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परिवारों की आय में इजाफा मगर सतर्कता बरकरार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 11:45 PM IST

भारत में उपभोक्ताओं का मिजाज भांपने वाला सूचकांक अक्टूबर में सुधार का संकेत दे रहा है। सीएमआईई के कंज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे के अनुसार उपभोक्ता धारणा सूचकांक अक्टूबर में 2.1 प्रतिशत अधिक रहा। लगातार चौथे महीने इस सूचकांक में तेजी दर्ज हुई। कोविड-19 की दूसरी लहर के बाद जुलाई 2021 से उपभोक्ताओं की धारणा मजबूत हो रही है। जून 2021 के स्तर से यह सूचकांक 24.5 प्रतिशत उछला है। हालांकि यह तेजी उत्साह बढ़ाने वाली जरूर है, मगर सूचकांक कोविड के पूर्व के स्तर की तुलना में अब भी काफी कम है। फरवरी 2020 में महामारी से ठीक पहले यह सूचकांक 105.3 के स्तर पर था (सितंबर-दिसंबर 2015 के 100 आधार पर)। अप्रैल 2020 में यह कम होकर 45.7 रह गया। चार महीनों तक लगातार तेजी दर्ज करने के बाद भी अक्टूबर 2021 में सूचकांक 59.4 पर रहा जो महामारी के पूर्व के स्तर की तुलना में करीब 44 प्रतिशत कम रहा।
भारतीय अर्थव्यवस्था में निरंतरता बनी रहने के लिए उपभोक्ताओं की धारणा में महामारी पूर्व के स्तर की तुलना में ऊंचे स्तरों तक सुधार होना जरूरी है। फिलहाल यह मुमकिन होता नहीं दिख रहा है। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक हिस्से के तौर पर कुल उपभोग में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 59 प्रतिशत है जिसे देखते हुए उपभोक्ताओं की धारणा में तेजी से सुधार जरूरी है। सूचकांक में सुधार होने से ही अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर हिचकोले नहीं खाएगी। आय में जरूर सुधार हो रहा है। यह अभी शुरुआत है और जब आय बढ़ेगी तभी व्यय बढ़ेगा। मगर आय से लेकर व्यय तक की राह सुस्त लग रही है। पारिवारिक आय में बदलाव उपभोक्ता धारणा सूचकांक के पांच पहलुओं में एक है।
अक्टूबर 2021 में 9.7 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उनकी आय एक वर्ष पहले की तुलना में अधिक रही। एक वर्ष पहले अक्टूबर 2020 में केवल 5.4 प्रतिशत परिवारों ने कहा था कि उनकी आय एक वर्ष पहले की तुलना में बढ़ी थी। मगर अक्टूबर 2019 में 31.9 प्रतिशत परिवारों ने कहा था कि एक वर्ष पहले की तुलना में उनकी आय में इजाफा हुआ था। जून, सितंबर और दिसंबर 2019 में  समाप्त तिमाही में औसतन 33 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि उनकी आय एक वर्ष पहले के मुकाबले अधिक थी।
उन परिवारों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है जिन्होंने कहा है कि एक वर्ष पहले की तुलना में उनकी आय बढ़ी है। अप्रैल 2020 में कोविड के बाद लॉकडाउन लगने और फिर आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने के बाद से अक्टूबर 2021 में 9.7 प्रतिशत परिवारों की आय में इजाफा हुआ है जो तुलनात्मक रूप से सर्वाधिक रहा है। हालांकि यह महामारी के 33 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है। अक्टूबर 2021 में 40 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि एक वर्ष पहले की तुलना में उनकी आय कम हुई है। मई 2020 के बाद से यह लगभग किसी भी अवधि की तुलना में बेहतर आंकड़ा कहा जा सकता है। मगर कोविड से पूर्व 10 प्रतिशत से भी कम परिवारों ने अपनी आय में कमी आने की बात कही थी। उस लिहाज से अक्टूबर 2021 का आंकड़ा काफी खराब रहा है। 51 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि एक वर्ष पहले की तुलना में उनकी आय में सुधार या कमी नहीं आई है।
बढ़ी आय से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भविष्य में यह और कितनी बढ़ सकती है और लोग गैर-जरूरी वस्तुओं पर कितनी रकम खर्च कर सकते हैं। धारणा में सुधार अर्थव्यवस्था की वृद्धि की दिशा का एक मोटा संकेत देता है। अगर उपभोक्ताओं की धारणा मजबूत होती है तो गैर-जरूरी वस्तुओं पर व्यय बढ़ता है। गैर-जरूरी वस्तुओं पर उपभोक्ताओं का व्यय अर्थव्यवस्था की आर्थिक वृद्धि दर में बदलाव लाता है।
अक्टूबर में भविष्य की आय को लेकर उम्मीद बढ़ी है। आय में बढ़ोतरी की तुलना में भविष्य में आय बढऩे की अपेक्षाएं थोड़ी कम रहीं। ऐसे परिवारों की संख्या कोविड के बाद सर्वाधिक बढ़ी है जिन्हें अगले एक वर्ष में अपनी आय बढऩे की उम्मीद है। अक्टूबर 2021 में ऐसे परिवारों की संख्या 8.1 प्रतिशत बढ़ी है जो अक्टूबर 2020 में 6.7 प्रतिशत थी। हालांकि अक्टूबर 2019 में यह आंकड़ा 30 प्रतिशत था। कम से कम 1.6 प्रतिशत परिवारों ने अप्रत्यक्ष रूप से आय में सुधार की बात कही मगर उन्हें भविष्य में इसमें सुधार जारी रहने की उम्मीद नहीं है। भविष्य को लेकर स्पष्ट कुछ नहीं कहने का चलन कोविड से पूर्व देखा जा रहा था। उसके बाद महामारी के दौरान ज्यादातर समय में पारिवारिक आय से जुड़ी अपेक्षाओं का तत्कालीन परिस्थितियों से मेल नहीं दिखा। अक्टूबर में भविष्य को लेकर सतर्क उम्मीदें लोगों में फिर दिखने लगीं।
गैर-उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने में परिवारों में थोड़ी हिचकिचाहट और सतर्कता दिखी। अक्टूबर 2021 में केवल 4.8 प्रतिशत परिवारों ने कहा कि एक वर्ष पहले की तुलना में उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने का यह बेहतर समय है। अक्टूबर के पहले सप्ताह के 4.8 प्रतिशत से सुधर कर यह अनुपात तीसरे सप्ताह में 5.8 प्रतिशत हो गया मगर अंतिम सप्ताह में कम होकर 5.1 प्रतिशत रह गया।
त्योहारों के दौरान भी उपभोक्ताओं में गैर-उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने की ललक नहीं दिखी। 2020 में दीवाली से एक सप्ताह पहले 7 प्रतिशत परिवारों ने कहा था कि 2019 की तुलना में गैर-उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने का यह माकूल समय है। इस वर्ष दीवाली से एक सप्ताह पहले केवल करीब 5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि 2020 के मुकाबले गैर-उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने का यह उपयुक्त समय है। आधे से अधिक परिवारों का मानना है कि गैर-उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने के लिए मौजूदा समय एक वर्ष पहले से भी बदतर है। हमने सितंबर 2021 के आंकड़ों में उपभोक्ता वस्तुएं खरीदने को लेकर उपभोक्ताओं में सतर्कता का जिक्र किया था। आय में वृद्धि और भविष्य में आय बढऩे की उम्मीदों के बाद भी अक्टूबर में लोगों में यह सतर्कता दिखाई दी।

First Published : November 5, 2021 | 11:35 PM IST