रुपये में लगातार पांच दिनों से जारी गिरावट का सिलसिला मंगलवार को थम गया। इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में कमी आना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए आरबीआई के हालिया उपायों के तहत उम्मीद से ज्यादा विदेशी मुद्रा की आवक रही।
कारोबारी सत्र के दौरान घरेलू मुद्रा 96.13 प्रति डॉलर के उच्चस्तर पर पहुंचने के बाद 96.24 प्रति डॉलर पर बंद हुई। एक दिन पहले यह 96.45 प्रति डॉलर पर बंद हुई थी। रिकवरी के बावजूद रुपया एक साल पहले के मुकाबले करीब 10 फीसदी नीचे है और इस दौरान सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली प्रमुख एशियाई मुद्रा में है।
बाजार के प्रतिभागियों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक कोशिशों की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से धारणा बेहतर हुई जबकि आरबीआई की ओर से बीच-बीच में डॉलर बिक्री ने नुकसान को सीमित रखा। लेकिन तेल विपणन कंपनियों और दूसरे आयातकों की डॉलर मांग ने रुपये की मजबूती को रोके रखा। एक सरकारी बैंक के डीलर ने कहा, रुपये की कीमत बढ़ने की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और सुबह आरबीआई का दखल था।
माहौल को बेहतर बनाते हुए आरबीआई ने मंगलवार को बताया कि विदेशी पूंजी लाने के लिए जून में घोषित उपायों से 8 जून से 17 जुलाई के बीच 20.72 अरब डॉलर जुटाए गए। यह जानकारी इस पैकेज के तहत आए फंड के बारे में पहली आधिकारिक घोषणा थी। इस पैकेज में एफसीएनआर (बी) जमाएं और वाह्य वाणिज्यिक उधारी के लिए रियायती अदला-बदली की व्यवस्था, रिजर्व की जरूरतों में ढील और सरकारी प्रतिभूतियों में चुनिंदा विदेशी निवेश पर कर छूट शामिल थी। इस कुल आवक में 17.4 अरब डॉलर एफसीएनआर (बी) जमाएं थीं।
रिपोर्ट के अनुसार विदेशी रकम की आवक बाजार की उम्मीदों से ज्यादा थी। बाजार के जानकारों का कहना है कि अगस्त और सितंबर में संग्रह तेज होने की संभावना है। अब बाजार के प्रतिभागी इस पर नज़र रखेंगे कि क्या आरबीआई अतिरिक्त विदेशी मुद्रा भंडार का इस्तेमाल करके दखल बढ़ाएगा क्योंकि रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। इस साल 20 मई को स्थानीय मुद्रा 96.83 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुई थी।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, एफसीएनआर जमा की आवक के बारे में आरबीआई के अच्छे आंकड़ों ने धारणा को बेहतर बनाया और रुपये की कीमत में बढ़ोतरी की। उम्मीद से बेहतर पूंजी की आवक, साथ ही कच्चे तेल की स्थिर कीमतें और डॉलर में स्थिरता ने मुद्रा को जरूरी समर्थन दिया। तकनीकी तौर पर, रुपया 95.80 प्रति डॉलर के मुख्य समर्थन स्तर और 96.50 प्रति डॉलर के प्रतिरोध पर कारोबार कर रहा है।
मंगलवार को एशियाई मुद्राओं में सीमित दायरे में कारोबार हुआ, क्योंकि निवेशक पश्चिम एशिया की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे और वैश्विक जोखिम की धारणा के संकेत के लिए बड़ी अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के नतीजों का इंतजार कर रहे थे। जुलाई में 1.64 फीसदी की गिरावट के साथ रुपया ताइवान डॉलर के बाद सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली एशियाई मुद्रा है।
विदेशों से आने वाला पैसे से भुगतान संतुलन के मोर्चे पर भी राहत मिलती है, जो पिछले दो वित्त वर्ष से घाटे में चल रहा है। बोफा सिक्योरिटीज ने एक नोट में कहा, वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में चालू खाते की स्थिति काफी हद तक संभालने लायक दिख रही है। शुरुआती दो महीनों में चालू खाते में मामूली अधिशेष रहा है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में यह लगभग 7 अरब अमेरिकी डॉलर रहने का अनुमान है।
नोट में कहा गया है, हालांकि हाल में विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है। लेकिन हम इसे मुख्य रूप से सोने की गिरती कीमतों के कारण मूल्यांकन में नुकसान के तौर पर देखते हैं और उम्मीद करते हैं कि भुगतान संतुलन में मामूली अधिशेष रहेगा।