दुनिया के सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक अमेरिका के फेडरल रिजर्व में नेतृत्व में परिवर्तन अत्यंत दिलचस्प समय पर हो रहा है। इसकी एक वजह तो यह है कि फेड के चेयरमैन पद के लिए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा नामित केविन वार्श ने इस सप्ताह सीनेट में एक सुनवाई में कहा कि राष्ट्रपति ने उनसे कभी किसी ब्याज दर निर्णय के लिए प्रतिबद्ध होने को नहीं कहा और वह कभी ऐसा करने के लिए सहमत भी नहीं होंगे।
हालांकि, ट्रंप ने कहा कि यदि ब्याज दरें कम नहीं की जातीं तो वह निराश होंगे। वास्तव में, ट्रंप ने मौजूदा फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की आलोचना करने से कभी परहेज नहीं किया है, क्योंकि उन्होंने उनकी इच्छा के मुताबिक मौद्रिक नीति निर्णय नहीं लिए। ट्रंप का मानना है कि ब्याज दरों को काफी नीचे लाया जाना चाहिए। उन्होंने फेड के एक गवर्नर को हटाने की भी कोशिश की और पॉवेल के खिलाफ एक जांच शुरू की।
उल्लेखनीय है कि रिपब्लिकन सीनेटरों ने भी तर्क दिया है कि वार्श को शीर्ष पद के लिए पुष्टि से पहले पॉवेल के खिलाफ आरोपों को हटा दिया जाना चाहिए। प्रशासन द्वारा की गई जांच और अन्य कार्रवाइयों को फेड की स्वतंत्रता पर हमले के रूप में देखा गया, जबकि ऐसी स्वतंत्रता वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए बिल्कुल आवश्यक है। यह देखना दिलचस्प होगा कि चल रही प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है।
वार्श लंबे समय से इस पद के आकांक्षी हैं और आठ साल पहले वह पॉवेल से पीछे रह गए थे। वह फेड के पुराने सदस्य हैं। वर्ष 2006 से 2011 तक वह उसके बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य भी रहे हैं। हालांकि तब से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है।
राष्ट्रपति का लगातार ब्याज दरों को कम करने का दबाव केवल एक पहलू है। वार्श के निजी विचार भी दुनिया के सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक के कामकाज पर स्थायी असर डाल सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि वह भी कम ब्याज दरों के पक्षधर हैं, लेकिन एक बहुत विशिष्ट कारण से। वार्श ने तर्क दिया है कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस काफी हद तक अपस्फीतिकारी होगी और उत्पादकता बढ़ाएगी।
आलोचकों का कहना है कि उन्होंने फेड चेयरमैन बनने के लिए ब्याज दरों पर अपना रुख बदल लिया है। चाहे जो भी हो, मौद्रिक नीति निर्णयों में शामिल बाकी फेड सदस्य शायद आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के तर्क से सहमत न हों, जिससे मतभेद पैदा हो सकते हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि अमेरिकी मुद्रास्फीति दर लगभग पांच वर्षों से 2 फीसदी लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। ईरान युद्ध इस मामले को और जटिल बना चुका है। इसलिए, पहली चुनौती मुद्रास्फीति दर को लक्ष्य के करीब लाने की होगी।
इसके अलावा वार्श ने फेड की बैलेंस शीट के विस्तार की आलोचना की है और तर्क दिया है कि ‘मुद्रास्फीति एक विकल्प है।’ नवंबर 2025 में वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित एक लेख में उन्होंने लिखा, ‘मुद्रास्फीति तब होती है जब सरकार बहुत अधिक खर्च करती है और बहुत अधिक मुद्रा छापती है। फेड की बढ़ी हुई बैलेंस शीट, जिसे बीते संकट काल में सबसे बड़ी कंपनियों को सहारा देने के लिए तैयार किया गया था, उसको काफी हद तक घटाया जा सकता है।’
यद्यपि फेड अपनी बैलेंस शीट का आकार घटा रहा है, लेकिन तेजी से कमी करने से बाजार ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, जो ट्रंप को पसंद नहीं आएगा। अमेरिकी बजट घाटे के संरचनात्मक रूप से बढ़े हुए स्तर को देखते हुए बैलेंस शीट में तेजी से कमी करना भी कठिन होगा।
इसके अलावा, ऐसी भी खबरें हैं कि वार्श फेड अधिकारियों द्वारा संचार के स्तर को कम करना चाहते हैं। केंद्रीय बैंक का संचार बाजार की अपेक्षाओं को आकार देने का एक महत्त्वपूर्ण साधन बन चुका है, विशेष रूप से वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से। संचार की कमी वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ा सकती है। कुल मिलाकर फेड की नीतिगत पसंद का वैश्विक वित्तीय बाजारों पर असाधारण प्रभाव पड़ता है, इसलिए आने वाले हफ्तों में हितधारक हालात पर बारीक नजर रखेंगे।