एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान अंसारी ने कहा, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में हुए परमाणु हादसों में जो कुछ हुआ है उसे देखते हुए हादसों के संभावित स्रोतों से निजात पाना एक चुनौती है । सुरक्षा एवं संरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाए जाने की जरूरत है । हर नया अनुभव बताता है कि जिसे सुरक्षित माना गया वह पर्याप्त सुरक्षित नहीं था ।
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि विमान में दाखिल होने पर उड़ान के वक्त हादसा हो सकता है या कार में सवार रहते दुर्घटना हो सकती है ।
अंसारी ने कहा, क्या इनमें से कोई भी चीज हमें यह कहती है कि इस तरह के संचार के साधनों को अनदेखा करना चाहिए ? नहीं, बल्कि हम हालात में सुधार लाने की कोशिश करते हैं ।
उन्होंने कहा, हम एक ऐसी समस्या में अटक गए हैं जो इस बहस के लिए प्रासंगिक नहीं है पर इसका कोई विकल्प भी नहीं हो सकता । समस्या संरक्षा से जुड़ी है । आज परमाणु उर्जा हमारी उर्जा जरूरतों के थोड़े से हिस्से को पूरा कर रही है ।
अंसारी ने कहा कि भारत की आबादी और अर्थव्यवस्था के मद्देनजर देश में उर्जा की कमी है और हमेशा कमी रहेगी ।
उन्होंने कहा, आज परमाणु उर्जा थोड़ा सा योगदान कर रही है और 2032 तक यह करीब 10 फीसदी हो जाएगी । असल सवाल इस बात पर ध्यान देना है कि क्या हम इस 10 फीसदी के बगैर काम चला सकते हैं । हमारी उर्जा जरूरतें एक गंभीर मुद्दा है ।