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रफ्तार पकड़ रही हैं इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलें, वित्त वर्ष 2026 में बिक्री में दर्ज हुई 28% की शानदार बढ़त

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भारत में अब इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलों का क्रेज बढ़ रहा है। बेहतर तकनीक, कम रखरखाव और पेट्रोल के मुकाबले कम खर्च की वजह से अनुभवी राइडर्स भी अब ई-बाइक्स को अपना रहे हैं

Last Updated- April 12, 2026 | 10:15 PM IST
Electric Bike
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश के इलेक्ट्रिक मोटरसाइकल बाजार में अब मांग के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं। हालांकि यह श्रेणी अभी नई है और समूचे दोपहिया उद्योग की तुलना में काफी छोटी है। वाहन के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 26 में इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलों की बिक्री पिछले साल की तुलना में 28 प्रतिशत बढ़कर 17,173 हो गई। वित्त वर्ष 25 में यह 13,430 थी। हालांकि आधार अभी कम है। लेकिन यह बढ़ोतरी नए वाहनों की पेशकश और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के कारण बढ़ती दिलचस्पी दिखाती है।

कुछ नई और पुराने कंपनियां प्रदर्शन, तकनीक और राइडिंग अनुभव के मामले में अलग-अलग तरीकों से इस श्रेणी को आकार दे रही हैं। इन कंपनियों में रॉयल एनफील्ड – अपनी फ्लाइंग फ्ली के साथ, ओबेन इलेक्ट्रिक, रिवोल्ट मोटर्स, अल्ट्रावॉयलेट ऑटोमोटिव और मैटर मोटर शामिल हैं। मैटर मोटर के संस्थापक और समूह के मुख्य कार्य अ​​धिकारी मोहल लालभाई ने कहा कि यह श्रेणी अब शुरुआती ग्राहकों से आगे बढ़ रही है। अब मोटरसाइकलों के पक्के राइडर भी इलेक्ट्रिक विकल्पों पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

लालभाई ने कहा, ‘हम शुरुआत में अपनाने वालों के दौर से काफी आगे निकल चुके हैं। अब हम मोटरसाइकल चलाने वाले ऐसे पक्के राइडरों की असली दिलचस्पी देख रहे हैं, जो सालों से मोटरसाइकल चला रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि यह बदलाव राइडिंग के बदलावों, ताप संबंधी स्थिरता और कनेक्टेड तकनीक में हुए सुधारों के कारण हो रहा है।

उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलों को अब पहले की तरह किसी चीज से समझौता करने के बजाय अपग्रेड के तौर पर देखा जा रहा है। यह ऐसी श्रेणी की दिशा में प्रमुख मानसिक बदलाव है, जिसे पारंपरिक रूप से प्रदर्शन, नियंत्रण और पहचान के आधार पर परिभाषित किया जाता रहा है। 

कीमत के मामले में लालभाई ने कहा कि कुल मालिकाना लागत (टीसीओ) अब तेल-गैस इंजन इंजन वाली मोटरसाइकलों के बराबर या उससे भी बेहतर स्तर पर पहुंच गई है। चलाने की कम लागत, कम रखरखाव और अनुमान लगाने की ज्यादा क्षमता जैसी बातें इलेक्ट्रिक मोटरसाइकलों को आर्थिक रूप से बेहतर विकल्प बनाने में मदद कर रही हैं। उन्होंने कहा, ‘जो राइडर रोजाना 30 से 50 किलोमीटर की दूरी तय करता है, उसकी लागत वसूल होने में लगभग 18 से 24 महीने का समय लगता है।’ 

हालांकि इस श्रेणी का विस्तार करने में कुछ ढांचागत चुनौतियां भी हैं। लालभाई ने अलग-अलग इलाकों में मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल बिठाना, ज्यादा उत्पादन होने पर भी गुणवत्ता बनाए रखना, इनपुट लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालना और चुस्त वितरण नेटवर्क तैयार करना जैसी मुख्य चुनौतियों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, ‘मकसद केवल तेजी से आगे बढ़ना ही नहीं है, बल्कि सही तरीके से आगे बढ़ना है – निरंतरता, अच्छी गुणवत्ता और ग्राहकों के भरोसे के साथ।’

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First Published - April 12, 2026 | 10:15 PM IST

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