Editorial: बढ़ते सार्वजनिक कर्ज के बीच भारत के लिए आर्थिक चेतावनी
पश्चिम एशिया के संकट के हल का दुनिया बहुत उत्सुकता से इंतजार कर रही है। खबरें बताती हैं कि दोनों पक्ष बातचीत के लिए उत्सुक हैं। इसका असर वित्तीय बाजारों पर भी नजर आया है। अगर संकट जल्दी हल होता है तो विश्व अर्थव्यवस्था को बहुप्रतीक्षित स्थिरता मिलेगी और विभिन्न देश अपनी ढांचागत चुनौतियों से […]
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वित्त में विदेशी निवेश की सालभर की हलचल: FY26 के अहम बदलावों का एक विस्तृत सारांश
इस स्तंभ में वित्त वर्ष के पहले महीने यानी अप्रैल में आम तौर पर बीते वर्ष बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में हुए घटनाक्रम पर चर्चा होती है। इस परंपरा को जारी रखते हुए आइए उन रुझानों का विश्लेषण करते हैं जिन्होंने वित्त वर्ष 2025-26 (वित्त वर्ष 2026) की दशा-दिशा तय की। मगर पहले आंकड़ों का […]
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पश्चिम एशिया के झटके से सामने आई भारत की बाहरी कमजोरी, विकास की महत्वाकांक्षाओं पर बढ़ा दबाव
संशोधित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) श्रृंखला के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 24, वित्त वर्ष25 और वित्त वर्ष 26 में क्रमशः 7.2 फीसदी, 7.1 फीसदी और 7.6 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। यह वास्तव में बहुत अच्छा प्रदर्शन है। विशेषकर उस वातावरण में जो यूक्रेन संघर्ष, पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में ऊंची ब्याज दरों और ट्रंप […]
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Editorial: समय और संसाधन जरूरी, SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विवाद तेज
सर्वोच्च न्यायालय के 13 अप्रैल के निर्णय ने एक बार फिर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया के संचालन पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। अपने फैसले में न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के उन मतदाताओं को अंतरिम मतदान का अधिकार देने से इनकार कर दिया है जिनके नाम एसआईआर की प्रक्रिया में हटा दिए गए […]
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