हॉलीवुड में पहली बार भारतीय तकनीक इस्तेमाल होने जा रही है। आईआईएम अहमदाबाद के सेंटर फॉर इनोवेशन, इनकर्बेशन एंउ ऑन्टेप्रेन्योरशिप ने इस मामले में हॉलीवुड की कई फिल्म निर्माण कंपनियों ने संपर्क किया है।
यह तकनीक पुरानी तकनीक से कहीं ज्यादा बेहतर और किफायती है। उज्जवल निरगुडकर ने हाल ही में एल्फा इमेजिंग सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी शुरू की है। उनकी कंपनी ने फिल्म प्रोसेसिंग के लिए शानदार तकनीक ईजाद की है। इस शानदार तकनीक के जरिये कम लागत में ही बढ़िया काम को अंजाम दिया जा सकता है।
जिसके चलते सिनेमैटोग्राफर, फिल्म लैबोरेट्रीज, निर्माताओं और स्कैनर मैन्युफैचर्स को फायदा पहुंचेगा। उज्जवल निरगुडकर कहते हैं, ‘मैं अपने पेटेंट उत्पाद के लिए हॉलीवुड की कुछ पोस्ट प्रोडक्शन कंपनियों से और एक यूरोपीय कंपनी से बात कर रहा हूं।’ इस तकनीक से फिल्म प्रोसेसिंग की क्वालिटी और बेहतर हो जाएगी और लागत भी काबू में रहेगी।
कुल मिलाकर इसको इंडस्ट्री के हक में ही बताया जा रहा है। वैसे अभी तक फिल्म प्रोसेसिंग के लिए अलग-अलग फिल्म स्ट्रिप्स का इस्तेमाल किया जाता है। यह तरीका काफी पुराना पड़ चुका है और इसको कंप्यूटराइज भी नहीं किया जा सकता।
निरगुडकर कहते हैं, ‘इस नई तकनीक से क्रांतिकारी बदलाव आएगा। अभी तक ऑफलाइन क्वालिटी कंट्रोल का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इस तकनीक के आने से नया ऑनलाइन कंट्रोल सिस्टम बनेगा।’ वैसे इस तकनीक पर बॉलीवुड की नजर पहले ही पड़ चुकी थी लेकिन निरगुडकर इसका लाइसेंस हॉलीवुड को ही देना चाहते हैं।
वह कहते हैं, ‘दुनिया भर में भारत में सबसे अधिक फिल्में बनाई जाती हैं। लेकिन जब प्रिंट की बात आती है तो केवल 10 फीसदी ही यहां प्रोसेस्ड होता है।’ इसके अलावा निरगुडकर प्रोसेसिंग की ब्लीशिंग स्टैप के लिए कैमिकल तैयार करने के काम से भी जुड़े रहे। फिल्म प्रोसेसिंग के लिए पहले जो कैमिकल इस्तेमाल होता था वह काफी प्रदूषण फैलाता था।
भारत में नया कैमिकल पहली बार 2004 में इस्तेमाल किया गया था। उनकी इस कामयाबी की वजह से ही नीदरलैंड की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी एकजो नोबल ने निरगुडकर को इस तकनीक को हॉलीवुड समेत दुनियाभर में बढ़ावा देने के लिए अपना वैश्विक सलाहकार बनाया है।