राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) द्वारा जारी नवीनतम निरीक्षण रिपोर्टों ने देश की कुछ शीर्ष अंकेक्षण (ऑडिट) फर्मों में संरचनात्मक कमजोरियों को उजागर किया। इनमें प्राइस वाटरहाउस चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, बीएसआर ऐंड कंपनी और एसआरबीसी ऐंड कंपनी शामिल हैं। वर्ष 2025-26 में, एनएफआरए ने अपने ऑडिट निरीक्षण कार्यक्रम का विस्तार करके इसमें लगभग 35-40 फर्मों को शामिल किया, जिनकी संख्या पहले लगभग 25 थीं।
नियामक ने अंकेक्षण स्वतंत्रता, दस्तावेजीकरण, धोखाधड़ी जोखिम मूल्यांकन और संबंधित-पक्ष लेनदेन की जांच में कमियों को चिह्नित किया है। ये निष्कर्ष सामान्य तकनीकी टिप्पणियां नहीं हैं, बल्कि शासन और प्रक्रिया संबंधी गहरी खामी को दर्शाते हैं। उदाहरण के लिए, एनएफआरए ने ऐसे मामले भी चिह्नित किए जहां अंकेक्षण फर्में यह पर्याप्त रूप से आकलन करने में विफल रहीं कि सहायक कंपनियों को दिए गए ऋण वास्तव में स्वतंत्र शर्तों पर थे या नहीं।
यह भी पाया गया कि ऐसी फर्में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) आदि द्वारा की जा रही जांचों के प्रभाव का पर्याप्त मूल्यांकन करने में विफल रहीं। इनमें से कुछ ने कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन में भी देरी की जिससे एक नकली चार्टर्ड अकाउंटेंट लंबे समय तक अंकेक्षण का काम करता रहा।
इसके अलावा, स्वतंत्रता उल्लंघनों को लेकर चिंताएं, जिनमें भागीदारों द्वारा अंकेक्षित की गई संस्थाओं में वित्तीय हित रखना शामिल है, प्रणालीगत चूक को और उजागर करती हैं। ये घटनाक्रम बढ़ी हुई नियामकीय निगरानी के बीच सामने आए हैं, जहां एनएफआरए ने प्रमुख फर्मों में निरीक्षण का विस्तार किया है और भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) के साथ अधिक निकटता से समन्वय कर निगरानी को मजबूत किया है।
व्यापक चुनौती आधुनिक कॉरपोरेट संरचनाओं की बढ़ती जटिलता और अंकेक्षण फर्मों पर व्यावसायिक हितों और पेशेवर स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाने का दबाव भी है। आज बड़े कारोबारी समूह सहायक कंपनियों के जटिल नेटवर्क, सीमा-पार संस्थाओं के माध्यम से काम करते हैं और संबंधित-पक्ष लेनदेन करते हैं, जिससे अंकेक्षकों के लिए वित्तीय विवरणों को सटीकता से सत्यापित करना कठिन हो जाता है।
क्षमता संबंधी बाधाएं भी भूमिका निभाती हैं। पेशेवरों की कमी के कारण कमजोर पर्यवेक्षण, खराब दस्तावेजीकरण और धोखाधड़ी जोखिम मूल्यांकन में खामियां आदि देखने को मिलती हैं। इसके अलावा, जैसा कि वैश्विक स्तर पर देखा गया है, अंकेक्षण गुणवत्ता संबंधी चिंताएं केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, लेकिन एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था में कहीं अधिक ऊंचे दांव हैं। यहां निवेशकों का विश्वास विश्वसनीय वित्तीय रिपोर्टिंग पर बहुत अधिक निर्भर करता है।
इन चुनौतियों का हल एक प्रणालीगत और दूरदर्शी प्रतिक्रिया की मांग करता है। पहला, अंकेक्षण फर्मों को स्वतंत्र गुणवत्ता नियंत्रण तंत्र बनाकर और भागीदार स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करके आंतरिक शासन को मजबूत करना होगा। दूसरा, मानव पूंजी में निवेश आवश्यक है, जिसमें कठोर भर्ती सत्यापन प्रक्रियाएं, सतत पेशेवर प्रशिक्षण और फॉरेंसिक अंकेक्षण तथा मूल्यांकन जैसे जटिल क्षेत्रों में विशेषज्ञता शामिल है।
तीसरा, तकनीक को अंकेक्षण का केंद्र बनना होगा। उन्नत डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस साधन और वास्तविक समय जोखिम निगरानी प्रणालियां अंकेक्षण की गुणवत्ता को उल्लेखनीय रूप से सुधार सकती हैं और मानवीय त्रुटियों को कम कर सकती हैं। चौथा, फर्म नेटवर्क के भीतर अंकेक्षण और गैर अंकेक्षण सेवाओं के बीच स्पष्ट अलगाव होना चाहिए ताकि स्वतंत्रता को शब्द और भावना दोनों में संरक्षित किया जा सके।
पांचवां, एनएफआरए और आईसीएआई के बीच नियामकीय समन्वय को संस्थागत बनाया जाना चाहिए ताकि सुसंगत प्रवर्तन सुनिश्चित किया जा सके। अंततः, कंपनियों के भीतर अंकेक्षण समितियों को अधिक सक्रिय होते हुए अंकेक्षकों से उच्चतर मानकों की जांच और पारदर्शिता की मांग करनी चाहिए।
एनएफआरए के निष्कर्षों को केवल व्यक्तिगत फर्मों की आलोचना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि पूरे पेशे के लिए एक चेतावनी के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत बड़े निवेश आकर्षित करने की आकांक्षा रखता है, इसलिए इसकी वित्तीय रिपोर्टिंग रूपरेखा की विश्वसनीयता में सुधार होना चाहिए। बेहतर शासन, तकनीक और नियामकीय समन्वय के माध्यम से अंकेक्षण की गुणवत्ता को मजबूत करना आर्थिक विश्वास और स्थिरता बनाने के लिए आवश्यक है।