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BS Manthan में बोलीं CCI चेयरपर्सन रवनीत कौर: AI सिस्टम अपारदर्शी, उसे जवाबदेह बनाने की दरकार

कौर ने एआई के कई फायदों जैसे कि दक्षता में इजाफा और क्षेत्रीय सुधार को स्वीकार करते हुए चेतावनी दी कि बाजार प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में इसके नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 25, 2026 | 11:00 PM IST

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) की चेयरपर्सन रवनीत कौर ने बुधवार को बिज़नेस स्टैंडर्ड मंथन समिट में रुचिका चित्रवंशी संग बातचीत में कहा कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का तंत्र अपारदर्शी है और इसे पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है। हालांकि कौर ने एआई के कई फायदों जैसे कि दक्षता में इजाफा और क्षेत्रीय सुधार को स्वीकार करते हुए चेतावनी दी कि बाजार प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में इसके नकारात्मक परिणाम भी हो सकते हैं।

उन्होंने कहा, एआई की वजह से कई मोर्चों पर हालात बेहतर हुए हैं, खासकर स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में। इससे बहुत सारे फायदे हुए हैं। लेकिन इसमें एक छिपा हुआ तथ्य यह भी है कि एल्गोरिदम की मिलीभगत हो सकती है या लक्षित मूल्य भेदभाव हो सकता है।

कौर ने कहा कि सीसीआई अपने संचालन में एआई के उपयोग को शामिल करने के तरीकों की तलाश कर रहा है। उन्होंने कहा, हमने एआई और प्रतिस्पर्धा पर एक बाजार अध्ययन किया है, इसलिए हम उन मुद्दों से निपटने के लिए भी खुद को तैयार कर रहे हैं, जो बहुत जल्द सामने आने वाले हैं।

सीसीआई ने अक्टूबर 2025 में हितधारकों के साथ परामर्श करने के बाद एआई और प्रतिस्पर्धा पर एक बाजार अध्ययन रिपोर्ट जारी की। यह परामर्श प्रबंधन विकास संस्थान सोसायटी (एमडीआईएस) के माध्यम से आयोजित किया गया था। रिपोर्ट में इस बात का आकलन किया गया कि एआई को अपनाने से प्रतिस्पर्धा की गतिशीलता और व्यावसायिक संचालन कैसे प्रभावित होते हैं, एआई से संबंधित उभरते प्रतिस्पर्धा संबंधी मुद्दे क्या हैं और मौजूदा व विकसित हो रहे नियामक ढांचे एआई के साथ किस प्रकार जुड़ते हैं।

हालांकि, कौर ने यह भी बताया कि सीसीआई अपने कामकाज में एआई के उपयोग को लेकर सतर्क है। कौर ने कहा कि डेटा संरक्षक के रूप में सीसीआई उन कारोबारों के प्रति सचेत है, जो व्यावसायिक रूप से संवेदनशील जानकारी प्रदान करते हैं और जिसके लिए गोपनीयता का अनुरोध किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, कौर ने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ तालमेल बनाए रखना सीसीआई की प्राथमिकताओं में से एक है और प्रतिस्पर्धा नियामक तीव्र तकनीकी परिवर्तन के साथ तालमेल बनाए रखने के तरीकों पर विशेषज्ञ सुझाव प्राप्त करने के लिए एआई पर एक थिंकटैंक के साथ काम करने की कोशिश कर रहा है।

कौर ने यह भी कहा कि आयोग को नए प्रतिभाशाली लोगों को शामिल करने की आवश्यकता है और क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि हम आंतरिक रूप से इस बारे में चर्चा कर रहे हैं कि थोड़े समय के लिए आने वाले इन युवा पेशेवरों पर हमारी निर्भरता संस्थागत स्मृति के निर्माण का सही तरीका नहीं है।

सीसीआई को अपने डिजिटल मार्केट ​डिविजन के लिए डेटा साइंटिस्ट और सेक्टर एनालिस्ट के साथ-साथ अर्थशास्त्रियों और कानूनी विशेषज्ञों की भी आवश्यकता हो सकती है। सीमा पार की कार्रवाइयों पर कौर ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिस्पर्धा अधिनियम भारतीय नियामक को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देता है, अगर उनके परिचालन का भारत में प्रतिस्पर्धा पर उल्लेखनीय व प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने कहा कि सीसीआई ने कई बड़ी तकनीकी कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई मेटा पर की गई है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग ने व्हाट्सऐप के 2021 के गोपनीयता अपडेट को उपयोगकर्ताओं को विकल्प से वंचित करने के कारण वर्चस्व का दुरुपयोग बताया। आयोग ने मेटा पर जुर्माना लगाया, विज्ञापनों के लिए डेटा साझा करने पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया और ज्यादा पारदर्शिता और ऑप्ट-आउट विकल्प प्रदान करने का आदेश दिया।

व्यवसायों द्वारा बाजार में प्रभुत्व स्थापित करने के तरीके के बारे में बात करते हुए कौर ने कहा कि प्रतिस्पर्धा नियामक केवल बाजार हिस्सेदारी जैसे एक ही मापदंड को नहीं देखता है।

First Published : February 25, 2026 | 10:41 PM IST