इन बदलावों का मकसद ऑटो इंडस्ट्री को साफ-सुथरी और ज्यादा फ्यूल एफिशिएंसी गाड़ियां बनाने के लिए प्रेरित करना है। साथ ही इसी वजह से कई कंपनियां अब इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और हाइब्रिड मॉडल्स पर ज्यादा फोकस कर रही हैं, ताकि नए नियमों को आसानी से पूरा किया जा सके।

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First Published - April 13, 2026 | 7:03 PM IST

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