2025 में चमका सोना, लेकिन 2026 में निवेशक सावधान: रिटर्न के पीछे भागने से बचें और संतुलन बनाए रखें

सोना 2025 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने परिसंपत्ति वर्ग (एसेट क्लास) में से एक रहा है, जिसने इस साल अब तक 73.9 फीसदी रिटर्न दिया है

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हिमाली पटेल   
Last Updated- December 25, 2025 | 10:28 PM IST

सोना 2025 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने परिसंपत्ति वर्ग (एसेट क्लास) में से एक रहा है, जिसने इस साल अब तक 73.9 फीसदी रिटर्न दिया है। इतनी जबरदस्त तेजी के बाद भी विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को पिछले रिटर्न के पीछे भागने से बचना चाहिए और इसके बजाय संतुलन पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही 2026 में सोने में निवेश करते समय अनुशासन बनाए रखना चाहिए।

ब्याज दरों में कटौती से कीमतों में आ सकती है तेजी

सोने की कीमतों में इस भारी तेजी के सबसे जरूरी कारणों में केंद्रीय बैंक की खासकर उभरते बाजारों में लगातार खरीदारी रही क्योंकि वे अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी से दूर हो गए हैं। शेयर डॉट मार्केट(फोनपे वेल्थ) के हेड (निवेश उत्पाद) नीलेश डी. नाइक कहते हैं, ‘2022 से उनमें से कई लोग सोना खरीदने में लगे हुए हैं, क्योंकि उन्हें अपने कुल रिजर्व में सोने का हिस्सा बढ़ने का फायदा महसूस हो रहा है खासकर पश्चिमी देशों द्वारा रूसी विदेशी परिसंपत्तियों को फ्रीज करने के बाद।’  यह संरचनात्मक मांग जल्द ही खत्म होने वाली नहीं है। एक और जरूरी बात यह है कि अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर भी उम्मीदें हैं। सोने जैसी परिसंपत्ति जो ब्याज नहीं देती है, तब अच्छा प्रदर्शन करती है, जब वास्तविक ब्याज दरों में कटौती होती है।

पीएल कैपिटल के निदेशक और रिटेल ब्रोकिंग व डिस्ट्रीब्यूशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संदीप रायचुरा कहते हैं कि अमेरिका में रोजगार में सुस्ती के बीच फेड द्वारा ब्याज दरों में कमी करने की बहुत ज्यादा संभावना है। ग्लोबल गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) ने 2025 में 700 टन से ज्यादा सोना खरीदा है।

द वेल्थ कंपनी म्यूचुअल फंड के डिप्टी चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर  प्रसन्ना पाठक कहते हैं, ‘बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भू-राजनीतिक विवाद, व्यापार तनाव और नीति अनिश्चितता, वैल्यू स्टोर के तौर पर सोने की भूमिका को और मजबूत कर रही है।’ बाजार में समय-समय पर बढ़ने वाली अस्थिरता 2026 में सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षण को और मजबूत कर सकती है। भारतीय निवेशकों के लिए डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी रिटर्न को बेहतर बना सकती है।

रिटर्न को क्या सीमित कर सकता है?

वर्ष 2026 में सोने की कीमतों में तेजी पर कई कारणों से रोक लग सकती है। एक बड़ा जोखिम यह है कि ब्याज दर में नरमी न आए। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के जिंस विश्लेषक मानव मोदी कहते हैं कि इस बात की संभावना है कि फेडरल रिजर्व सख्त रुख अपनाए, खासकर अगर महंगाई फिर से बढ़ती है और ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रहने के लिए मजबूर करती है, जिससे रियल यील्ड बढ़ जाती है। ज्यादा रियल यील्ड और मजबूत अमेरिकी डॉलर सोने के आकर्षण को कम कर देगी।

नाइक ने चेतावनी दी है कि भू-राजनीतिक तनाव या व्यापार झगड़े कम होने से सुरक्षित निवेश की मांग घट सकती है। मोदी ने बताया कि केंद्रीय बैंक की खरीदारी जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन हाल के वर्षों में बेहद ऊंचे स्तर देखे गए थे, उनसे इसकी रफ्तार धीमी हो सकती है। भारत के नजरिए से अगर रुपये में स्थिरता या बढ़ोतरी होती है, तो सोने की वैश्विक कीमतें स्थिर रहने पर भी रिटर्न कम हो सकता है। बढ़ी हुई कीमतें खासकर गहनों के लिए खुदरा मांग को भी कम कर सकती हैं। कई सालों की मजबूत रैली के बाद निवेशक मुनाफा वसूली कर सकते हैं। साथ ही ऊंचे मूल्यांकन से बाजार में ठहराव आ सकता है।

2026 के लिए दृष्टिकोण

आम राय यह है कि सोने में हाल में देखी गई बड़ी बढ़त दोबारा होने की संभावना नहीं है, भले ही लंबी अवधि के लिए परिदृश्य सकारात्मक बना हुआ है। अविसा वेल्थ क्रिएटर्स के मुख्य निवेश अधिकारी आदित्य अग्रवाल कहते हैं, ‘हमें 2026 में पिछले कुछ सालों में हुए भारी फायदे के मुकाबले मामूली रिटर्न की उम्मीद है।’ अगले 6 से 12 महीनों में सकारात्मक रुख के साथ ठहराव का दौर आने की सबसे ज्यादा संभावना दिख रही है। रिलेटिव वैल्यूएशन भी मायने रखते हैं। पिछले एक साल में सोने ने शेयरों से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिससे निफ्टी 50-सोना मूल्यांकन अनुपात उन स्तरों पर पहुंच गया है, जो ऐतिहासिक रूप से मध्यम अवधि में शेयरों के पक्ष में रहे हैं।

आंशिक मुनाफावसूली करें

जिन निवेशकों के पास पहले से सोना है, उन्हें इसे अल्पकालिक दांव की बजाय एक रणनीतिक निवेश के रूप में देखना चाहिए। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के डायरेक्टर-मैनेजर रिसर्च कौस्तुभ बेलापुरकर कहते हैं कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों के पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा जरूरत से ज्यादा हो सकता है। लेकिन उन्हें अपने रणनीतिक आवंटन के अनुसार पोर्टफोलियो को फिर से संतुलित करना चाहिए।

सोने में निवेश कैसे करना चाहिए

सोने की कीमतों में तेज उछाल के बाद इसमें निवेश करने की सोच रहे निवेशकों को सावधानी और अनुशासन बरतना चाहिए। उन्हें पिछले रिटर्न के पीछे भागने के लालच से बचना चाहिए। इसके बजाय निवेशकों को पहले यह तय करना चाहिए कि उनके कुल परिसंपत्ति आवंटन में कितना सोना फिट होगा, जिसमें उनके लक्ष्य, समय और जोखिम लेने की क्षमता को ध्यान में रखा जाएगा। बेलापुरकर के अनुसार ज्यादातर निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो का लगभग 5 से 10 फीसदी सोने में निवेश पर्याप्त होता है। वर्तमान माहौल में चरणबद्ध निवेश सबसे बेहतर रहता है। गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड म्यूचुअल फंड एसआईपी के माध्यम से मासिक निवेश करने से लागत औसत होती है और समय का जोखिम कम होता है। ऊंचे दाम पर एकमुश्त निवेश से बचना चाहिए। अग्रवाल के अनुसार निवेशकों को केवल तब एकमुश्त निवेश पर विचार करना चाहिए जब बीच में 10 से 15 फीसदी गिरावट आए।


(लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं)

First Published : December 25, 2025 | 10:20 PM IST