facebookmetapixel
Advertisement
महंगे तेल और कमजोर रुपये से बढ़ी चिंता, सरकारी बॉन्ड यील्ड और चढ़ सकती है1 जून से नया नियम लागू: अब विदेशी सेल नहीं, सिर्फ भारतीय सेल से बने सोलर मॉड्यूल ही मान्यRBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा! खर्च चलाने के लिए राज्यों की बाजार उधारी पर बढ़ी निर्भरतानई IIP सीरीज क्यों है अहम, सरकार और निवेशकों को क्या मिलेगा फायदाStock Market Update: शेयर बाजार में लौटी रौनक! सेंसेक्स 300 अंक उछला, निफ्टी 23,600 के पार; आईटी-मेटल शेयरों में जबरदस्त खरीदारीBharti Realty: दिल्ली-एनसीआर से बाहर निकलेगी भारती रियल्टी, मुंबई और बेंगलूरु पर नजरभारत में फिर लौटा Coinbase! अब सीधे बैंक खाते से होगी क्रिप्टो खरीद-बिक्री60,000 करोड़ रुपये की पीएम-सेतु योजना में दक्षिण के इस राज्य ने मारी बाजीOla-Ather के बाद अब Simple Energy की बारी! IPO से पहले 250 करोड़ जुटाकर बनाई बड़ी तैयारीLuxury Sedans: मर्सिडीज, ऑडी और बीएमडब्ल्यू की बिक्री में सिडैन अब भी कैसे बनी बड़ी ताकत

आधार कार्ड को न समझें जन्म प्रमाण पत्र, UIDAI ने उम्र के सबूत को लेकर जारी की नई चेतावनी!

Advertisement

UIDAI ने स्पष्ट किया है कि आधार केवल पहचान का जरिया है, उम्र का कानूनी प्रमाण नहीं। किसी भी प्रकार का जन्मतिथि विवाद की जिम्मेदारी कार्ड धारक की होगी, आधार की नहीं

Last Updated- April 27, 2026 | 7:44 PM IST
Aadhaar Card
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि आधार कार्ड आपकी पहचान का पुख्ता प्रमाण तो है, लेकिन इसे जन्मतिथि या उम्र के सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। UIDAI के इस स्पष्टीकरण के बाद अब सरकारी और निजी कामों में आधार के इस्तेमाल को लेकर बनी उलझन काफी हद तक दूर हो गई है।

अथॉरिटी ने यह जोर देकर कहा है कि आधार का मुख्य काम किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना है। चूंकि आधार अधिनियम 2016 में इसे केवल पहचान पत्र के रूप में मान्यता दी गई है, इसलिए जन्मतिथि के वेरिफिकेशन के लिए इसकी कानूनी वैधता सीमित रहती है। आसान शब्दों में कहें तो अगर किसी काम के लिए उम्र का सबूत मांगा जाता है, तो वहां आधार के बजाय दूसरे वैध दस्तावेज देना जरूरी होगा।

उम्र को लेकर विवाद हुआ तो जिम्मेदारी आपकी

UIDAI ने अपने स्पष्टीकरण में एक और अहम बात कही है। अथॉरिटी के मुताबिक, अगर आधार में दर्ज जन्मतिथि को लेकर कोई विवाद होता है, तो उसे सही साबित करने की पूरी जिम्मेदारी खुद आधार कार्ड धारक की होगी। आधार जारी करने वाली इस संस्था का कहना है कि आधार सिर्फ एक नंबर है, जिसका इस्तेमाल प्रमाणीकरण के जरिए पहचान साबित करने के लिए किया जाता है।

Also Read: प्रॉपर्टी में को-ओनरशिप: कागजों पर पार्टनरशिप व जमीन पर कानूनी जंग? जानें हिस्सा बेचने और कब्जे के नियम

अक्सर देखा गया है कि लोग स्कूल में दाखिले से लेकर पेंशन योजनाओं तक में आधार को जन्म प्रमाण पत्र की तरह इस्तेमाल करते हैं। लेकिन नए नियमों और स्पष्टीकरण के बाद अब संस्थाएं आधार को उम्र के पुख्ता सबूत के तौर पर मानने से मना कर सकती हैं। ऐसे में लोगों को जन्म प्रमाण पत्र, मार्कशीट या दूसरे सरकारी दस्तावेजों का सहारा लेना होगा, जो खास तौर पर जन्मतिथि प्रमाणित करने के लिए बनाए गए हैं।

क्यों आधार है इतना खास?

आधार दरअसल 12 अंकों की एक यूनिक पहचान संख्या है, जो भारत के निवासियों को उनकी व्यक्तिगत और बायोमेट्रिक जानकारी के आधार पर जारी की जाती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ‘डुप्लीकेसी’ यानी फर्जीवाड़े को रोकने में मदद करता है। बायोमेट्रिक डेटा, जैसे उंगलियों के निशान और आंखों की पुतली (आईरिस) के स्कैन की वजह से एक व्यक्ति का सिर्फ एक ही आधार बन सकता है।

आधार का असली मकसद सरकारी योजनाओं का फायदा सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाना है। जैसे रसोई गैस (LPG) की सब्सिडी, राशन या स्कॉलरशिप का पैसा सीधे बैंक खाते में भेजना, इसे ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) कहा जाता है। इससे बीच में होने वाला भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक खत्म हो गई है। साथ ही, आधार ने बैंक खाता खोलने या नया सिम कार्ड लेने जैसी प्रक्रियाओं को ‘ई-केवाईसी’ के जरिए काफी आसान और लगभग कागज रहित बना दिया है।

Advertisement
First Published - April 27, 2026 | 7:44 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement