पेट्रोलियम मूल्य निर्धारण की उलझी पहेली: बाजार आधारित कीमतों को लागू करने में क्यों हिचक रही सरकार?
कितने लोगों को याद है कि सरकार ने वर्ष 2002 में पेट्रोलियम उत्पादों के लिए प्रशासित मूल्य निर्धारण तंत्र (एपीएम) खत्म कर दिया था और उसी वर्ष 1 अप्रैल से पेट्रोल एवं डीजल के लिए बाजार आधारित मूल्य निर्धारण का ऐलान किया था? तब से दो दशक गुजर जाने के बाद भी सरकार यह निर्णय […]
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Editorial: 100 दिनों के युद्ध के बाद भी नहीं झुका ईरान, लेकिन दुनिया पर गहराया तेल संकट
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमलों की शुरुआत को 100 दिन से अधिक वक्त हो गया। इन हमलों को क्रमश: एपिक फ्यूरी और राइजिंग लॉयन का नाम दिया गया था। अब यह युद्ध पहले विश्व युद्ध की लड़ाई के उस हिस्से की तरह हो गया है जहां दोनों ही पक्ष बिना किसी उल्लेखनीय […]
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1980 के दशक जैसे बने देश के आर्थिक हालात, थका हुआ कॉरपोरेट सेक्टर सुधारने के लिए रणनीतिक कदम जरूरी
देश की अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता का माहौल है। अब वृहद आर्थिक आंकड़े एक अंतराल के बाद सामने आते हैं जिससे विश्लेषण में एक हिस्सा धारणात्मक हो जाता है। बहरहाल, मौजूदा माहौल को आकार देने में झटकों के एक पूरे सिलसिले की भूमिका है। वर्ष2018 और 2019 में अर्थव्यवस्था बुरी हालत में थी। उसके बाद […]
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Editorial: आश्चर्यजनक वृद्धि, लेकिन आगे की राह चुनौतियों भरी
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा गत सप्ताह जारी किए गए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर अर्थव्यवस्था 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी। यह दर पिछली तिमाही के लगभग समान है और इसके साथ एक सकारात्मक आश्चर्य भी जुड़ा हुआ […]
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