वाहन उत्पादन आधारित रियायत (पीएलआई) योजना के तहत अतिरिक्त कागजी काम को लेकर वाहन निर्माताओं के विरोध का असर हुआ है। बिजनेस स्टैंडर्ड को पता चला है कि अब ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) ने इस योजना के तहत निर्यात वाले वाहनों के प्रमाणन की शर्तों में ढील दी है।
एआरएआई ने सोमवार दोपहर जारी नोटिस में कहा, ‘जिन मामलों में किसी एक्सपोर्ट वेरिएंट का ‘बिल ऑफ मटीरियल्स’ (बीओएम) और उसका विवरण, उससे मिलते-जुलते घरेलू वेरिएंट के समान हुआ तो घरेलू वेरिएंट के लिए जारी किया गया घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) प्रमाणपत्र, एक्सपोर्ट वेरिएंट के लिए भी मान्य होगा।’ बिल ऑफ मटीरियल्स या बीओएम किसी वाहन के निर्माण में इसतेमाल कलपुर्जों और कच्चे माल की व्यापक सूची है।
डीवीए का मतलब किसी वाहन के मूल्य का वह हिस्सा होने से है, जो भारत के भीतर स्थानीय निर्माण, कलपुर्जों की खरीद और अन्य घरेलू सामग्री के जरिये तैयार किया जाता है। ऑटो पीएलआई योजना के तहत, निर्माताओं को वित्तीय प्रोत्साहन की पात्रता के लिए डीवीए के तय स्तरों को पूरा करना जरूरी होता है।
22 दिसंबर 2025 को एआरएआई ने एक नोटिस जारी किया था। इसमें निर्माताओं से कहा गया था कि वे प्रत्येक निर्यात मॉडल के लिए अलग डीवीए प्रमाणपत्र प्राप्त करें। एआरएआई ऐसी सरकारी टेस्टिंग एजेंसी है जो ऑटो पीएलआई योजना के तहत इंसेंटिव का दावा करने वाले वाहन मॉडलों के लोकलाइजेशन स्तरों को सत्यापित करती है।
वाहन निर्माताओं का कहना है कि हर नए डीवीए प्रमाणन के लिए निर्माताओं को पूरी वैल्यू चेन में मौजूद आपूर्तिकर्ताओं से नए दस्तावेज इकट्ठे करने पड़ते और इस प्रक्रिया में कई महीने लग जाते।