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Editorial: एंथ्रोपिक विवाद ने दिखाया आइना, एआई नीति पर हो पुनर्विचार 

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अमेरिकी सरकार द्वारा एंथ्रोपिक के नवीनतम आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडलों की पहुंच सीमित करने के निर्देश के कई नीतिगत प्रभाव हो सकते हैं

Last Updated- June 14, 2026 | 10:33 PM IST
Artificial intelligence (AI)

अमेरिकी सरकार द्वारा एंथ्रोपिक के नवीनतम आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडलों की पहुंच सीमित करने के निर्देश के कई नीतिगत प्रभाव हो सकते हैं। यह एआई के विकास को लेकर भूराजनीति में बदलाव लाने वाला है और इसके चलते निवेशक एआई से जुड़े कारोबारों में निवेश के मूल्यांकन की समीक्षा भी कर सकते हैं। गत शुक्रवार को अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने ‘निर्यात नियंत्रण निर्देश’ जारी किए जिनके अनुसार एंथ्रोपिक को आदेश दिया गया कि वह अपने दो सबसे शक्तिशाली एआई मॉडल क्लॉड फेबल 5 और क्लाॅड मिथोस 5 तक सभी गैर अमेरिकियों (एंथ्रोपिक में कार्यरत गैर अमेरिकियों समेत) की पहुंच रद्द कर दे। इस पत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया गया है।

एंथ्रोपिक ने कहा, ‘हमें अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अपने सभी ग्राहकों के लिए फेबल 5 और मिथोस 5 को तुरंत निष्क्रिय करना होगा।’ कंपनी का मानना है कि यह आदेश एक गलतफहमी के चलते जारी किया गया है। चिंताएं संभावित ‘जेल ब्रेक’ पर केंद्रित हैं। इस उद्योग की भाषा में जेल ब्रेक उन तरीकों को खोजने को कहते हैं जिनसे उच्च जो​खिम वाले क्षेत्रों में कार्यरत मॉडल पर लगाए गए प्रतिबंध और सुरक्षा उपाय हटाए जा सकें। एंथ्रोपिक ने फेबल 5 को मूल मॉडल मिथोस पर आधारित किया था जिसे उसने अप्रैल में लॉन्च किया था। मिथोस को बड़े पैमाने पर जारी नहीं किया गया क्योंकि इसे सुरक्षा उपायों के बिना बहुत अधिक शक्तिशाली माना गया। इसने सभी प्रमुख ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर में खामियां और कमजोरियां पहचानी थीं।

एंथ्रोपिक ने एक नियंत्रित पायलट परियोजना ग्लासविंग की शुरुआत की जिसमें गूगल, ऐपल, एमेजॉन, माइक्रोसॉफ्ट और क्राउडस्ट्राइक सहित करीब 50 जानी मानी कंपनियों को मिथोस का उपयोग रक्षात्मक साइबर सुरक्षा के लिए करने के लिए आमंत्रित किया गया था। आशंका थी कि बिना सुरक्षा उपायों के इसका उपयोग बैंकिंग और वित्तीय उद्योग में प्रयुक्त प्रणालियों को हैक करने या जैविक हथियार बनाने के लिए भी किया जा सकता है।

कंपनी ने गत मंगलवार को फेबल 5 को जारी किया जिसमें ग्लासविंग से मिली सीखों से उत्पन्न सुरक्षा शामिल की गई है। अगर कोई फेबल 5 को चलाकार किसी अहम सिस्टम को हैक करने या हथियार बनाने की कोशिश करता है तो यह मॉडल पुराने कम शक्तिशाली संस्करण की ओर लौट सकता है। अमेरिकी निर्देशों में ऐसी घटना का हवाला है जहां सुरक्षा प्रतिबंधों को धता बताने में कामयाबी मिली। एंथ्रोपिक नहीं मानती कि जेल ब्रेक का कोई गंभीर परिणाम है या यह कामयाब हुआ है।

संभव है कि कंपनी अमेरिकी सरकार को आदेश वापस लेने या उसमें संशोधन करने के लिए राजी कर ले। कुछ लोगों के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने बदले की कार्रवाई की है क्योंकि पहले पहले एक विवाद में एंथ्रोपिक ने पेंटागन को अपने मॉडलों का उपयोग जन निगरानी और स्वायत्त हथियारों के विकास के लिए करने से मना कर दिया था। एंथ्रोपिक एक प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लाने की कोशिश कर रही है और आदेश से पहले वह 1 लाख करोड़ डॉलर से अधिक मूल्यांकन पर रकम जुटा सकती थी।

चैटजीपीटी की मूल कंपनी ओपनएआई भी आईपीओ लाने वाली है। यह आदेश नीति संबंधी अनिश्चितताओं को सामने लाता है जिन्हें मूल्यांकन ढांचे में समायोजित करना कठिन होगा। लेकिन यदि कोई एआई मॉडल कितना भी अच्छा हो लेकिन सरकारें उसे व्यावसायिक रूप से लागू करने की अनुमति ही न दें तो क्या होगा? चर्चा हुई है कि एक विकेन्द्रीकृत एआई विकास मॉडल अपनाया जाए जहां किसी एक सरकार के पास पहुंच रद्द करने की शक्ति न हो। यद्यपि अन्य सरकारें भी अमेरिका की तरह प्रतिबंध लगा सकती हैं और विकेंद्रीकरण का अर्थ होगा पूंजी जुटाने के लिए जटिल कॉरपोरेट संरचनाएं स्थापित करना।

इस आदेश ने एआई अनुसंधान और विकास की भूराजनीतिक धारणाओं को बुनियादी तौर पर बदल दिया है। इन्फोसिस के संस्थापकों में से एक नंदन नीलेकणी ने पहले सुझाव दिया था कि भारत नए मॉडल बनाने के बजाय उपयोग मामलों के विकास पर ध्यान केंद्रित करे। लेकिन अब यह संसाधनों का उचित आवंटन नहीं लगता। अमेरिका ने पहले भी प्रतिबंध लगाए हैं। 1998 के पोखरण-2 परीक्षणों के बाद भारत को अपने सुपर-कंप्यूटिंग संसाधन, मौसम-पूर्वानुमान प्रोग्रामिंग और क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन स्वयं विकसित करने पड़े क्योंकि प्रतिबंध लागू थे। लगता है कि भारत को एआई में भी इसी तरह का प्रयास करना होगा। घरेलू एआई मॉडल बनाने के लिए संसाधनों के समावेशन को तेज करना होगा। यह घटना इस तथ्य को और अधिक रेखांकित करती है कि एआई और एआई तक पहुंच को संप्रभु राष्ट्रों द्वारा रणनीतिक संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए न कि केवल व्यावसायिक संसाधन के रूप में।

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First Published - June 14, 2026 | 10:33 PM IST

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