facebookmetapixel
रुपये की कमजोरी, बाजार की गिरावट का असर; 2025 में सिमटा भारत के अरबपतियों का क्लबVodafone Idea Share: 50% टूट सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने चेताया; AGR मामले में नहीं मिली ज्यादा राहत2026 में 1,00,000 के पार जाएगा सेंसेक्स ? एक्सपर्ट्स और चार्ट ये दे रहे संकेतसिगरेट पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, 10% तक टूट ITC और गोडफ्रे फिलिप्स के शेयर; 1 फरवरी से लागू होंगे नियमहोटलों को एयरलाइंस की तरह अपनाना चाहिए डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल: दीक्षा सूरीRBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट, क्रिप्टो पर सतर्कता; CBDC को बढ़ावाउभरते आर्थिक दबाव के बीच भारतीय परिवारों का ऋण बढ़ा, पांच साल के औसत से ऊपरनया साल 2026 लाया बड़े नीतिगत बदलाव, कर सुधार और नई आर्थिक व्यवस्थाएंसरकार ने 4,531 करोड़ रुपये की बाजार पहुंच समर्थन योजना शुरू कीअनिश्चित माहौल में सतर्कता नहीं, साहस से ही आगे बढ़ा जा सकता है: टाटा चेयरमैन

जिंदल के इस्पात सेज का स्वागत

Last Updated- December 08, 2022 | 2:02 AM IST

दुनिया भर में चल रही मंदी और रतन टाटा के सिंगुर से चले जाने के बीच पश्चिम बंगाल में निवेश की बहार आई है।


राज्य में आज एक करोड़ टन के इस्पात संयंत्र की आधारशिला रखी गई। जेएसडब्ल्यू के इस इस्पात संयंत्र पर 35,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

सिंगुर के विपरीत सलबोनी के लोगों और राजनीतिक दलों ने इस परियोजना का स्वागत किया। परियोजना स्थल तक जाने वाली सड़क पर सान जिंदल के स्वागत के बैनर लिए सभी दलों के लोग खड़े थे।

जिंदल ने भी इस मौके पर किसानों के हित वाला भाषण दिया। उन्होंने 35,000 लोगों की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, ‘कृषि और उद्योग दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। मेरे पिता ओ. पी. जिंदल किसान थे और उन्होंने अपने सभी बेटों से कहा था कि किसानों के साथ कुछ भी गलत नहीं किया जाना चाहिए।’

उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि संयंत्र में स्थानीय युवकों को रोजगार दिया जाएगा और राज्य के बाहर से लोग नहीं लाए जाएंगे। इससे पहले पुनर्वास पैकेज की घोषणा के समय भी उन्होंने यह बात कही थी। जेएसडब्ल्यू बंगाल स्टील ने व्यापक वृद्धि के सिद्धांत के आधार पर अनूठा मुआवजा पैकेज तैयार किया है और लागू किया है।

जमीन देने वाले हर परिवार से एक व्यक्ति को स्थायी रोजगार दिया जाएगा। नकद मुआवजे के अलावा उन्हें जेएसडब्ल्यू बंगाल के शेयर भी मुफ्त में दिए जाएंगे।जिंदल ने कहा कि एक करोड़ टन क्षमता वाला यह संयंत्र जब पूरी तरह चलने लगेगा तो इससे 20,000 लोगों के लिए सीधे रोजगार पैदा होंगे।

यह परियोजना तीन चरणों में तैयार होगी। पहले चरण में पैलेट प्लांट, कोयला खदान, लौह अयस्क संयंत्र और दूसरे चरण में 30 लाख टन इस्पात निर्माण का संयंत्र बनेगा। यह 2012 तक बन जाएगा। 2015 तक इसकी क्षमता 60 लाख टन और 2020 तक एक करोड़ टन हो जाएगी।

हालांकि  अगर अगले वित्तीय साल में ऋण बाजार की स्थिति में सुधार आया तो योजना में संशोधन हो सकता है। तब तक जेएसडब्ल्यू के पास विजयनगर और सेलम संयंत्रों की 80 लाख टन क्षमता होगी।

अतिरिक्त क्षमता बनने से कंपनी को काफी नकदी मिलेगी। जेएसडब्ल्यू बंगाल स्टील ने परियोजना के लिए दो साल से भी कम समय में 4500 एकड़ जमीन अधिग्रहित की है। इसमें से काफी कुछ सरकार के पास थी। इस परियोजना को विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) का दर्जा दिया गया है।

खास बात

शिलान्यास के समय जिंदल के स्वागत में खड़े हुए थे 35 हजार लोग
संयंत्र की क्षमता होगी 1 करोड़ टन औैर लागत आएगी 35 हजार करोड़

First Published - November 2, 2008 | 9:16 PM IST

संबंधित पोस्ट