फिल्म डायरेक्टर और एक्टर शेखर कपूर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक बदलाव लाने वाली ताकत है, जो फिल्म निर्माण की दुनिया को नए सिरे से आकार दे रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड के फ्लैगशिप इवेंट बीएस मंथन में ‘Cinema in the Age of AI’ विषय पर भारत मंडपम में बोलते हुए कपूर ने कहा, “AI फिल्म इंडस्ट्री में आने वाली अब तक की सबसे लोकतांत्रिक तकनीक है।”
इस विषय पर बोलते हुए शेखर कपूर ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को इस समय बहुत ही गलत समझा जा रहा है। उन्होंने कहा, “AI इस समय सबसे ज्यादा गलत समझा जाने वाला शब्द है।” उन्होंने आगे कहा कि AI अनिश्चितता (अनप्रेडिक्टेबिलिटी) पर काम नहीं कर सकता।
उनके अनुसार, “AI बहुत ही एंडवास कंप्यूटरीकृत पूर्वानुमान (प्रेडिक्टेबिलिटी) का योग है, यह अनिश्चित नहीं है।” कपूर ने AI को तेज और व्यापक बदलाव के रूप में बताते हुए कहा, “AI असल में बहुत ही तेजी से हो रहा बदलाव है।”
शेखर कपूर ने कहा कि AI नए क्रिएटर्स को मजबूत बनाएगा। उन्होंने कहा, “AI पिरामिड के निचले स्तर से उभरेगा, क्योंकि यह इंट्यूशन को बढ़ावा देता है।” यानी तकनीक तक आसान पहुंच से ज्यादा लोग अपनी कहानियां सुना सकेंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “मुझे एक फिल्म बनाने में तीन साल लगते हैं, लेकिन AI के साथ एक बच्चा सिर्फ दो दिनों में फिल्म बना सकता है।”
भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि जल्द ही चर्चा AI से आगे बढ़ जाएगी। अगले साल तक हम AI की चर्चाओं से आगे निकल जाएंगे और फोकस विचारों पर होगा।
क्रिएटिविटी पर उन्होंने कहा, “कैओस (अराजकता) का मतलब है यह समझना कि कोई नियंत्रण नहीं है।” जब उनसे पूछा गया कि वह फिल्में कैसे चुनते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया, “मैं फिल्में नहीं चुनता, फिल्में मुझे चुनती हैं।